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उत्तराखंड मे 3 मेगावाट की बिजली उत्पादक रतन सिंह गुनसोला का आज 87 वर्ष की उम्र में निधन हो गया ।उनका जन्म 1936 में मेराब पट्टी खास टिहरी में हुआ । विगत दिवस उन्होंने अपना देह त्याग दिया । स्व. गुनसोला को उत्तराखंड में पहला विद्युत उत्पादक होने का श्रेय जाता है ।

वरिष्ठ पत्रकार शीशपाल सिंह गुसाईं ने बताया कि गुनसोला के प्रयास ही थे कि इस प्रदेश को ऊर्जा प्रदेश की संज्ञा दी जाने लगी । गुसाईं ने कहा कि वह अपने जुनून और लगन के बल पर वाकई उत्तराखंड को ऊर्जा प्रदेश में तब्दील करना चाहते थे । 3 मेगावाट के बिजली प्लांट लगाने के बाद उन्हें दिक्कते ही दिक्कतें आई लेकिन इस प्रॉजेक्ट में सरकार ने कोई दिलचस्पी नही ली लिहाजा उनका सपना जितना वह चाहते थे आगे नही बढ़ पाया ।

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फ़ाइल फ़ोटो स्व. रतन सिंह गुनसोला ( फ़ोटो शीशपाल सिंह गुसाईं की वाल से )

1959 में सिविल इंजीनियरिंग में डिप्लोमा धारी गुनसोला के नाम उत्तराखंड में अनूठी उपलब्धि रही । वह उत्तराखंड के पहले विद्युत उत्पादक बने । स्व गुनसोला ने मनेरी प्रथम, किसाऊ, सहित कई योजनाओं पर काम किया। 1993 में ऐच्छिक सेवानिवृत्ति ले ली, वह 1996 में टिहरी जिला पंचायत अध्यक्ष रहे । गुनसोला बड़े बांधों के खिलाफ थे वह छोटे छोटे बांधों को बनाने की हिमायत करते थे।

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छोटी छोटी परियोजना की सबसे पहले शुरुआत उन्होंने ही भिलंगना टिहरी से की , जब 15 साल पहले भिलंगना ब्लॉक में अपनी स्वयं की परियोजना की नींव डाल कर अपने राज्य की सरकारी उत्तराखंड जल विद्युत परियोजना निगम को ललकार रहे थे। उनका कई बार सम्मेलनों में कहना था कि जल विद्युत निगम छोटी-छोटी परियोजनाएं बनकर इस प्रदेश को हम ऊर्जा प्रदेश बना सकते हैं। उन्होंने कई सम्मेलन कार्यशालाएं आयोजित कर सरकार के समक्ष कई बार सुझाव रखे लेकिन सिस्टम उनकी बातों को अनदेखा करता रहा ।

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शीशपाल गुसाईं बताते हैं कि 5- 5 मे 8- 8, 10-10 मेगावाट छोटी-छोटी परियोजनाओं का प्रारूप हर समय अपने बैग में रखा रहता था। बांध बनाने के लिए गुनसोला ने अपना मसूरी का अभिनंदन होटल और देहरादून और विकासनगर के बीच में करीब एक 100 एकड़ का फार्म हाउस बेच दिया था । उनके द्वारा स्थापित इस लघु विद्युत परियोजना कि आय 80 लाख रुपए प्रतिमाह है । उनके निधन पर हिलवार्ता गहरी संवेदना ज्ञापित करता है ।

हिलवार्ता न्यूज डेस्क 

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