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देहरादून :  उत्तराखंड में  21 वर्ष बाद भी आयुष चिकित्सकों का डीएसीपी पाने का सपना अधूरा ही है । आयुष चिकित्सक संघ के मीडिया प्रभारी डॉ० पसबोला ने कहा है कि आयुष प्रदेश भले ही राज्य को कहा जा रहा है लेकिन आयुष डॉक्टरों की न्यायोचित मांग की लगातार अनदेखी हो रही है ।

डॉ पसबोला ने कहा कि  एक तरफ जहां उत्तराखंड बने हुए 21 वर्ष पूर्ण हो चुके हैं और उत्तराखंड सरकार द्वारा राज्य स्थापना के अवसर पर राज्य स्थापना सप्ताह मनाया जा रहा है। वहीं दूसरी ओर आयुष प्रदेश में उत्तराखंड राज्य बनने के बाद 21 वर्ष बाद भी आयुष चिकित्सकों के लिए डीएसीपी लागू न‌ हो पाने से आयुष चिकित्सकों में घोर निराशा है।

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राजकीय आयुर्वेदिक एवं यूनानी चिकित्सा सेवा संघ उत्तराखंड (पंजीकृत) के प्रदेश मीडिया प्रभारी ने हिलवार्ता की बताया कि एकतरफ जहां आयुष प्रदेश में एलौपेथ चिकित्सकों तक के लिए डीएसीपी तथा एसडीएसीपी लागू है, फिर भला आयुष चिकित्सकों को डीएसीपी से वंचित रखने का क्या औचित्य है। यह आयुष प्रदेश में‌ सरकार द्वारा के आयुष चिकित्सकों के प्रति उपेक्षा एवं भेदभाव पूर्ण रवैये को दर्शाता है। आयुष प्रदेश में आयुष चिकित्सकों के साथ राज्य सरकार का इस तरह का सौतेला व्यवहार अत्यन्त ही दुर्भाग्य पूर्ण है ।

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बताते चलें कि हाल ही  संघ के प्रान्तीय एवं जिला स्तरीय पदाधिकारियों की द्रोण होटल में एक मीटिंग भी आयोजित की गयी थी जिसमें सर्व सम्मति से निर्णय लिया गया था कि यदि सरकार द्वारा आयुष चिकित्सकों के डीएसीपी का प्रकरण शीघ्र ही कैबिनेट में नहीं लाया जाता है और आचार संहिता लागू होने से डीएसीपी का शासनादेश जारी नहीं किया जाता है तो आयुष चिकित्सकों को प्रदेश व्यापी आंदोलन के लिए बाध्य होना पड़ेगा, जिसकी सम्पूर्ण जिम्मेदारी राज्य सरकार की होगी।

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संघ के प्रान्तीय उपाध्यक्ष डॉ० अजय चमोला ने भी सरकार के उपेक्षा पूर्ण रवैये पर नाराजगी जाहिर कर कहा है कि उत्तराखंड के पर्वतीय क्षेत्रों में आयुष चिकित्सक अपनी सेवाएं दे रहे हैं तमाम तरह की दिक्कतों के वावजूद अपनी सेवाएं दे रहे हैं । सरकार को अविलंब उनकी जायज मांगों पर निर्णय लेना चाहिए ।

हिलवार्ता न्यूज डेस्क 

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