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  1. उत्तराखंड की राजनीति में अस्थिरता की बातें आम हैं लेकिन एक और अस्थिरता राज्यपाल को लेकर भी राज्य में बनी हुई है । राज्य गठन के बाद केवल स्व नारायण दत्त तिवारी ही अपना पांच साल का कार्यकाल पूरा कर सके बांकी के मुख्यमंत्री अल्पकाल में ही बदल दिए गए । ऐसा ही हाल कमोबेस राज्यपालों के साथ भी हुआ राज्य में अभी तक 7 राज्यपाल पदासीन हो चुके हैं लेकिन कोई भी अपना कार्यकाल पूरा नही कर सका ।
  2. आइये देखते हैं राज्य गठन के बाद से राज्य में पदासीन राज्यपालों का कार्यकाल 👉
  3. राज्य गठन के बाद 9 नवम्बर 2000 में सुरजीत सिंह बरनाला ने राज्यपाल का पद सम्हाला और 7 जनवरी 2003 तक वह राज्य के राज्यपाल रहे । मात्र 2 साल में ही उन्हें बदल दिया गया । उनकी जगह सुदर्शन अग्रवाल को राज्यपाल बनाया गया वह 8 जनवरी 2003 से 28 अक्टूबर 2007 तक इस पद पर रहे । लेकिन पूरे पांच साल पूरा होने से पहले उनके स्थान पर बी एल जोशी को राज्य में राज्यपाल की कमान सौपी गई । बी एल जोशी 29 अक्टूबर 2007 से 5 अगस्त 2009 तक इस पद पर विराजमान रहे । उनके बाद श्रीमती मार्ग्रेट अल्वा अगली राज्यपाल के तौर पर पदासीन हुई उन्होंने 6 अगस्त 2009 से 14 मई 2012 तक इस पद पर अपनी सेवाएं दी । लेकिन जल्द ही उन्हें भी अपना पद छोड़ना पड़ा। 

    अल्वा के बाद राज्य को अजीज कुरेशी के रूप में नया राज्यपाल मिला कुरेशी का कार्यकाल 15 मई 2012 से 8 जनवरी 2015 तक रहा । उनके इस्तीफे के बाद के के पाल को राज्यपाल बनाया गया 8 जनवरी 2015 से 25 अगस्त 2018 तक उन्होंने कुर्सी सम्हाली लेकिन अल्पकाल में ही उनकी भी विदाई हो गई । 26 अगस्त 2018 को उत्तराखंड की सातवीं राज्यपाल के तौर पर बेबी रानी मौर्य सुशोभित हुई अभी हाल ही 26 अगस्त उन्होंने राज्य के राज्यपाल बतौर तीन साल पूरे किए ही थे कि मौर्य ने इस्तीफा दे दिया । इस तरह उन्होंने राज्य में चल रही अल्पकालिक राज्यपाल की परिपाटी को आगे बढ़ाकर नए राज्यपाल रिटायर्ड लेफ्टिनेंट गुरमीत सिंह को राज्य का आठवां राज्यपाल बनने का रास्ता प्रसस्त कर दिया ।

    हिलवार्ता न्यूज डेस्क 

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