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बदलते मौसम में एच 1 एन 1 इंफ्यूएंजा से बचाव और चिकित्सकीय सलाह महत्वपूर्ण,डॉ परितोष जोशी (pulmonologist)
काशीपुर। मौसम में बदलाव के साथ इन्फ्लूएंजा जैसी श्वसन संबंधी बीमारियों के मामले बढ़ रहे हैं। हालांकि राजकीय आयुर्वेदिक संस्थान दिल्ली ने इसे बहुत कम इंटेंसिटी का बताया है लेकिन विशेष सतर्कत्वमे किसी तरह की कोताही नहीं बरतने को भी कहा गया है । हिलवार्ता ने बढ़ते हुए मामलों को लेकर डॉ परितोष जोशी से बात की है उन्होंने बताया कि H1N1 इन्फ्लूएंजा वायरस, जिसे आमतौर पर स्वाइन फ्लू के नाम से भी जाना जाता है, एक महत्वपूर्ण संक्रमण है। यह वायरस मुख्य रूप से संक्रमित व्यक्ति के खांसने, छींकने या बात करने के दौरान निकलने वाली संक्रमित बूंदों और सांस की सूक्ष्म कणिकाओं के संपर्क से फैल सकता है।

डॉ परितोष जोशी जोशी अस्पताल, काशीपुर के वरिष्ठ पल्मोनोलॉजिस्ट हैं, उनके अनुसार, H1N1 संक्रमण के अधिकांश मामलों में शुरुआत सामान्य वायरल बुखार जैसी होती है, इसलिए शुरुआती लक्षणों को नजरअंदाज नहीं करना चाहिए। तेज बुखार, खांसी, गले में खराश, सिरदर्द, शरीर में दर्द, अत्यधिक थकान और कभी-कभी नाक बहना इसके प्रमुख लक्षण हो सकते हैं। कुछ मरीजों में उल्टी या दस्त जैसे लक्षण भी दिखाई दे सकते हैं।
डॉ. जोशी बताते हैं कि हर बुखार H1N1 नहीं होता, लेकिन यदि बुखार के साथ लगातार खांसी, सांस लेने में परेशानी, सीने में दर्द, ऑक्सीजन स्तर में गिरावट या अत्यधिक कमजोरी हो तो चिकित्सकीय सलाह लेने में देरी नहीं करनी चाहिए। विशेष रूप से बुजुर्गों, छोटे बच्चों, गर्भवती महिलाओं तथा मधुमेह, हृदय रोग, फेफड़ों की बीमारी या कमजोर प्रतिरक्षा वाले लोगों में संक्रमण गंभीर रूप ले सकता है।
H1N1 का निदान आवश्यकता के अनुसार चिकित्सकीय परीक्षण, लक्षणों और मरीज की स्थिति के आधार पर किया जाता है। कुछ मामलों में आरटी-पीसीआर जैसे परीक्षण से वायरस की पुष्टि की जा सकती है। उपचार में चिकित्सक की सलाह के अनुसार एंटीवायरल दवाओं का उपयोग किया जा सकता है। इन दवाओं का लाभ बीमारी के शुरुआती चरण में अधिक हो सकता है, इसलिए जोखिम वाले मरीजों में चिकित्सकीय परामर्श को टालना उचित नहीं है। बिना सलाह के एंटीबायोटिक लेना भी सही नहीं है, क्योंकि एंटीबायोटिक वायरस पर प्रभावी नहीं होते।
विशेषज्ञों के अनुसार बचाव के लिए संक्रमित व्यक्ति से उचित दूरी रखना, खांसते और छींकते समय मुंह-नाक ढकना, हाथों की नियमित सफाई करना और बीमारी की स्थिति में भीड़भाड़ वाली जगहों पर जाने से बचना महत्वपूर्ण है। चिकित्सकीय सलाह के अनुसार मौसमी इन्फ्लूएंजा का टीकाकरण भी विशेष रूप से उच्च जोखिम वाले लोगों के लिए उपयोगी हो सकता है।
डॉ. पारितोष जोशी का कहना है कि H1N1 से घबराने के बजाय सजग रहना, संक्रमण को फैलने से रोकना और गंभीर लक्षणों पर समय रहते चिकित्सकीय सहायता लेना सबसे महत्वपूर्ण है। सामान्य सावधानियों और समय पर उपचार से अधिकांश मरीज स्वस्थ हो जाते हैं। इसलिए लगातार तेज बुखार, सांस फूलना, ऑक्सीजन कम होना या तेजी से बिगड़ती तबीयत को सामान्य वायरल बुखार समझकर घर पर लंबे समय तक इलाज करना जोखिम भरा हो सकता है।
विशेषज्ञ की सलाह: स्वच्छता, संक्रमण से बचाव, जोखिम वाले मरीजों में विशेष सतर्कता और समय पर चिकित्सकीय परामर्श—H1N1 से बचाव और इसके प्रभाव को कम करने के सबसे प्रभावी उपायों में शामिल हैं।
हिलवार्ता न्यूज डेस्क की रिपोर्ट
