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ब्रेकिंग न्यूज :फिल्म ‘सूर्या–अंत से आरंभ तक’ पर IMA हल्द्वानी नाराज, केंद्रीय मंत्री से रोक लगाने की मांग की खबर@हिलवार्ता

 

हल्द्वानी (हिलवार्ता), 23 अक्टूबर। फिल्म ‘सूर्या–अंत से आरंभ तक’ की प्रचार सामग्री को लेकर इंडियन मेडिकल एसोसिएशन (IMA) की हल्द्वानी शाखा ने कड़ी नाराजगी जताई है। एसोसिएशन ने 23 अक्टूबर 2026 को जारी प्रेस विज्ञप्ति में फिल्म में चिकित्सा पेशेवरों को कथित तौर पर खलनायक के रूप में प्रस्तुत किए जाने पर आपत्ति जताते हुए केंद्रीय सूचना एवं प्रसारण मंत्री अश्विनी वैष्णव से हस्तक्षेप करने और चिकित्सा पेशेवरों तथा मरीजों के हित में फिल्म को रुकवाने की मांग की है।
IMA हल्द्वानी के अध्यक्ष डॉ. पंकज महेश और सचिव डॉ. दीपक अग्रवाल की ओर से जारी विज्ञप्ति में कहा गया है कि फिल्म का चित्रण स्वास्थ्यकर्मियों के प्रति नकारात्मक धारणा बनाने और उनके खिलाफ हिंसा को बढ़ावा देने की आशंका पैदा करता है। एसोसिएशन ने फिल्म की कड़ी निंदा करते हुए स्पष्ट किया कि किसी भी शिकायत या असंतोष को स्वास्थ्य सेवाएं प्रदान करने वाले लोगों के विरुद्ध हिंसा का औचित्य नहीं बनाया जा सकता।

 

Imaginary photograph 

आईएमए ने अपनी प्रेस विज्ञप्ति में कहा कि संगठन सिनेमा की रचनात्मक स्वतंत्रता और संस्थाओं की कमियों को उजागर करने के अधिकार का सम्मान करता है। सिनेमा में कठिन सवाल उठाने, गलत कार्यों को सामने लाने और सामाजिक समस्याओं पर चर्चा करने की स्वतंत्रता महत्वपूर्ण है। हालांकि, स्वास्थ्य सेवाओं के प्रति जनता का विश्वास बनाए रखना भी उतना ही आवश्यक है।
एसोसिएशन के अनुसार, चिकित्सा पेशेवरों का दायित्व नैतिक मूल्यों का पालन करना है, लेकिन समाज को उन डॉक्टरों और स्वास्थ्यकर्मियों के योगदान का निष्पक्ष चित्रण भी देखना चाहिए, जो अपना जीवन मरीजों की सेवा में समर्पित करते हैं।
भ्रष्टाचार और लापरवाही पर कार्रवाई हो, पूरे पेशे को दोषी न ठहराया जाए
IMA ने स्पष्ट किया कि चिकित्सा क्षेत्र में भ्रष्टाचार और अनैतिक कार्यों को न तो नजरअंदाज किया जाना चाहिए और न ही उनका बचाव किया जाना चाहिए। जहां भी गलत कार्य सामने आएं, वहां निष्पक्ष जांच, पारदर्शिता और जवाबदेही सुनिश्चित होनी चाहिए।
हालांकि, एसोसिएशन का कहना है कि कुछ लोगों के गलत कार्यों के कारण पूरे चिकित्सा पेशे को दोषी ठहराना उचित नहीं है। डॉक्टर, नर्स और अन्य स्वास्थ्यकर्मी कठिन परिस्थितियों में अथक परिश्रम करते हैं और मरीजों की जान बचाने में महत्वपूर्ण योगदान देते हैं। उन्हें निष्पक्ष जांच, पेशेवर सम्मान और सुरक्षित कार्यस्थल का अधिकार मिलना चाहिए।

प्रेस विज्ञप्ति में IMA ने कहा कि फिल्मों में दिखाए जाने वाले दृश्यों के माध्यम से स्वास्थ्यकर्मियों के विरुद्ध हिंसा को कभी भी सामान्य या उचित नहीं ठहराया जाना चाहिए। मरीजों और उनके परिजनों को अपनी शिकायतें उठाने का पूरा अधिकार है, लेकिन समस्याओं का समाधान कानूनी और रचनात्मक माध्यमों से किया जाना चाहिए।
एसोसिएशन के अनुसार, डॉक्टरों और अन्य स्वास्थ्यकर्मियों की सुरक्षा सुनिश्चित करना आवश्यक है, ताकि वे भयमुक्त वातावरण में अपनी जिम्मेदारियों का निर्वहन कर सकें। स्वास्थ्य सेवाओं में नैतिकता, पारदर्शिता और मरीजों का कल्याण चिकित्सा समुदाय की प्राथमिकता होनी चाहिए।

आईएमए  ने फिल्म निर्माताओं और समाज से ऐसी कहानियां प्रस्तुत करने की अपील की है, जो साहसी होने के साथ-साथ जिम्मेदार भी हों। एसोसिएशन का कहना है कि फिल्मों के माध्यम से जनता का विश्वास मजबूत होना चाहिए, न कि उन लोगों की सुरक्षा कमजोर होनी चाहिए, जो दूसरों का उपचार कर उनकी जान बचाते हैं।
एसोसिएशन ने केंद्रीय सूचना एवं प्रसारण मंत्री अश्विनी वैष्णव से मामले में तत्काल हस्तक्षेप करने और चिकित्सा पेशेवरों तथा मरीजों के व्यापक हित में उचित कदम उठाने का आग्रह किया है।

ठीक भी है किसी भी डॉक्टर की गलती, किसी अस्पताल पर कथित चिकित्सकीय लापरवाही के आरोप या किसी जांच रिपोर्ट में त्रुटि के आधार पर पूरे चिकित्सा समुदाय को कटघरे में खड़ा करना कितना उचित है? गलती की संभावना किसी भी पेशे में और किसी से भी हो सकती है। चिकित्सा पेशा भी इंसानों द्वारा इंसानों की बेहतरी और जीवन की रक्षा के लिए संचालित होता है। यदि कहीं गलती या लापरवाही हुई है, तो उसकी निष्पक्ष जांच और जिम्मेदारी तय होनी चाहिए, लेकिन किसी एक की गलती के लिए पूरी बिरादरी को गलत ठहराने की प्रवृत्ति पर रोक लगना भी आवश्यक है।

हिलवार्ता के लिए

ओ पी पाण्डेय की रिपोर्ट

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