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कैंची धाम, नीम करौली बाबा आश्रम में भंडारा 15 जून, भक्त पहुच पूजा /भंडारे में शामिल होंगे.

एक लाख के आसपास श्रद्धालु पहुचते हैं बाबा के आश्रम, भंडारे में.विशेष मालपुए का भोग लगता है हनुमान जी को,कई दिन पहले से अनन्य भक्त शामिल होते हैं तैयारियों के लिए.
स्थानीय प्रशासन ले चुका है तैयारियों का जायजा
बाबा नीम करोली कैंची धाम में 15 जून को आयोजित होने वाले भव्य मेले की व्यवस्थाओं का जायज़ा 13 जून गुरूवार की देर सांय जिलाधिकारी श्री विनोद कुमार सुमन तथा एसएसपी श्री सुनील कुमार मीणा ने लिया, निरीक्षण के दौरान जिले के अन्य वरिष्ठ अधिकारी भी मौजूद रहे. जिलाधिकारी श्री सुमन ने कैंची धाम ट्रस्ट के अध्यक्ष सदाकान्त से विचार विमर्श किया तथा प्रशासन की ओर से की जाने वाली व्यवस्थाओं की विस्तार से जानकारी दी तथा विभिन्न सुरक्षात्मक पहलुओ तथा व्यवस्थाओं के बारे में विस्तार से वार्ता की. नीम करोली धाम में प्रतिवर्ष 15 जून को आयोजित होने वाले इस विशाल मेले में देश एवं विदेश के हजारों की संख्या में श्रद्धालु पहुॅचते है। श्रद्धालुओं को किसी प्रकार की कोई असुविधा न हो, इसके लिए प्रशासनिक स्तर पर व्यापक तैयारिया की जाती है, इसी कड़ी में शनिवार को आयोजित होने वाले मेले में आने वाले श्रद्धालुओ के लिए व्यापक मात्रा पेयजल की व्यवस्था की गई है तथा पुलिस महकमे द्वारा मेला क्षेत्र में व्यापक सुरक्षा के इंतजाम भी किए गए है। उन्होंने बताया कि मुख्य चिकित्साधिकारी के नैतृत्व में एक मेडिकल टीम तथा एम्बुलेंस भी आवश्यक जीवन रक्षक औषधियों के साथ उपलब्ध रहेगी, इसके साथ ही पुलिस एवं प्रशासनिक अधिकारी मजिस्ट्रेट के रूप में तैनात कार्यरत रहेंगे। उन्होंने कहा कि श्रद्धालुओं के स्वागत के लिए तथा मेले को शान्तिपूर्वक सम्पन्न कराने के लिए प्रशासन तत्पर रहेंगे.
आइये बाबा नीम करौली और धाम की स्थापना के बारे में जानें.
बताया जाता है कि बीसवीं सदी के चर्चित संतों में शामिल बाबा नीम करौली का उत्तरप्रदेश के फिरोजाबाद,के अकबरपुर में सन 1900 में जन्म हुआ, बचपन से ही हनुमान भक्ति में तल्लीन बाबा ने नैनीताल स्थिति कैंची आने से पहले फर्रूखाबाद के नीब करौली में हनुमान साधना की, कहा जाता है कि बाबा 1942 में घूमने के दौरान कैंची उन्हें बेहद रुचिकर स्थान प्रतीत हुआ, रुकने के दौरान उनकी मुलाकात स्थानीय निवासी श्री पूर्णानंद जी हुई ,उन्होंने वर्तमान स्थल पर एक मंदिर के निर्माण की इच्छा जाहिर की, चूंकि स्थल वन विभाग की जमीन थी उस पर निर्माण की अनुमति लेना जरूरी थी ,वर्ष 1960 में विभाग से अनुमति बाद इस धाम के बनने का रास्ता साफ हो गया और वर्ष 1964 में वह नैनीताल जिले के कैंची नामक स्थान हनुमान मंदिर की स्थापना हुई ,बाबा का नीम करौली नाम नाम पड़ने के पीछे तर्क दिया जाता है कि लक्ष्मीनारायण शर्मा नामक इन संत ने फर्रुखाबाद के नीम करौली में साधना की, इसलिए उनका नाम नीम करौली बाबा पड़ा और इसी नाम से उन्हें जाना जाता है.
नैनीताल जिले में स्थित कैंची धाम उत्तराखंड के काठगोदाम रेलवे स्टेशन से 37 नैनीताल हेडक्वार्टर से 17 किमी भवाली से 9 किमी जबकि पंतनगर हवाई अड्डे से 71 किमी दूरी पर अलमोड़ा हल्द्वानी एन एच 109 के किनारे है.बाबा के भक्त गिरीश जोशी बताते हैं कि 15 जून 1964 को हनुमान के अवतार स्वरूप जाने गए बाबा नीम करौली ने यहां हनुमान जी की मूर्ति स्थापित की थी इसी दिन मूर्ति की प्राण प्रतिष्ठा हुई अतएव हर साल 15 जून प्रतिष्ठा दिवस के रूप में मनाया जाने लगा जो अनवरत जारी है ।पहाड़ों में अमूमन अधिकतर धार्मिक स्थल ऊँचाई में बने हैं बहुत कम जगहें हैं जहाँ कम ऊँचाई के वावजूद यह स्थल बहुत ही रमणीक है बगल में छोटी सी जलधारा आश्रम में देवताओं के चरण स्पर्श कर मानो निकल रही है धाम में कुल पांच देवी देवताओं के मंदिर,धर्मशाला हैं जहां भक्त रुककर अपने गुरु को याद करते हैं.
मेले में 1 लाख से अधिक श्रद्धालुओं के पहुचने की उम्मीद
प्रसिद्ध मेले में पिछले साल श्रद्धालुओं की संख्या को देखते हुए एक लाख से अधिक लोगों के पहुचने की बात की जा रही है जिसके लिए अलमोड़ा रानीखेत सहित पर्वतीय इलाकों को आने और जाने वाले वाहनों के लिए परिवर्तित रूट की जानकारी दी जा चुकी है.
हिलवार्ता पर्यटन डेस्क
@hillvarta. com