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देश मे महंगाई डायन अब गायब हो गई है । सरसों का तेल 200 रुपये तो पेट्रोल 97 रुपये को छू रहा है । गैस सिलेंडर के दाम 900 रुपये के करीब है । तिलहन दलहन आटा चावल सब्जी फल के दाम बढ़ गए लेकिन कोई प्रतिक्रिया नही हैं । हल्द्वानी में टमाटर 50 तो फूल गोभी 40 रुपये किलो बिक रही है सेव 60 से 120 रुपये किलो तो संतरा 40 से 50 रुपये किलो ।

उत्तराखंड में विधान सभा चुनाव नजदीक हैं । जहाँ सत्तारूढ़ भाजपा ने चुनाव के लिए तैयारियां शुरू कर दी हैं वहीं चिर परिचित कांग्रेस अभी आपसी भाईचारा बहाल करने में ही जुटी है । कांग्रेस भाजपा के विकल्प के रूप में खुद को तैयार कर रही आम आदमी पार्टी के नेता नम्बर एक और दो उत्तराखंड का दौरा कर चुके हैं । आप के मुखिया अरविंद केजरीवाल ने जहां विजली मुफ्त और बेरोजगारों को बेरोजगारी भत्ता देने की बात को प्राथमिकता दी है । वहीं भाजपा कांग्रेस की तरफ से से अभी कोई बड़ा एलान होना बांकी है ।

राज्य बड़ी आबादी गरीबी की रेखा से नीचे जीवन यापन कर रही है । तीनो प्रमुख पार्टियों की लिस्ट में कहीं भी महगाई बड़ा मुद्दा नहीं बन पाया है । भाजपा जहां मुख्यमंत्री धामी और पीएम मोदी के नाम से चुनाव लड़ने की सोच रही है वहीं कांग्रेस में चुनावी मुद्दे को लेकर कोई स्पष्टता नजर नही आती है ।

राज्य में महगाई पर चर्चा नहीं होना एक तरह से बढ़ती महंगाई को स्वीकार करने सरीखे है । बात 2014 की की जाए तो राज्य में सतारुढ़ भाजपा ने उत्तराखंड और देश मे महगाई को बड़ा मुद्दा बनाया और उसकी राजनीतिक स्थिति में बड़ा फायदा इस मुद्दे की वजह ही हुआ इसमें कोई दो राय नहीं ।

उत्तराखंड में तीसरे विकल्प की तलाश में जुटी आप भी इस मुद्दे पर मुखर नहीं है जबकि उसके पास अब प्रत्येक जिले में सांगठनिक ढांचा तो है ही । जब 2022 विधानसभा चुनावों में ज्यादा समय नही है देखना होगा कि महगाई डायन मुद्दा बनता है कि कुछ और मुद्दा गरम होता है ।

राज्य की क्षेत्रीय पार्टियां यूकेडी उपपा उत्तराखंड विकास पार्टी, माले महगाई पर सरकार को घेरती आई है लेकिन उनका पूरे राज्य में कोई बड़ा प्रभावकारी असर नही दिखता ।

कुल मिलाकर महगाई से निजात की आशा में बैठी जनता के सामने गाड़ी कमाई खर्च करने के शिवा फिलहाल कोई विकल्प नहीं दिखता है ।

  1. हिलवार्ता न्यूज डेस्क 
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