उत्तराखण्ड
दिल के मामले में सावधानी जरूरी .आज World Heart Day पर कुमाऊं के हृदय रोग विशेषज्ञों से विशेष बातचीत पढ़िये @ हिलवार्ता
वर्ल्ड हार्ट डे विशेष:
उचित देखभाल और सही समय पर डॉक्टरी सलाह से मुमकिन है दिल की बीमारियों से बचाव यह कहना है कुमाऊँ भर के प्रसिद्ध कार्डियोलॉजिस्टस का । आज विश्व हृदय दिवस के उपलक्ष्य में जगह जगह जागरूकता अभियान चल रहा है
हिलवार्ता से खास बातचीत में कुमाऊँ के शीर्ष हृदय विशेषज्ञों ने दिए दिल को सेहतमंद रखने के गुरुमंत्र दिए और क्या कहा समझते हैं —
“हार्ट के मामलों में समय ही जीवन है, देरी पड़ सकती है भारी” यानी किसी तरह की दिल की धड़कन बढ़ना, असामान्य धड़कन होना, दिल के आसपास तेज या हल्का दर्द महसूस होना साथ ही साँस लेने में तकलीफ जैसे प्रारंभिक लक्षणों को नजरअंदाज करना जीवन पर भारी पड़ सकता है । ऐसी परिस्थिति में बिना समय गंवाए उचित चिकित्सकीय सलाह आपके जीवन को बचा सकती है ।
विश्व हृदय दिवस (World Heart Day) के अवसर पर ‘हिलवार्ता’ से विशेष बातचीत करते हुए जोशी हार्ट एंड चेस्ट क्लिनिक (काशीपुर) के वरिष्ठ हृदय रोग विशेषज्ञ डॉ. बी. सी. जोशी ने कहा कि यदि सही समय पर सजगता बरती जाए और उचित देखभाल की जाए, तो दिल की गंभीर से गंभीर बीमारियों से आसानी से बचाव संभव है।
डॉ. जोशी ने ‘हिलवार्ता’ के माध्यम से जनता को संदेश देते हुए कहा, “हार्ट के किसी भी मामले में समय (Time Factor) का सबसे महत्वपूर्ण रोल होता है। शरीर में कोई भी असामान्य लक्षण दिखने पर घरेलू नुस्खों या गैस की समस्या मानकर समय बर्बाद करना जानलेवा हो सकता है। सही समय पर सही डॉक्टर की सलाह और जांच (जैसे ECG व Echo) ही मरीज को नया जीवन दे सकती है। समय पर इलाज मिलना कार्डियोलॉजी का सबसे पहला नियम है।” डॉ जोशी के अनुसार कार्डियो-पल्मोनरी हेल्थ ठीक रहना महत्वपूर्ण है हमारे दिल और फेफड़े एक साथ काम करते हैं। रोजाना सुबह ताजी हवा में 15-20 मिनट प्राणायाम व गहरी सांस लेने (Deep Breathing) का अभ्यास करें, ताकि हृदय को पर्याप्त ऑक्सीजन मिले।

Dr B C joshi ( Sr Cardiologist) kashipur
प्रतिदिन 45 मिनट का नियम: दिल को मजबूत बनाने के लिए रोजाना 30 से 45 मिनट तेज पैदल चलना (Brisk Walk), साइकिल चलाना या स्विमिंग करना बेहद जरूरी है। डॉ जोशी कहते हैं वह स्वयं भी सुबह एक घंटा योग और पैदल जरूर घूमते हैं । इस आदत की अपने रूटीन में सम्मिलित करने से काफी रिस्क स्वयं ही ठीक हो जाते हैं ।
इस मौके पर कुमाऊँ क्षेत्र के प्रमुख कार्डियोलॉजिस्ट्स ने भी ‘हिलवार्ता’ के साथ विस्तृत गाइडलाइंस साझा कीं, ताकि आम जनमानस अपने दिल का ख्याल रख सके।
डॉ प्रकाश पंत ( पंत कार्डियो सेंटर मुखानी हल्द्वानी ) बताते हैं कि
समय पर जांच ही सुरक्षा है इसलिए यह महत्वपूर्ण है कि यदि छाती में किसी भी तरह की बेचैनी, भारीपन, अचानक सांस फूलना या बिना वजह बहुत ज्यादा पसीना आता है तो इसे हल्के में लेना भारी पड़ सकता है। ऐसे लक्षणों पर बिना देरी किए विशेषज्ञ से सलाह लेंनी आवश्यक है उन्होंने कहा कि

