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एनएमसी ने ली एमसीआई की जगह 

केबिनेट द्वारा एमसीआई की समाप्ति की घोषणा होते ही, राष्ट्रीय चिकित्सा आयोग अस्तित्व में आ गया । केंद्रीय स्वास्थ्य कल्याण मंत्रालय ने इस बाबत 25 sep सूचना जारी की है ।

एनएमसी के पहले अध्यक्ष एम्स नई दिल्ली के ईएनटी विभागाध्यक्ष डॉ एस सी शर्मा होंगे । जिनकी टीम के पास मेडिकल की पढ़ाई की नियमन, का अधिकार होगा, साथ ही संस्था को मेडिकल एथिक्स,मूल्यांकन,रेटिंग आदि नियम बनाने का अधिकार होगा। जबकि मेडिकल रजिस्ट्रेशन के लिए चार स्वायत्त बोर्ड होने की बात कही गई है ।

आयोग को मेडिकल संस्थानों और प्रोफेशनल वर्क फ़ोर्स को विनियमित करने हेतु नीतियां बनाना भी शामिल है । आयोग ही यह सुनिश्चित करेगा कि निजी एवम मानद विश्वविद्यालयों की फीस क्या होगी ।

 

एनएमसी बनाए जाने के बाद अब केंद्रीय स्तर पर मेडिकल शिक्षा चिकित्सा के नियम बनाए जाएंगे । विधेयक के आने का कारण जहां सरकार एमसीआई में व्याप्त भृष्टाचार को समाप्त हो जाएगा ।सरकार साफ सुथरी व्यवस्था लाने का दावा करती रही है।

वहीं इस विधेयक का 2019 में विरोध भी हुआ था

विभिन्न मेडिकल कालेज से पढ़ाई कर रहे मेडिकल छात्रों और आईएमए से जुड़े डॉक्टर्स ने यह कहकर इस बिल का विरोध किया था कि निजी मेडिकल कालेजों में फीस नियमन नही होने पर पढ़ाई महंगी हो जाएगी ।साथ ही डॉक्टर्स को इसके द्वारा सुझाये ब्रिज कोर्स से भी नाराजगी थी । इस विरोध में कहा कि आयोग जब 50 प्रतिशत निजी और डीम्ड यूनिवर्सिटी की मेडिकल सीटों पर फीस तय करेगा जबकि 50 प्रतिशत पर से उसका नियंत्रण हट जाएगा । जिस कारण आम लोग मेडिकल शिक्षा से दूर होते चले जायेंगे ।

और यह कि नए मसौदे में कई बातें उनके एथिक्स के खिलाफ है । जैसे बिल में कहा गया था कि होमियोपैथी और आयुर्वेदिक प्रक्टिसनर्स भी एक कोर्स कर एलोपैथी की प्रैक्टिस कर सकते हैं साथ में फार्मासिस्ट नर्सेज लैब से जुड़े कर्मचारी भी कुछ हद तक दवा लिख सकते हैं । इस विरोध को सरकार ने दरकिनार कर विधेयक आज पारित कर एनएमसी का गठन कर दिया है ।

इसके साथ ही 1934 में अस्तित्व में आया एमसीआई आज समाप्त हो गया ।

हिलवार्ता न्यूज डेस्क रिपोर्ट 

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