उत्तराखण्ड
उत्तराखंड में दुर्गम भौगोलिक परिस्थितियों के बीच बड़ी आबादी किसी न किसी रूप में फार्मासिस्टों पर निर्भर, पढ़िए विश्व फार्मासिस्ट दिवस पर विशेष रपट@ हिलवार्ता
देहरादून .आज अंतरराष्ट्रीय फार्मासिस्ट दिवस है फार्मासिस्ट दिवस पर हिलवार्ता ने फार्मासिस्टों की भूमिका और उनके समक्ष आने वाली चुनौतियों पर एक नजर डालने की कोशिश की है …
राज्य में फार्मासिस्ट लंबे समय से अपनी पांच सूत्री मांगों को लेकर धरना-प्रदर्शन करते रहे हैं। फार्मासिस्टों की अपेक्षा है कि सरकार उनकी लंबित मांगों पर सकारात्मक पहल करते हुए उनका समाधान करे। इनमें वेतन में वृद्धि, रिक्त एवं नए पदों का सृजन तथा पदोन्नति जैसी मांगें प्रमुख हैं। साथ ही, दूरस्थ और दुर्गम पर्वतीय क्षेत्रों में जिम्मेदारी के साथ सेवाएं दे रहे फार्मेसी कर्मचारियों के लिए विशेष प्रोत्साहन की घोषणा की जाए तो इससे उनका मनोबल बढ़ेगा और कठिन परिस्थितियों में स्वास्थ्य सेवाओं को बेहतर ढंग से संचालित करने में भी मदद मिलेगी। पर्वतीय क्षेत्रों में स्वास्थ्य सेवाओं की जरूरतों को देखते हुए फार्मासिस्टों की लंबित मांगों के समाधान को स्वास्थ्य व्यवस्था को मजबूत करने की दिशा में एक महत्वपूर्ण कदम माना जा सकता है।
उत्तराखंड के पर्वतीय क्षेत्रों में स्वास्थ्य सेवाओं की चुनौतियां किसी से छिपी नहीं हैं। दुर्गम भौगोलिक परिस्थितियां, दूर-दराज के गांव और कई स्थानों पर चिकित्सकों एवं विशेषज्ञ सेवाओं की सीमित उपलब्धता के बीच स्थानीय स्तर पर स्वास्थ्य सेवाओं की निरंतरता बनाए रखना बड़ी चुनौती है। ऐसे में प्रदेश की बड़ी आबादी के लिए फार्मासिस्ट स्वास्थ्य व्यवस्था की महत्वपूर्ण कड़ी के रूप में अपनी भूमिका निभा रहे हैं।
हर वर्ष 25 सितंबर को अंतरराष्ट्रीय फार्मासिस्ट दिवस (World Pharmacists Day) मनाया जाता है। इस दिवस का उद्देश्य स्वास्थ्य सेवाओं में फार्मासिस्टों के योगदान को रेखांकित करने के साथ दवाओं के सुरक्षित, प्रभावी और तर्कसंगत उपयोग के प्रति लोगों को जागरूक करना है।
पर्वतीय क्षेत्रों में बढ़ जाती है जिम्मेदारी
पर्वतीय उत्तराखंड में कई गांव और बस्तियां स्वास्थ्य केंद्रों से काफी दूरी पर स्थित हैं। चिकित्सकीय परामर्श के लिए लोगों को कई बार लंबी दूरी तय करनी पड़ती है। ऐसी परिस्थितियों में स्थानीय स्तर पर उपलब्ध प्रशिक्षित फार्मासिस्ट स्वास्थ्य व्यवस्था की एक महत्वपूर्ण कड़ी बनते हैं।
दवाओं की उपलब्धता के साथ उनके सही उपयोग, निर्धारित खुराक, सेवन की अवधि, संभावित दुष्प्रभाव और दवा से जुड़ी सावधानियों के संबंध में मरीजों को जानकारी उपलब्ध कराने में फार्मासिस्ट महत्वपूर्ण भूमिका निभाते हैं।
हालांकि फार्मासिस्ट चिकित्सक का विकल्प नहीं हैं और बीमारी का निदान एवं उपचार संबंधी निर्णय योग्य चिकित्सक द्वारा ही किया जाना चाहिए, लेकिन मरीज और स्वास्थ्य व्यवस्था के बीच दवा से संबंधित जानकारी और सुरक्षित उपयोग की महत्वपूर्ण कड़ी के रूप में उनकी भूमिका को नजरअंदाज नहीं किया जा सकता।
दवा देना ही नहीं, सही जानकारी देना भी जिम्मेदारी
आधुनिक फार्मेसी का क्षेत्र अब केवल दवा उपलब्ध कराने तक सीमित नहीं रह गया है। दवा किस मात्रा में और किस समय लेनी है, भोजन से पहले या बाद में लेनी है या नहीं, कितने समय तक लेनी है तथा अन्य दवाओं के साथ उसके संभावित प्रभाव क्या हो सकते हैं—इन पहलुओं की जानकारी मरीजों को सुरक्षित उपचार में मदद करती है।
विशेष रूप से बुजुर्ग मरीजों, लंबे समय से दवा लेने वाले मरीजों और एक साथ कई दवाओं का सेवन करने वाले लोगों के लिए दवा संबंधी सही जानकारी बेहद महत्वपूर्ण होती है।
एंटीबायोटिक के तर्कसंगत इस्तेमाल पर जोर
