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उत्तराखंड में राज्य के नेताओं द्वारा कोरी घोषणाएं करना आम बात है 2022 होने वाले चुनावों में जहां सतारुढ़ भाजपा हर दिन घोषणाओं के नए कीर्तिमान रच रही है वहीं विपक्षी सत्ता में लाने के लिए वादे पर वादे । लेकिन दोनों ने अपनी सरकार होते हुए घोषणाओं का 30 प्रतिशत भी काम पूरा नही किया । इतना जरूर है कि उद्घाटन , स्वागत समारोह ,और शिलापट में ही करोड़ों की धनराशि जरूर खर्च कर डाली जाती है जिसका कोई हिसाब शायद पूछा गया हो ।

ऐसी ही एक घोषणा वर्ष 2013 की है ततकालीन कांग्रेस के मुख्यमंत्री विजय बहुगुणा ने हल्द्वानी के गौलापार क्षेत्र में सूखी नदी पर पुल निर्माण की जोर शोर से घोषणा की । अखबार के पहले पन्नो पर इस घोषणा को स्थान मिला । ऐसी ही घोषणा पूर्व मुख्यमंत्री त्रिवेंद्र रावत ने हल्द्वानी रिंग रोड के सन्दर्भ में की । जिनका प्रचार पुराने अखबारों में दब गया है । नकायल पुल की घोषणा को आठ और रिंग रोड को 5 साल होने को हैं जिसकी फिर बात ही नही हुई ।

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गौला पार हल्द्वानी में सूखी नदी पर पुल निर्माण की घोषणा करते पूर्व सीएम बहुगुणा ।


सूखी नदी पर पुल के लिए संघर्षरत कांग्रेस के नेता पूर्व छात्रसंघ अध्यक्ष राजेंद्र सिंह खनवाल बहुगुणा द्वारा घोषित पुल के निर्माण की बाट जोहते रह गए । खिन्न होकर उन्होंने कार्यदायी संस्था लोक निर्माण विभाग से आरटीआई के माध्यम से 2013 में जानकारी मांगी जिसमे उन्हें बताया गया कि कुछ धनराशि प्राप्त हुई है जिससे सर्वे किया जा रहा है ।

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वर्ष 2013 में नकायल पुल गौला पार हल्द्वानी के संदर्भ में मांगी गई सूचना का उत्तर ।

लगातार चिट्ठी पत्री और पुल निर्माण की मांग करते खनवाल कहते हैं वह आजिज आ चुके हर बार थका हारा जबाब मिला । खनवाल कहते हैं उन्होंने 2020 में दुबारा उन्ही बिंदुओं पर जानकारी मांगी जिसपर विभाग द्वारा लगभग वही बातें दुहराई गई जो वर्ष 2013 में बताई गई थी ।
पूर्व छात्र नेता कहते हैं कि घोषणा करना सिर्फ लोकप्रयिता हासिल करना हो गया है । चुनावी साल में घोषणाओं की झड़ी लग जाती है लेकिन धरातल पर कुछ दिखता नही है ।

वर्ष 2020 में नकायल पुल के संदर्भ में माँगी गई सूचना । और आठ साल में हुई प्रगति रिपोर्ट की प्रति की सूचना ।

खनवाल ने आरोप लगाया कि विपक्षी सरकारों की घोषणाओं पर अमल न करना भी उत्तराखंड में ट्रेंड बन रहा है जिसे अच्छा नही कहा जा सकता है उन्होंने बताया कि नकायल पुल नही बनने की वजह क्षेत्र के लोग जान खतरे में डालकर आवागमन करते हैं । बरसात के दो महीने उक्त क्षेत्र की फसल शब्जी बर्बाद हो रही है । उसे मंडी तक पहचाना दूभर हो जाता है । सरकार को चाहिए कि अविलम्ब इस घोषित पुल का निर्माण किया जाए ।

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चुनावी साल में तमाम घोषणाओं की बौछार शुरू हो गई है । कई अभावों से जूझ रही जनता को घोषणा से इतर मूल भूत सुविधाओं का इंतजार है युवा मुख्यमंत्री को अपने पूर्ववर्ती की तरह की कोरी घोषणाओं से बचना होगा । जिससे कि सकारात्मक संदेश प्रसारित हो । और धरातल पर कार्य सम्पादन हो ।

हिलवार्ता न्यूज डेस्क

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