स्वास्थ्य
सीएचसी सितारगंज में विशेषज्ञ डाक्टर्स ने किया स्वास्थ्य परीक्षण दूषित भोजन और पानी को बताया संक्रमण का कारण, मुफ्त दवा वितरण कर उचित जीवन शैली की दी सलाह News @हिलवार्ता
- बरसात में दूषित पानी और खानपान से बढ़ सकता है पेट संबंधी संक्रमण का खतरा, विशेषज्ञों ने साफ-सफाई व खानपान को लेकर किया जागरूक
सितारगंज। बरसात के मौसम में दूषित पानी, खुले में रखे खाद्य पदार्थों और साफ-सफाई की कमी के कारण पेट एवं आंतों से संबंधित बीमारियों का खतरा बढ़ जाता है। ऐसे में स्वच्छ पानी का सेवन, ताजा एवं अच्छी तरह पका हुआ भोजन और व्यक्तिगत स्वच्छता का विशेष ध्यान रखना बेहद जरूरी है। इसी उद्देश्य से सितारगंज स्थित उच्च प्राथमिक चिकित्सालय में बुधवार को एक मेडिकल कैंप आयोजित किया गया। - शिविर में हल्द्वानी से पहुंचीं उदर एवं लीवर रोग विशेषज्ञ डॉ. मेघा शर्मा रखोलिया तथा नेफ्रोलॉजिस्ट डॉ. वंदना ने मरीजों का स्वास्थ्य परीक्षण किया और उनकी स्वास्थ्य संबंधी समस्याओं के बारे में जानकारी लेकर आवश्यक चिकित्सकीय परामर्श दिया। जांच के उपरांत जरूरतमंद मरीजों को नि:शुल्क दवाओं का वितरण भी किया गया।उदर एवं लीवर रोग विशेषज्ञ डॉ. मेघा शर्मा रखोलिया ने बताया कि बदलती जीवनशैली में खानपान और साफ-सफाई का स्वास्थ्य पर सीधा प्रभाव पड़ता है। विशेषकर बरसात के मौसम में दूषित पानी एवं संक्रमित भोजन के कारण दस्त, उल्टी, पेट दर्द, गैस्ट्रोएंटेराइटिस, टाइफाइड, हेपेटाइटिस-ए और अन्य आंतों से संबंधित संक्रमण की समस्या सामने आ सकती है। कई बार सामान्य दिखाई देने वाली पेट की समस्या भी शरीर में पानी और इलेक्ट्रोलाइट की कमी का कारण बन सकती है।
- उन्होंने बताया कि बरसात में पेट संबंधी बीमारियों से बचने के लिए उबला या सुरक्षित पेयजल पीना, भोजन को ढककर रखना, खाने से पहले और शौचालय के बाद साबुन से हाथ धोना, कटे हुए फल एवं खुले में बिकने वाले खाद्य पदार्थों से बचना तथा बासी भोजन का सेवन न करना जरूरी है। सब्जियों और फलों को साफ पानी से अच्छी तरह धोकर ही इस्तेमाल करना चाहिए।
- विशेषज्ञों के अनुसार यदि किसी व्यक्ति को लगातार उल्टी-दस्त हो रहे हों, तेज पेट दर्द हो, तेज बुखार बना रहे, मल में खून आए, अत्यधिक कमजोरी या चक्कर महसूस हों अथवा पेशाब की मात्रा कम हो जाए तो इसे सामान्य पेट की खराबी समझकर घर पर ही इलाज करने के बजाय चिकित्सकीय जांच करानी चाहिए। बच्चों, बुजुर्गों और पहले से किसी बीमारी से पीड़ित लोगों में पानी की कमी तेजी से गंभीर रूप ले सकती है।

डॉ. मेघा ने यह भी बताया कि पीलिया, लगातार भूख न लगना, पेशाब का रंग बहुत गहरा होना, आंखों या त्वचा में पीलापन तथा लगातार उल्टी जैसे लक्षणों को नजरअंदाज नहीं करना चाहिए। ऐसे मामलों में चिकित्सक की सलाह के अनुसार लिवर संबंधी जांच कराना आवश्यक हो सकता है। बिना चिकित्सकीय सलाह के एंटीबायोटिक अथवा दर्द की दवाओं का अनावश्यक सेवन भी नहीं करना चाहिए।
वहीं नेफ्रोलॉजिस्ट डॉ. वंदना ने शिविर में पहुंचे किडनी संबंधी मरीजों का परीक्षण किया। उन्होंने मरीजों को किडनी के स्वास्थ्य के प्रति जागरूक करते हुए पर्याप्त और सुरक्षित पानी के सेवन, रक्तचाप एवं ब्लड शुगर को नियंत्रित रखने तथा चिकित्सकीय सलाह के बिना दवाओं का सेवन न करने की सलाह दी। उन्होंने बताया कि उल्टी-दस्त के दौरान शरीर में पानी की अत्यधिक कमी होने पर किडनी पर भी प्रतिकूल प्रभाव पड़ सकता है, इसलिए ऐसे मरीजों में समय पर चिकित्सकीय सलाह महत्वपूर्ण है।
शिविर में बड़ी संख्या में मरीजों ने पहुंचकर विशेषज्ञ चिकित्सकों से परामर्श लिया। मरीजों की जांच के बाद आवश्यकतानुसार नि:शुल्क दवाएं भी उपलब्ध कराई गईं। मेडिहिल फार्मा एवं लाइफसीडार हेल्थकेयर के सहयोग से मरीजों को नि:शुल्क दवा वितरण किया गया।- आयोजकों ने बताया कि इस तरह के स्वास्थ्य शिविरों का उद्देश्य लोगों को उनके घर के नजदीक विशेषज्ञ चिकित्सकीय परामर्श उपलब्ध कराने के साथ-साथ मौसमी बीमारियों के प्रति जागरूक करना भी है। बरसात के मौसम में थोड़ी सी सावधानी और स्वच्छता की आदतें अपनाकर पेट तथा संक्रमण से जुड़ी कई बीमारियों के जोखिम को कम किया जा सकता है।
हिलवार्ता न्यूज के लिए
ओपी पाण्डेय की रिपोर्ट
