Breaking News

Uttarakhand : पत्रकारिता के क्षेत्र में दिए जाने वाले उमेश डोभाल पुरस्कारों की घोषणा हुई,शोसल,इलेक्ट्रॉनिक,और प्रिंट मीडिया लिए चयनित हुए चार नाम,खबर @हिलवार्ता Special report : देहरादून के दो युवाओं ने बना दिया एक ऐसा सॉफ्टवेयर जो देगा अंतरराष्ट्रीय सॉफ्टवेयर को टक्कर ,खबर @हिलवार्ता चंपावत उपचुनाव : पुष्कर सिंह धामी ने चंपावत सीट से अपना पर्चा दाखिल किया, सुबह खटीमा में पूजा अर्चना के बाद पहुचे चंपावत खबर @हिलवार्ता Ramnagar : साहित्य अकादमी पुरस्कार से अलंकृत दुधबोली के रचयिता मथुरा दत्त मठपाल की पहली पुण्यतिथि पर जुटे साहित्यकार, कल होगी दुधबोली पर चर्चा,खबर @हिलवार्ता Special Report : राज्य में वनाग्नि के अठारह सौ से अधिक मामले, करोड़ों की वन संपदा खाक,राज्य में वनाग्नि पर वरिष्ठ पत्रकार प्रयाग पांडे की विस्तृत रिपोर्ट @हिलवार्ता
ख़बर शेयर करें -

जाने माने एक्टिविस्ट बधुआँ मुक्ति मोर्चा के संस्थापक स्वामी अग्निवेश का आज शाम दिल्ली के एक अस्पताल में निधन हो गया । स्वामी 81 वर्ष के थे और पिछले काफी समय से लीवर सिरोसिस से जूझ रहे थे ।वर्ष 1977 में स्वामी अग्निवेश हरियाणा सरकार में शिक्षा मंत्री रहे । राजनीति में सुचिता पसंद अग्निवेश ने राजनीति से सन्यास लेकर आर्य समाज के माध्यम से देश मे बढ़ रही कुरीतियों के खिलाफ लड़ने का प्रण लिया और उसमें उन्होंने लंबे संघर्ष किए । देश मे मजदूर मजबूर के लिए वह किसी भी कोने पहुचे और उनकी लड़ाई में अपना जीवन समर्पित किया । इंडिया अगेंस्ट करप्शन द्वारा चलाये गए आंदोलन में अन्ना हजारे के साथ अग्निवेश अग्रिम पंक्ति में शामिल रहे । आर्य समाज के समाज सुधार कार्यक्रम के अग्रणी लोगो मे शामिल रहे । पोंगा पंथी के खिलाफ बोलते रहे जिस वजह झारखंड में उनके ऊपर हमला भी हुआ ।


स्वामी अग्निवेश का जन्म 21 सितंबर 1939 को आंध्र प्रदेश में हुआ और मृत्यु आज 10 सितंबर 2020 को दिल्ली में हुई । अग्निवेश के पिता की असमय मौत की वजह उनका लालन पालन ननिहाल में हुआ उन्होंने एलएलबी और कॉमर्स की पढ़ाई की और प्रतिष्ठित सेंट जेवियर्स में अध्यापन शुरू किया । उन्होंने जल्द ही भारत के पूर्व मुख्य न्यायाधीश न्यायमूर्ति सब्यसाची मुखर्जी के अधीन वकालत भी की । अग्निवेश को वकालत भी रास नहीं आई उन्होंने 1968 में आर्य समाज मे शामिल होने की सोची और हरियाणा आ गए 25 मार्च 1970 को वह सन्यासी हो गए । इसी साल स्वामी ने आर्य सभा नामक राजनीतिक पार्टी बनाई और 1977 में वह विधायक और शिक्षा मंत्री बने । हरियाणा में मजदूरों पर पुलिस बर्बरता के खिलाफ इस्तीफा दे दिया । अग्निवेश दिल्ली आ गए और उन्होंने 1981 में बधुआँ मुक्ति मोर्चा बनाया जिसके जरिये मजदूरों और मजबूरों की आवाज बन गए । आज उनके चाहने वाले उन्हें अपनी अपनी तरह याद कर रहे हैं ।


उत्तराखंड में शराब विरोधी आंदोलन सहित राज्य आंदोलन के दौरान उनकी उपस्थिति रही उत्तराखंड के साथ उनका भावनात्मक लगाव रहा । उत्तराखंड जनसंघर्ष वाहिनी द्वारा संचालित आंदोलनों में उन्होंने कई बार प्रतिभाग किया । गरीब बेसहारा लोगों की आवाज वह देश के हर हिस्से में वह बने । हिलवार्ता की तरफ से इस योद्धा को अश्रुपूरित श्रद्धाजंलि !

हिलवार्ता न्यूज डेस्क 

 

, , ,
Subscribe
Notify of
guest
0 Comments
Inline Feedbacks
View all comments