एंटीमाइक्रोबियल रेजिस्टेंस यानी AMR पूरी दुनिया के सामने एक गंभीर स्वास्थ्य चुनौती है। बिना चिकित्सकीय आवश्यकता के एंटीबायोटिक लेना, स्वयं दवा शुरू करना अथवा निर्धारित उपचार को बीच में छोड़ देना इसके बढ़ने का एक कारण हो सकता है।
फार्मासिस्ट लोगों को एंटीबायोटिक सहित अन्य दवाओं के जिम्मेदार और तर्कसंगत उपयोग के प्रति जागरूक करने में महत्वपूर्ण भूमिका निभा सकते हैं। आम लोगों के लिए यह समझना भी जरूरी है कि हर बुखार, सर्दी-जुकाम या वायरल संक्रमण में एंटीबायोटिक आवश्यक नहीं होती।
सेल्फ-मेडिकेशन में भी जरूरी है सावधानी
दवाओं की आसानी से उपलब्धता के कारण कई लोग सामान्य लक्षणों में स्वयं ही दवा लेना शुरू कर देते हैं। दर्द, बुखार, एसिडिटी अथवा अन्य समस्याओं में बिना उचित चिकित्सकीय सलाह के दवा लेना कुछ परिस्थितियों में नुकसानदायक हो सकता है, खासकर तब जब व्यक्ति पहले से किसी बीमारी की दवा ले रहा हो।
फार्मासिस्ट मरीजों को दवा के सुरक्षित उपयोग के संबंध में आवश्यक जानकारी देने और जरूरत पड़ने पर चिकित्सकीय परामर्श लेने के लिए प्रेरित करने में उपयोगी भूमिका निभा सकते हैं।
स्वास्थ्य सेवाओं के कई क्षेत्रों में योगदान
आज फार्मासिस्ट अस्पतालों और सामुदायिक स्तर पर दवा वितरण के अलावा क्लीनिकल फार्मेसी, अस्पताल फार्मेसी, फार्मास्युटिकल उद्योग, अनुसंधान, दवा नियमन और सार्वजनिक स्वास्थ्य जैसे अनेक क्षेत्रों में अपनी सेवाएं दे रहे हैं।
नई दवाओं और उपचार पद्धतियों के विकास के साथ फार्मासिस्टों की जिम्मेदारियां भी लगातार बदल रही हैं। दवा सुरक्षा, मरीजों की जागरूकता और स्वास्थ्य सेवाओं के बेहतर समन्वय में उनका योगदान महत्वपूर्ण होता जा रहा है।
सुधा कुकरेती और डॉ. सतीश चंद्र पांडे सहित पूर्व/ वर्तमान पदाधिकारियों ने दी शुभकामनाएं
उत्तराखंड डिप्लोमा फार्मासिस्ट एसोसिएशन की अध्यक्ष सुधा कुकरेती एवं महासचिव डॉ. सतीश चंद्र पांडे ने अंतरराष्ट्रीय फार्मासिस्ट दिवस के अवसर पर प्रदेश के सभी फार्मासिस्टों को हार्दिक शुभकामनाएं दी हैं।
उन्होंने कहा कि उत्तराखंड जैसे पर्वतीय राज्य में स्वास्थ्य सेवाओं के क्षेत्र में फार्मासिस्टों की भूमिका विशेष महत्व रखती है। दुर्गम एवं दूरस्थ क्षेत्रों में लोगों तक आवश्यक दवाओं और दवा संबंधी जानकारी पहुंचाने में फार्मासिस्ट अपनी जिम्मेदारी निभा रहे हैं।
उन्होंने कहा कि बदलती स्वास्थ्य जरूरतों के साथ फार्मासिस्टों की जिम्मेदारियां भी बढ़ रही हैं। दवाओं के सुरक्षित एवं तर्कसंगत उपयोग के साथ मरीजों को दवा संबंधी आवश्यक जानकारी उपलब्ध कराना स्वास्थ्य सेवाओं की गुणवत्ता और मरीजों की सुरक्षा के लिए महत्वपूर्ण है।
दोनों पदाधिकारियों ने प्रदेश के सभी फार्मासिस्टों के योगदान की सराहना करते हुए उनके उज्ज्वल भविष्य की कामना की।
स्वास्थ्य व्यवस्था को मजबूत करने में जरूरी है हर कड़ी
अंतरराष्ट्रीय फार्मासिस्ट दिवस फार्मेसी पेशे से जुड़े लोगों के योगदान को सम्मान देने के साथ यह याद दिलाता है कि स्वास्थ्य सेवा केवल चिकित्सक और अस्पताल तक सीमित नहीं है। डॉक्टर, नर्स, फार्मासिस्ट और अन्य स्वास्थ्यकर्मी मिलकर स्वास्थ्य व्यवस्था को मजबूत बनाते हैं।
उत्तराखंड के पर्वतीय क्षेत्रों में जहां भौगोलिक परिस्थितियां स्वास्थ्य सेवाओं तक पहुंच को चुनौतीपूर्ण बनाती हैं, वहां पर्याप्त चिकित्सकीय सेवाओं के साथ प्रशिक्षित फार्मासिस्टों की उपलब्धता भी महत्वपूर्ण है।
सही दवा, सही मात्रा, सही समय और दवा के सुरक्षित उपयोग की सही जानकारी—मरीज की सुरक्षा में इन सभी की अहम भूमिका है। इस पूरी प्रक्रिया में फार्मासिस्ट स्वास्थ्य व्यवस्था की एक ऐसी महत्वपूर्ण कड़ी हैं, जिसकी भूमिका पर्वतीय उत्तराखंड में और भी महत्वपूर्ण हो जाती है।
विश्व फार्मासिस्ट दिवस पर हिलवार्ता
न्यूज डेस्क की रिपोर्ट
