Breaking News

Big Breaking : लक्ष्य सेन India Open Badminton 2022 के फाइनल में पहुँचे, विश्व चेम्पियन लोह किन यू से होगा मुकाबला : पूरी खबर @हिलवार्ता विधानसभा चुनाव 2022 : पर्वतीय क्षेत्रों में कम लोग कर रहे मतदान, 2017 का ट्रेंड जारी रहा तो कई दलों का चुनावी गणित होगा प्रभावित, विशेष रिपोर्ट @हिलवार्ता विधानसभा चुनाव 2022: हलद्वानी में मेयर डॉ जोगेंद्र पाल सिंह रौतेला ही होंगे भाजपा के खेवनहार, सूत्रों से खबर @हिलवार्ता पिथौरागढ़ : 11 माह पहले सेना भर्ती के लिए मेडिकल फिजिकल पास कर चुके युवा लिखित परीक्षा न होने से परेशान, पूर्व सैनिक संगठन से मिले कहा प्लीज हेल्प, खबर@हिलवार्ता उत्तराखंड : विधानसभा चुनाव नामांकन में 15 दिन शेष, समर्थक बेचैन, उम्मीदवारों का पता नहीं, सीमित समय में चुनावी कैम्पेन से असल मुद्दों के गायब होने का अंदेशा,क्यों और कैसे, पढिये@हिलवार्ता
ख़बर शेयर करें -

उत्तराखंड में सरकारी अस्पतालों की हालत किसी से छुपी नही है राज्य में विशेषज्ञ डॉक्टरों के सैकड़ों पद खाली है । पर्वतीय क्षेत्रों में चिकित्सा सुविधाएं फार्मासिस्ट यह वार्ड बॉय के सहारे है । जहां डाक्टर हैं वहां अस्पताल में दवाइयों का टोटा है ।

पर्वतीय क्षेत्र में पीएचसी सीएचसी की हालत देख राज्य  आंदोलनकारी एमबीपीजी कालेज हल्द्वानी के पूर्व अध्यक्ष मोहन पाठक पिछले एक साल से प्रत्येक जिले की अधिकांश पीएचसी सीएचसी पर जाकर जायजा ले रहे हैं यही नही वह स्थानीय लोगों को जागरूक करने के साथ साथ एकदिवसीय धरना दे रहे हैं ।

Mohan pathak @manila almora on dharna

हिलवार्ता से बातचीत में मोहन पाठक ने बताया कि कोविड के दौरान कई लोगों की मौत इलाज के अभाव में हुई एक दो जगह कोविड अस्पताल बनाकर सरकार ने इतिश्री कर ली करोड़ों का बजट खप गया । गांवों में डाक्टर नहीं है । कोई सुध लेने वाला नही है । कोविड की तरह किसी भी समय कोई संक्रामक रोग आ सकता है । लेकिन हमारे पास छोटी समस्या से निपटने लायक भी संसाधन नही है पाठक का मानना है कि सरकार अगर संवेदनशील हो जाए तो राज्य की चिकित्सा की दिशा बदल सकती है ।

अभी तक मोहन पाठक पिथौरागड़, चंपावत ,अलमोड़ा ,बागेश्वर ,उधमसिंह नगर और नैनीताल जिले के 150 से अधिक पीएचसी सीएचसी पर जाकर धरना दे चुके हैं । उनकी मांग है कि खाली पड़े डॉक्टरों /फार्मासिस्टों के पद भरे जाएं खस्ताहाल स्वास्थ्य सुविधाएं दुरुस्त की जाएं साथ ही कुमायूँ के रेफरल सेंटर सुशीला तिवारी अस्पताल में एम्स की तर्ज पर सुविधाएं प्रदान की जाएं ।

कोविड के बढ़ते संक्रमण की वजह पाठक ने अपने धरना कार्यक्रम को कुछ समय के लिए विराम देने के बाद पुनः जनजागृति का अभियान जारी कर दिया है विगत तीन दिन में उन्होंने अलमोड़ा जिले के सल्ट मनीला और भिकियासैंण प्राथमिक स्वास्थ्य केंद्र का जायजा लिया और स्थानीय जागरूक लोगों के साथ एक दिवसीय धरना क्रम को आगे बढ़ाया ।

राज्य सरकार द्वारा तमाम दावों के बाद भी पर्वतीय क्षेत्र में स्वास्थ्य सेवाओं का निरंतर अकाल है । चार साल बाद राज्य को स्वास्थ्य मंत्री मिला है देखना होगा कि चुनाव तक अस्पतालों की हालत में वह किस कदर सुविधाएं जुटाने में कामयाब होते हैं ।

एक आंकड़े के अनुसार राज्य में कुल 862 डॉक्टरों की कमी है राज्य में डॉक्टरों के कुल 2735 पद सृजित हैं जिनके सापेक्ष 2000 चिकित्सक ही उपलब्ध हैं । राज्य में सबसे अधिक टोटा विशेषज्ञ डॉक्टर्स का है कुल 650 विशेषज्ञ डॉक्टरों के पद रिक्त हैं जबकि 212 जिनमे अधिकतर रिजर्व केटेगरी डॉक्टर्स के पद भी खाली है । ऐसे में अनुमान लगाया जा सकता है कि राज्य की चिकित्सा व्यवस्था की हालत कितनी खस्ता है । सबसे बड़ी दिक्कत ग्रामीण इलाकों में है जहां कई चिकित्सालय डॉक्टर विहीन हैं । आए दिन इलाज के अभाव में गर्भवती महिलाओं,बच्चों बूढ़ों की हालात दयनीय है । अस्पताल फार्मासिस्ट के सहारे चल रहे हैं कई जगह तो फार्मासिस्ट तक नहीं है ।

हिलवार्ता न्यूज डेस्क 

, , , , , , , , , , ,
Subscribe
Notify of
guest
0 Comments
Inline Feedbacks
View all comments