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उत्तराखण्ड

उत्तराखंड में मानसून के बाद तीसरी लहर की संभावना,डॉ एन एस बिष्ट. की विस्तृत रिपोर्ट @हिलवार्ता

उत्तराखंड में मानसून के बाद तीसरी लहर की संभावना बन रही है। राज्य में कोविड कर्फ्यू आगामी 20 जुलाई तक बढ़ा दिया गया है । सरकार द्वारा नई गाइडलाइन में छूट जारी है । अब कोचिंग संस्थानों को 50 प्रतिशत क्षमता से खोलने का निर्णय हुआ है जबकि अंतिम यात्रा और शादी समारोह के लिए 50 लोगों की अनुमति दे दी गई है । बाजारों को सुबह 8 बजे से सायं 7 बजे तक खुलने की अनुमति पुर्ववत जारी रखी गई है ।

हालांकि राज्य में कोविड के केस काफी कम हुए हैं लेकिन एक्सपर्ट बाजारों में भीड़ को लेकर चिंतित हैं । पर्यटक स्थलों में अचानक भीड़ बढ़ रही है लोग कोविड नियमो की अनदेखी कर रहे हैं जिससे और खतरा बढ़ रहा है । हालांकि राज्य में जगह जगह चेकिंग की जा रही है । बिना आर टी पी सी आर प्रवेश वर्जित किया गया है । राज्य में तीसरी लहर की संभावना को देखते हुए कोरोनेशन अस्पताल के सीनियर फिजिसियन डॉ एन एस बिष्ट ने कोविड संक्रमण का विश्लेषण किया है और विस्तृत रिपोर्ट साझा की है ।

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आइये जानते है उत्तराखंड में कोविड की तीसरी लहर की संभावना पर क्या और कैसा रहने वाला है ।

डॉ बिष्ट ने कहा है कि उत्तराखंड में भी तीसरी लहर की संभावनाएं बनी हुई हैं लिहाजा बहुत सतर्कता की जरूरत है डॉ बिष्ट मानते हैं कि देश मे हालिया ओवरऑल कोविड के मामलों में कमी आई है जिसकी वजह टीकाकरण और कोविड नियमो का ठीक से पालन है । जबकि तीसरी लहर अनलॉक के बाद भीड़ भाड़ और कोविड गाइडलाइन की अनदेखी के कारण ही आएगी ।

डॉ बिष्ट मानते हैं कि वायु में आर्द्रता बढने के साथ वायरस का बाहरी आवरण कमजोर पड़ जाता है जिस कारण भी मामलों में कमी देखी जा रही है । इसका मतलब यह नही कि खतरा चला गया । नमी में ऐरोसाॅल या वायुकण ठीक से तैर नही पाते हैं , बारिस के मौसम में हवा की आर्द्रता (नमी), जनसंख्या घनत्व (भीड़भाड़) और कोरोना के नये उत्परिवर्तन (म्यूटेशन) पर टिकी है। बारिस में एरोसोल घरों या अन्य सरफेस पर टिक जाती हैं कभी कभी यह वलगम की बूॅदों के रूप में भी टिक सकता है जैसे ही मौसम परिवर्तित होगा एरोसोल हवा के माध्यम से संक्रमण का कारण बनते हैं ।

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बिष्ट ने बताया कि भारत मे अभी तक कुल 5.5 प्रतिशत आबादी को ही टीके की दोनों खुराक लग पाई हैं पहली खुराक कुल 23 प्रतिशत लोगों की लग पाई है । दोनों को मिलाकर कुल 28.5 प्रतिशत । 70 प्रतिशत बिना टीके के आबादी को आने वाली लहर से निजात दिलाना बड़ी टेडी खीर होगी । अनलॉक होते शहरों में भीड़ बारिश के सीजन में ढीली पड़ी लहर सूखे मौसम और ठंड के मौसम आने तक दुबारा कई लोगों को संक्रमित करने की क्षमता एकत्र कर चुकी होगी । ऐसे में तीसरी लहर की पूरी संभावना बनी हुई है ।

डॉ बिष्ट जोर देकर कहते हैं कि अभी से उत्तराखंड में तीसरी लहर की संभावना देखते हुए और उसके रोकथाम के उपाय किये जाने की जरूरत है । वह कहते हैं कि जरूरी तौर पर अस्पताल, माॅल, सामाजिक समारोह के स्थल, घनी बस्तियों में युद्ध स्तर पर टीकाकरण किया जाना चाहिए । साथ ही लक्षित समूहों की टेस्टिंग के साथ-साथ 18-45 वर्ष में विशेष लोगों के टीकाकरण को वरीयता दी जानी चाहिए विशेषकर ठेले फड़ वाले, दुकानदार,दूधवाले,ऑटो,टैक्सी चालक, होटल रेस्तरा के कर्मचारी, बैंक कर्मी डिलीवरी करने वालो लोगों को प्राथमिकता के आधार पर टीकाकरण करवाया जाना शामिल है।

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सरकार के सामने कई चुनोतियाँ हैं पहला ज्यादा से ज्यादा टीका करण दूसरा अधिक से अधिक टेस्टिंग तीसरा कोविड गाइडलाइन का पालन करवाना । हाल फिलहाल इन तीनो को लागू करवाना आसान नही है जबकि कोविड गाइडलाइन में लगातार छूट दी जा रही है । रोजी रोटी के संकट के चलते बाजारों को बंद रखना सम्भव भी नहीं । डॉ बिष्ट कहते हैं कि ऐसे में आमजन को संभावित तीसरी लहर की आहट को स्वयं समझना होगा और बचाव के सम्बंधित उपाय स्वयं करने होंगे ।

हिलवार्ता मेडिकल डेस्क

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