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बेरीनाग स्थित खोजशाला ने तीन दिवसीय 26 मई से 29 मई 2019 डॉ. डी.डी. पन्त जन्म शताब्दी समारोह मनाया जिसमें उनके कार्यों को याद किया गया,इस समारोह में देश के नामी गिरामी हस्तियों ने शिरकत की.डॉ डी डी पंत ,देश के महान वैज्ञानिक, शिक्षाविद और गांधीवादी विचारक रहे हैं उन्हें कुमाऊं विश्वविद्यालय के प्रथम कुलपति होने का गौरव प्राप्त है प्रोफेसर पंत का जन्म 1918 में हुआ इस साल उनके जन्म को 100 साल पूरे होने पर उनकी जन्म शताब्दी मनाकर उनके जीवनपर्यंत विज्ञान और समाज सेवा को याद किया गया उनके कार्यों को नई पीढ़ी के समक्ष रखने हेतु इस कार्यक्रम का आयोजन किया गया डॉ पंत देश के महान वैज्ञानिक प्रो.सी वी रमन के सहयोगी रहे.
शताब्दी समारोह के अवसर पर बच्चों ने विज्ञान प्रदर्शनी में हाथ के बने विज्ञान मॉडलों को प्रदर्शित किया. बेरीनाग ने क्षेत्र में जन्मे महान वैज्ञानिक, शिक्षाविद एवं विचारक स्व. डॉ. देवी दत्त पन्त के तीन दिवसीय जन्म शताब्दी समारोह का आयोजन किया गया पहले दिन डॉ. पन्त के पैत्रिक गांव देवराड़ी पन्त के विद्यालय राजकीय इंटर कॉलेज गांधीनगर में शताब्दी समारोह कार्यक्रम संपन्न हुए.दूसरे दिन खोजशाला बेरीनाग और तीसरे दिन के आखिरी कार्यक्रम में राजकीय बालिका इंटर कॉलेज और लिटिल एंजेल्स सेकेंडरी स्कूल में व्याख्यान आयोजित किए गए ,इस दिन आयोजित गोष्ठी में अनेक गणमान्य व्यक्तियों ने डॉ. पन्त के जीवन एवं कार्यों को याद करते हुए उनके बताए मार्ग पर चलने का आह्वान किया. समारोह में जाने-माने हिमालयविद व ‘पहाड़’ पत्रिका के संपादक पद्मश्री शेखर पाठक, हिंदी के वरिष्ठ कथाकार डॉ. लक्ष्मण सिंह बिष्ट ‘बटरोही’, नैनीताल समाचार अखबार के संपादक श्री राजीव लोचन शाह, नेहरू मेमोरियल म्यूजियम एंड लाइब्रेरी नई दिल्ली के प्रो. प्रकाश उपाध्याय, जामिया विश्वविद्यालय नई दिल्ली के प्रो. आर.पी. बहुगुणा, समाजसेवी श्री चन्दन डांगी, डायट बागेश्वर के प्राचार्य डॉ. शैलेन्द्र धपोला, खंड शिक्षा अधिकारी गंगोलीहाट श्री किशोर पन्त, बेरीनाग महाविद्यालय में भौतिक विज्ञान के विभागाध्यक्ष प्रो. एल.पी. वर्मा, दिल्ली से पहुंचे सामाजिक कार्यकर्ता और उद्योगपति श्री त्रिभुवन सिंह बिष्ट विज्ञान प्रचारक आशुतोष उपाध्याय सहित अनेक गणमान्य व्यक्तियों ने डॉ. डी.डी. पन्त के बारे में अपने संस्मरण साझा करते हुए विज्ञान चेतना को आगे बढ़ाने की आवश्यकता पर बल दिया. वक्ताओं ने बाल विज्ञान खोजशाला द्वारा विज्ञान शिक्षा के क्षेत्र में किए जा रहे प्रयासों की प्रशंसा की. गोष्ठी में बड़ी संख्या में बच्चों, शिक्षकों व अभिभावकों ने भी हिस्सेदारी की.

गोष्ठी का संचालन बाल विज्ञान खोजशाला के संरक्षक डॉ.चन्द्र शेखर पाठक ने किया. गोष्ठी की अध्यक्षता करते हुए पद्मश्री प्रो. शेखर पाठक ने डॉ. पन्त के जीवन व कार्यों पर प्रकाश डाला और विज्ञान एवं शिक्षा में उनके गहन योगदान की चर्चा की. उन्होंने बताया कि किस प्रकार आज से 100 वर्ष द्योराड़ी पन्त गांव के एक साधनहीन परिवार में जन्मा बालक अपनी प्रतिभा व लगन के बूते अंतरराष्ट्रीय स्तर के वैज्ञानिक, शिक्षाविद और कुमाऊं विश्वविद्यालय के कुलपति पद तक पहुंचता है. उन्होंने डॉ. पन्त के विकास और पर्यावरण सम्बन्धी विचारों को आज के लिए अत्यंत प्रासंगिक बताया.
गोष्ठी में शामिल होने वाले अन्य प्रमुख लोगों में अवनी संस्था के संस्थापक श्री रजनीश जैन, राजकीय महाविद्यालय के शिक्षक डॉ. लीलाघर मिश्रा, डॉ. संदीप पाण्डेय, शहीद सैनिक स्कूल नैनीताल के प्रधानाचार्य बिशन सिंह मेहता, ब्लॉक विज्ञान समन्वयक प्रदीप जोशी, संकुल प्रभारी हेम चन्द्र पाठक (सिमगड़ी, बागेश्वर), प्रधानाध्यापक दीवान सिंह कठायत, ठाकुर सिंह डसीला, शिक्षक कमलेश पाण्डेय, गोविन्द सिंह भंडारी, दुर्गा कार्की, पार्वती बिष्ट, नवीन कुमार, गंगा आर्या, तारा दसौनी, गंगोलीहाट से शिक्षक संजय भट्ट, विनीता भट्ट, खोजशाला प्रभारी कमलेश जोशी, विज्ञान संचारक दीपमाला रावल, विज्ञान संचारक प्रदीप बोरा आदि शामिल थे.
ओपी पाण्डेय
@ Editors desk
hillvarta.com