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  1. हलद्वानी : राज्य के मेडिकल की पढ़ाई कर रहे छात्र आंदोलन कर रहे हैं कि उनकी बेतहासा फीस कम की जाए । आंदोलन कारी छात्र 2019 और 2020 बैच के हैं । राज्य में कुल 350 छात्र विभिन्न मेडिकल कालेजों में पढ़ाई कर रहे हैं और बड़ी हुई फीस भरने में दिक्कत महसूस कर रहे हैं ।

दरअसल उत्तराखंड में 2019 से पहले मेडिकल पढ़ाई के लिए सभी मेडिकल कालेजों में एक बांड भरवाया जाता था जिसके तहत यह तय था कि उत्तराखंड के मेडिकल कालेजों में पड़ रहे छात्र कुछ साल के लिए पर्वतीय क्षेत्रों में अपनी सेवाएं देंगे । लेकिन कई छात्रों ने बांड की शर्तों का उल्लंघन किया । कई कोशिशों के बाद भी जब शर्तों के मुताबिक राज्य सरकार न तो उन डॉक्टर्स को पहाड़ चड़वा पाई न ही उनसे बॉन्ड के उल्लंघन पर तय शर्त के तहत फीस वापस ले पाई ।

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यही कारण रहा कि राज्य में श्रीनगर मेडिकल कालेज को छोड़कर सभी कॉलेजों में फीस 50 हजार से बढ़ाकर प्रथम वर्ष 4लाख 26 हजार जबकि दूसरे वर्ष 4 लाख 11 हजार रुपये कर दी गई ।
इधर छात्रों ने देश के अन्य सरकारी मेडिकल कालेजों की फीस के आंकड़े देखे तो उन्हें लगा कि मेडिकल की पढ़ाई के लिए उत्तराखंड में उन्हें सबसे ज्यादा फीस चुकानी पड़ रही है । छात्रों का कहना है कि यूपी में 36 हजार प्रतिवर्ष हिमांचल में 60 हजार प्रतिवर्ष जबकि राजस्थान में 40 हजार की एवज में उनसे 4 लाख से ऊपर फीस लिए जाना तर्कसंगत नहीं है छात्रों ने कहा है कि ऊंची फीस के चलते उनके अभिवावकों पर आर्थिक भार पड़ रहा है लिहाजा सरकार उत्तराखंड में भी फीस कम करे ।

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हल्द्वानी देहरादून के 350 छात्रों ने विगत दो सप्ताह से अपना आंदोलन जारी रखा है । उन्होंने स्वास्थ्य मंत्री और मुख्यमंत्री को ज्ञापन देकर मांग रखी है कि अविलम्ब उनकी जायज मांगों पर गौर किया जाए ।

मेडिकल छात्रों ने आज हल्द्वानी मेडिकल कालेज प्रांगण में मोमबती जलाकर अपना विरोध दर्ज करवाया है । इसी तर्ज पर दूंन मेडिकल कालेज के छात्रों ने प्रदर्शन किया है ।
उधर दूंन मेडिकल के प्राचार्य का कहना है कि चूंकि छात्रों ने नए नियमों के तहत मेडिकल शिक्षा की शर्तों पर ही प्रवेश लिया है लिहाजा उनका आंदोलन तर्कसंगत नहीं है ।

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उत्तराखंड के मेडिकल कॉलेजों में स्थानीय विद्यार्थियों के लिए अधिकांश सीटें रिजर्व हैं । और यहां पढ़ रहे अधिसंख्य छात्र पर्वतीय पृष्टभूमि से हैं अधिकांश माता पिता की आर्थिक हालात वाकई इतनी बड़ी रकम चुकाने की नही है । अब देखना है कि सरकार इन छात्रों को किस कदर राहत पहुचाती है ।

इधर कुछ छात्रों ने हिलवार्ता से बातचीत में कहा है कि एक तरफ उत्तराखंड सरकार कॉलेजों में एक लाख टेबलेट मुफ्त देने की बात कर रही है दूसरी तरफ उनकी मांगों पर विचार नही करती है तो यह उनके साथ ज्यादती होगी । उन्होंने सरकार से मांग की है कि उनकी जायज मांग पर सहानुभूति पूर्वक विचार किया जाए

हिलवार्ता न्यूज डेस्क 

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