Dr praksh pant( Sr Cardiologist) haldwani
किसी भी तरह की दिल से संबंधित बीमारी से दूर रहने के लिए धूम्रपान व तंबाकू पर का सेवन बिल्कुल भी नहीं करना चाहिए ,बीड़ी, सिगरेट या तंबाकू का सेवन हृदय की रक्त धमनियों (Arteries) को तेजी से ब्लॉक करता है और फेफड़ों को नुकसान पहुंचाता है। डॉ पंत के अनुसार
खान-पान में ध्यान देना जरूरी है । खाने में ऊपर से नमक लेना, रिफाइंड तेल और ट्रांस-फैट (जंक फूड, पैक्ड स्नैक्स) से दिल की सेहत के लिए खतनाक है विशेषकर पोटैशियम और फाइबर से भरपूर ताजे फल व हरी सब्जियां खाने चाहिए । डॉ पंत रूटीन हेल्थ चेकअप पर जोर देते हुए कहते हैं कि 30 वर्ष की आयु पार करते ही हर व्यक्ति को वर्ष में कम से कम एक बार अपना ब्लड प्रेशर, ब्लड शुगर और लिपिड प्रोफाइल (कोलेस्ट्रॉल) टेस्ट जरूर कराना चाहिए।
हिलवार्ता ने इसी क्रम में साईं अस्पताल के मशहूर कार्डियोलॉजिस्ट
डॉ. प्रमोद जोशी (कार्डियोलॉजिस्ट, साई हॉस्पिटल, हलद्वानी) से भी बातचीत की उन्होंने वर्ल्ड हार्ट डे पर बताया कि मेडिकल भाषा में गोल्डन आवर’ (Golden Hour) बहुत महत्वपूर्ण है हार्ट अटैक आने के बाद का पहला 1 घंटा ‘गोल्डन आवर’ कहलाता है। अगर मरीज को इस 1 घंटे के भीतर सही कार्डियक अस्पताल पहुंचा दिया जाए, तो दिल की मांसपेशियों को स्थायी नुकसान होने से बचाया जा सकता है । उन्होंने बताया कि अन्य कारकों की तरह ही स्ट्रेस को मैनेज करना हार्ट हेल्थ के लिए बहुत जरूरी है । अत्यधिक मानसिक तनाव और गुस्सा शरीर में एड्रेनालाईन हार्मोन बढ़ाता है, जिससे अचानक हार्ट अटैक का खतरा रहता है। ध्यान (Meditation), योग और 7-8 घंटे की निर्बाध नींद को अपनी दिनचर्या बनाकर स्ट्रेस को कम कर दिल को बचाया और मजबूत किया जा सकता है ।

Dr pramod joshi ( Sr. Cardiologist) haldwani
डॉ जोशी कहते हैं कि बीपी या कोलेस्ट्रॉल की दवाएं खुद से कभी बंद न करें और न ही खुराक बदलें। हमेशा डॉक्टर की सलाह पर ही दवाओं में बदलाव करें।
हिलवार्ता से बातचीत में डॉ. डी. सी. पंत (पंत कार्डियो डायबिटिक क्लिनिक, टिकोनिया, हलद्वानी) ने कहा कि आपकी नियमित जीवन शैली आपके दिल की सेहत को तय करती है इसलिए किसी तरह के बिगड़े रूटीन में पूरा मेटाबॉलिज्म गड़बड़ाना कई तरह की गंभीर बीमारियों को जन्म देता है । जिसे ठीक करना आवश्यक है । उन्होंने कहा कि अनियमित दिनचर्या की वजह शुगर के मरीज बढ़ रहे हैं शुगर और दिल का गहरा संबंध है । लिहाजा डायबिटीज से पीड़ित मरीजों में सामान्य लोगों की तुलना में हृदय रोग का खतरा 2 से 3 गुना अधिक होता है। इसलिए अपना तीन महीने का औसतन शुगर (HbA1c) लेवल हमेशा 7% से नीचे रखने का प्रयास करें।

Dr dinesh pant (cardio-diabetologist) haldwani
ABC’ सुरक्षा चक्र: डायबिटीज के मरीजों को A (A1c/Sugar Control), B (Blood Pressure Control < 130/80) और C (Cholesterol Control) तीनों पर एक साथ ध्यान देना चाहिए।
साइलेंट हार्ट अटैक से सावधान: शुगर के मरीजों की तंत्रिकाएं (Nerves) कमजोर होने के कारण उन्हें अक्सर हार्ट अटैक में तेज दर्द महसूस नहीं होता। केवल पसीना आना, जी मिचलाना, अचानक घबराहट या हल्की कमजोरी भी ‘साइलेंट अटैक’ का लक्षण हो सकती है, जिसे नजरअंदाज न करें।
ज्ञात रहे कि विश्व हृदय दिवस की परिकल्पना 1999 में ‘वर्ल्ड हार्ट फेडरेशन’ (WHF) के पूर्व अध्यक्ष डॉ. एंटोनी बायस डी लूना ने विश्व स्वास्थ्य संगठन (WHO) के सहयोग से की थी। पहली बार यह दिवस 24 सितंबर 2000 को मनाया गया था।
तारीख में बदलाव: शुरुआत में इसे सितंबर के अंतिम रविवार को मनाया जाता था, लेकिन 2011 से इसे वैश्विक स्तर पर हर साल 29 सितंबर को मनाने का निश्चित निर्णय लिया गया।
मुख्य उद्देश्य: कार्डियोवैस्कुलर डिजीज (CVD) – जिसमें दिल का दौरा (Heart Attack) और स्ट्रोक शामिल हैं – के प्रति दुनिया भर में जागरूकता फैलाना, रोकथाम के तरीके सिखाना और इनसे होने वाली मौतों की दर को कम करना है।
विश्व हृदय दिवस के उपलक्ष्य में हिलवार्ता द्वारा की गई बातचीत से यह निष्कर्ष निकलता है कि सभी विशेषज्ञ दैनिक जीवनचर्या को जरूरी मानते हैं बदलती हुई जीवन शैली में खानपान बिगड़ रहा है जिसे ठीक करने की महती आवश्यकता है । अगर आपको निम्न लक्षण जैसे
छाती में दर्द या कंधे में लगातार भारीपन, दर्द गर्दन, जबड़े या बाएं हाथ की तरफ बढ़ रहा है ,बिना किसी शारीरिक मेहनत के अचानक ठंडा पसीना आ रहा है ।अचानक चक्कर , घबराहट हो रही है साथ ही सांस लेने में बहुत ज्यादा तकलीफ हो रही है तो बिना देर किए तुरंत उचित चिकित्सकीय सलाह लें ।
हिलवार्ता न्यूज डेस्क की
जनहित में प्रकाशित रिपोर्ट
