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कार्मिक विभाग का कहना है कि देश मे आईएएस अधिकारियों की भारी कमी है इसी वजह केंद्र सरकार ने अफसरों की कमी से निपटने के लिए आईएएस केडर में ठेका (contract) में बहाली की प्रकिर्या शुरू की है जिसके तहत तीन साल के लिए जॉइंट सेक्रेटरी का पद दिया जा रहा है.
इसका कारण स्पष्ट करते हुए कार्मिक विभाग ने कहा है कि 2014 से आईएएस आईपीएस और आईएफएस में प्रतिवर्ष जितनी पोस्ट निकाली जा रही हैं उतनी संख्या में अधिकारी नहीं मिल पा रहे हैं,जिस वजह यह समस्या खड़ी हो गई है.
विभाग द्वारा एक आंकड़ा प्रस्तुत किया गया है जिसमे बताया गया है कि वर्ष 2014 में 1236,-2015 में 1078,-2016में 1099,2017 में 990,-2018 में 812,उम्मीदवार शार्ट लिस्ट किये गए थे, साल 2018 में कुल चयनित अधिकारियों की संख्या घटकर 759 रह गई है, यानी साल दर साल अफसरों की भर्ती में भारी कमी आई है.

इसका मतलब साफ है यूपीएससी जितनी वेकेंसी हर साल जारी कर रही है, उम्मीदवार उसके सापेक्ष कम चयनिय हो पा रहे हैं विभाग मानता है कि इसमें से कुछ रिजर्व कैटेगरी के उम्मीदवार जनरल कैटेगरी में क्वालीफाई कर रहे हैं वह अच्छा पद मिलने पर वापस रिजर्व कैटेगरी में चले जाते हैं इसलिए भी कुछ पद भरे नहीं जा रहे है लेकिन यह बात गौर करने लायक है जबकि रिजर्व पद सीमित हैं.
यहां गौर करने लायक बात यह भी है कि पिछले पांच साल में इन कैडर के पदों की संख्या बढ़ने के बजाय कम हो गई है कार्मिक विभाग के अनुसार देश को हर वर्ष कमसे कम 180 आईएएस,150 आईपीएस,45 आईएफएस की जरूरत होती है.
अफसरों की कमी अगर है तो किसी भी मंत्रालय में काम का समय पर निपट जाएगा यह कहना अतिश्योक्ति ही होगी । सवाल यह उठता है कि क्या सरकार इन पांच साल आखिर इन पदों की पूर्ति क्यो नही कर सकी,या ऐसे कहें इन पदों पर नियुक्तियां की आखिर क्यों जरूरत नहीं पड़ी,कारण जो भी है सरकार को योजनाओं के क्रियान्वयन के लिए ठेके पर अधिकारियों की नियुक्ति करना उसकी मजबूरी है क्योंकि उसे वांछित संख्या में अफसर नहीं मिल पाये अब काम तो चलाना है ही।
हिलवार्ता न्यूज डेस्क
@hillvarta. com

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