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अलमोड़ा मेडिकल कालेज के प्राचार्य डॉक्टर आरजी नौटियाल अलमोड़ा से हल्द्वानी अपने मूल विभाग में भेज दिए गए । हल्द्वानी मेडिकल कालेज के प्राचार्य डॉ सीपी भैंसोड़ा अलमोड़ा और हल्द्वानी मेडिकल कालेज में डॉ अरुण जोशी की बतौर प्राचार्य नियुक्ति । तीनों डॉक्टर इसी हप्ते इधर उधर हुए हैं । सरकार इसे रूटीन ट्रांसफर कह सकती है लेकिन क्या यह वाकई रूटीन ट्रांसफर हैं ।

आइये इसकी पड़ताल करते हैं ।

सरकार चाहे जो भी कहे लेकिन माना जा रहा है कि यह सब एक मंत्री की हनक के चलते हुआ । सूत्र इसे पार्टी के भीतर गुटबाजी का नतीजा भी बताते हैं । माना जा रहा है कि जिले में भाजपा के दो गुट हैं विधान सभा मे उपाध्यक्ष रघुनाथ सिंह को न चाहने वाले गुट की नजदीकी हालिया मंत्री से बढ़ी है । कहा जा रहा है कि मामला कोविड बैठक में डॉक्टर से नाराजगी एक कारण है दूसरा डॉक्टर को फ़ोन करने वाले विधायक को नीचा दिखाना भी कहा जा रहा है । जो भी है लेकिन चर्चा जोरों पर बताई जा रही है । इसी सबके चलते अलमोड़ा मेडिकल कालेज के प्राचार्य डॉ आर जी नौटियाल को हटा दिया है हल्द्वानी मेडिकल कालेज से डॉ सीपी भैंसोड़ा को हटाकर अलमोड़ा भेज दिया गया है जबकि सुशीला तिवारी अस्पताल के सीएमएस डॉ अरुण जोशी अब हल्द्वानी मेडिकल कालेज के प्राचार्य होंगे ।

उत्तराखंड में यह विषय लगातार गरमा रहा है विपक्ष इस मुद्दे पर हमलावर है कि एक तरफ प्रदेश में डॉक्टर्स की कमी का रोना रोकर सरकारी अस्पतालों को निजी हाथों में सौपा जा रहा है दूसरी तरफ खुद मंत्री नेताओं की ईगो के चलते एक नही तीन तीन डॉक्टर इधर से उधर पटक दिए जा रहे हैं । मामला इतना बड़ा नही था कि मंत्री अपने ईगो के चक्कर मे जनहित ही भूल जाए । बताते चलें कि मंत्री रेखा आर्य ने 11 जून को अलमोड़ा के विकास भवन में अधिकारियों के साथ कोविड समीक्षा बैठक ले रही थी । इस दौरान डॉ आर जी नॉटियाल भी वहां उपस्थित थे । उसी बीच उन्हें अलमोड़ा के विधायक और विधानसभा उपाध्यक्ष का किसी मरीज के संदर्भ में फ़ोन आ गया बताया जा रहा है कि केवल सेकंड्स में ही डॉ नॉटियाल ने फ़ोन काट दिया । उसके बावजूद मंत्री नाराज हो गई मामला डाक्टर की शिकायत और उनके स्थांतरण तक ही नहीं । एक मंत्री की हनक तीन लोगों के इधर उधर होने पर अटकी । इधर सोशल मीडिया में भी मंत्री की हरकत की खूब मज्ज्मत की जा रही है । विधायक चौहान के इस बात की पुष्टि के बाद कि उनकी डॉ नौटियाल से बात हुई थी के वावजूद यह कार्यवाही हुई । इससे साफ है कि मंत्री स्थानीय विधायक के प्रति कोई सम्मान नही रखी । जो भी है यह उनका अंदरूनी मामला है बहरहाल यह प्रकरण मीडिया के लिए रिसर्च और विषय विपक्ष के लिए राजनीतिक मुद्दा बन चुका है ।


सूत्र कहते हैं कि प्रभारी मंत्री के समर्थन में जिस तरह संगठन के पदाधिकारी खड़े हुए और नौटियाल के खिलाफ खड़े हुए यह अलमोड़ा में भाजपा में गुटबाजी का नमूना है । सूत्र बताते हैं कि विधानसभा उपाध्यक्ष के फ़ोन उठाने मामले की अनदेखी भी की जा सकती थी । चूंकि डॉक्टर बता चुके थे कि विधायक का फ़ोन है ।
जानकर बताते हैं कि यह जानबूझकर विधानसभा उपाध्यक्ष को नीचा दिखाने की कोशिश है । माना यह भी जा रहा है कि मंत्री के कुछ समर्थक रेखा आर्य को अलमोड़ा से चुनाव में उतारने का मन बना रहे हैं । लिहाजा इस प्रकरण से एक साथ दो निशाने साधे गए । जबकि यह पता था कि एक सरकारी अफसर खुद सरकारी अव्यवस्था के खिलाफ इस्तीफा दे चुका हो ।
बहरहाल तीनो डॉक्टरों से अपने अपने स्थान पर जॉइनिंग ले ली है । लेकिन सवाल बरकार है कि राज्य में नेताओं की ईगो के चलते आखिर कब तक यह होता रहेगा । जबकि राज्य में चिकित्सा व्यवस्ता की हालत जगजाहिर है । बेहतर होता कि उचित संसाधन जुटाने में मंत्री अफसर एक दूसरे का सहयोग कर जनता को राहत पहुचाते ।

हिलवार्ता न्यूज डेस्क

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