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रामगढ़ में लगभग आधा दर्जन गांवों में आपदा की मार पड़ी है जहां ज्यादा नुकसान हुआ है उनमें उमागढ़, खोपा,रिया,कलचुनियाँ, तल्ला रामगढ़  शुकना,गाड़खेत, झुतिया और बोहरकोट हैं । सबसे प्रभावित गाड़खेत और झुतिया रहे जहां 12 लोगों की जान चली गई ।

बोहरकोट के पांच परिवारों की जमीन को भारी नुकसान हुआ है यहां पृथ्वी राज सिंह की पांच एकड़ जमीन का अधिकतर हिस्सा धस गया है ।
हिलवार्ता से बातचीत में उन्नत किसान पृथ्वी ने बताया कि उनकी लगभग दो तिहाई जमीन खराब हो गयी है दो मछली टैंक में एक खत्म हो गया जबकि दुसरा लगभग खराब हो गया है। सारी मछलियां मर गयी। मुंगफली की सारी फसल, दस हजार स्ट्राबेरी की पौध बर्बाद हो गई है बगीचे को भी भारी नुकसान हुआ है। घर और जमीन में छह से दस इंच की दरारें पड़ गई हैं ।

किसान पृथ्वी राज सिंह के मकान में आपदा के बाद आई दरारें 

इतना नुकसान होने के वावजूद पृथ्वी ने पास के लोगों की मदद की उन्होंने पीड़ित परिवारों को फौरी मदद के लिए प्रशासन को अवगत कराया स्थानीय लोगों को पीढ़ितों के लिए सहायता की व्यवस्था की । लेकिन चार दिन बाद भी उक्त क्षेत्र में कोई भी प्रशासनिक मदद न मिलने से वह आहत हैं ।

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उमागढ़ गामसभा के बोहरा कोट में रमेश चन्द्र आर्य पुत्र जैत राम, मनोज कुमार पुत्र बहादुर राम, नन्दकिशोर, ज्ञान प्रकाश जोशी,शंभु दत्त डालाकोटी,बसन्त डालाकोटी के परिवारों पर भीषण संकट आन पड़ा । डालाकोटी परिवार के सदस्यों को अपनी जान गवानी पड़ी जबकि उक्त तीन दलित परिवार अपनी जमीन और पशुधन खो बैठे हैं ।

आपदा में तल्ला रामगढ़ बाजार का एक क्षतिग्रस्त घर और दुकानें 

रमेश चंद्र आर्य ने हिलवार्ता को बताया कि ग्राम प्रधान रेखा जोशी और कंचन दरमवाल की कोशिशों से उन्हें उनकी पत्नी दो बच्चों को पास में स्थित उद्यान विभाग के सर्वेंट क्वाटर में शिफ्ट किया गया है जहां दो दिन से बिना लाइट के वह अपना गुजारा कर रहे हैं । रमेश ने बताया कि उनकी आठ बकरियां भी इस आपदा की भेंट चढ़ गई । उनके सामने आगे दिन काटने की मुश्किलें बढ़ गई हैं । बच्चों के भविष्य की चिंता के बीच उन्हें नींद नही आ रही है । यही हाल बहादुर राम नंद किशोर के परिवारों के साथ भी है ।

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ग्रामीण रमेश चंद्र का मकान और जमीन की हालत का आँखों देखी हाल

रमेश कहते हैं कि गांव के इन दो लोगों की मदद से उन्हें दो टाइम का खाना सोने बिछौने के लिए चादरें बर्तन मिल गए वरना सरकारी मदद के इंतजार में तो बैठे रह जाते ।

रमेश ने बताया कि 18 तारीख की सुबह आई भीषण बारिश ने उनका आशियाना उजाड़ दिया है । 22 तारीख की रात्रि तक कोई भी सरकारी प्रतिनिधि उनकी तरफ झांकने तक नहीं पहुचा है ।

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रमेश ने बताया कि जनप्रतिनिधियों में से भी प्रधान के शिवा उन्हें कोई मदद नही मिली है । उनका कहना है कि मुश्किल के चार दिन उन्होंने काट लिए हैं उनकी पुश्तेनी जमीन काम लायक नहीं है । अगर कोई मदद मिले भी तो कितने दिन वह उस मदद से जीवन चला पाएंगे । यह कहते उनका फ़ोन बन्द हो गया शायद फ़ोन की बैटरी चली गई ।

पीढ़ित बहादुर राम का घर 

आपदा के बाद मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी ने हल्द्वानी आकर आपदा की समीक्षा की । मंडल के आला धिकारियों को पीड़तों को फौरी मदद के आदेश दिए । लेकिन चार दिन बाद भी आपदा ग्रस्त क्षेत्रों में किसी तरह की सहायता नही पहुच पाना गंभीर सवाल पैदा करते हैं आखिर मंडल मुख्यालय से चार दिन में भी इन परिवारों तक मदद कब पहुँचेगी ।

हिलवार्ता न्यूज डेस्क की रिपोर्ट

 

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