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उत्तराखंड : विधानसभा चुनाव नामांकन में 15 दिन शेष, समर्थक बेचैन, उम्मीदवारों का पता नहीं, सीमित समय में चुनावी कैम्पेन से असल मुद्दों के गायब होने का अंदेशा,क्यों और कैसे, पढिये@हिलवार्ता

उत्तराखंड में मतदान 14 फरवरी को होगा । यानी चुनावी प्रक्रिया पूरे करने में एक माह का समय । 28 जनवरी नामांकन को अब 15 दिन ही शेष बचे हैं । राज्य में भाजपा कांग्रेस में टिकट बंटवारे को लेकर अभी असमंजस की स्थिति है । सूत्रों के अनुसार कांग्रेस भाजपा दोनों एक दूसरे की उम्मीदवारी देखकर आगे कदम बढ़ाने की कोशिश में हैं । भाजपा के नेतृत्व की मंशा देर से उम्मीदवार घोषित करने के पीछे रणनीति बगावत से निपटना माना जा रहा है । वहीं कांग्रेस में भी इसी तरह की परिस्थिति है ।

राज्य में सबसे पहले यूकेडी ने अपने उम्मीदवार घोषित किए जिसमें देवप्रयाग से दिवाकर भट्ट द्वाराहाट से पुष्पेश त्रिपाठी श्रीनगर से मोहन काला धनोल्टी से उषा पवार लैंसडाउन से एपी जुयाल अल्मोड़ा से भानु प्रकाश जोशी काशीपुर से मनोज डोबरिया यमकेश्वर से शांति प्रसाद भट्ट
केदारनाथ से गजपाल सिंह रावत रायपुर से अनिल डोभाल,ऋषिकेश से मोहन सिंह असवाल,देहरादून कैंट से अनिरुद्ध काला,चौबट्टाखाल से वीरेंद्र सिंह रावत,टिहरी से उर्मिला,किच्छा से जीवन सिंह नेगी,डोईवाला से शिव प्रसाद सेमवाल,का नाम घोषित किया है ।

यूकेडी के बाद आप ने अपने उम्मीदवारों की दूसरी लिस्ट भी जारी कर दी है जिसमें गुड्डू लाल – थराली(SC) से सुमंत तिवारी – केदारनाथ से अमेन्द्र बिष्ट – धनौल्टी से नवीन पिरशाली – रायपुर से रविन्द्र आनंद को – देहरादून कैंट से त्रिलोक सिंह नेगी – टिहरी से राजू मौर्य – डोईवाला से ममता सिंह – ज्वालापुर (SC) से मनोरमा त्यागी – खानपुर गजेंद्र चौहान – श्रीनगर से अरविंद वर्मा – कोटद्वार से नारायण सुराड़ी – धारचूला से प्रकाश चंद्र उपाध्याय – द्वाराहाट से तारा दत्त पांडेय – जागेश्वर सागर पांडेय – भीमताल से डॉ भुवन आर्य -नैनीताल (SC) से जरनैल सिंह काली – गदरपुर से जबकि कुलवन्त सिंह (किच्छा) से उम्मीदवार बनाए गए हैं ।
आप की पहली लिस्ट में गंगोत्री से कर्नल अजय कोठियाल, रामनगर से शिशुपाल सिंह रावत, कपकोट से भूपेश उपाध्याय, काशीपुर से दीपक बाली, बागेश्वर से बसंत कुमार (एस सी), भगवानपुर से प्रेम सिंह, अल्मोड़ा से अमित जोशी, राजपुर रोड से डिम्पल सिंह, जसपुर से यूनुस चौधरी जसपुर, सल्ट से सुरेश सिंह बिष्ट, रानीपुर से प्रशांत राय, घनसाली से विजय शाह, मंगलौर से नवनीत राठी, लोहाघाट से राजेश बिष्ट, चंपावत से मदन महर, हल्द्वानी से समित टिक्कू, पौड़ी से मनोहर लाल पहाड़ी, ऋषिकेश से डा. राजे नेगी, सोमेश्वर से हरीश चंद्र आर्य, चौबट्टाखाल से दिगमोहन नेगी, विकासनगर से प्रवीण बंसल, पिरान कलियर से शादाब आलम, हरिद्वार ग्रामीण से नरेश शर्मा व सितारगंज से अजय जायसवाल को उम्मीदवार बनाया गया है। उपपा और वाम मोर्चा भी कुछ सीटों पर अपने उम्मीदवार घोषित कर चुके हैं ।

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साफ है कि भाजपा कांग्रेस में टिकट को लेकर घमासान होने के अंदेशे के चलते अभी तक अनिर्णय की स्थिति है । सूत्र बताते हैं कि कांग्रेस कुछ सीटों पर एक सप्ताह बाद जबकि बांकी अन्य पर भाजपा द्वारा घोषणा के बाद उम्मीदवार घोषित करेगी । जबकि यही फार्मूला भाजपा भी अपना सकती है बताया जा रहा है कि भाजपा पहली लिस्ट 18 जनवरी और जबकि फाइनल लिस्ट 25 जनवरी तक जारी कर्वसकती है जिससे कि मिनिमम डेमेज कंट्रोल करना पड़े ।

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राज्य में 15 जनवरी तक फिजिकल कम्पैन की मनाही है । यह भी तय नही कि आगे क्या होगा ?  क्योंकि कोविड की स्थिति डरावनी है । ऐसे में उम्मीदवार पेशोपेश में हैं उन्हें किसी भी तरह नामंकन तक एक सप्ताह के आसपास और उसके बाद मतदान तिथि तक 10 दिन कुल मिलाकर दो सप्ताह का ही समय मिल पायेगा । कम समयावधि में हर मतदाता तक पहुँचना आसान नही होगा । शोशल मीडिया में भी उस तरह की केम्पेन की आदत उत्तराखंड के नेताओं में नही है जिस तरह दिल्ली जैसे महानगरों में आप कर चुकी है । उत्तराखंड ने नेता शोशल मीडिया से बचते आए हैं अब कुछ लोग अगर सक्रिय भी हो रहे हैं तो उन्हें मनचाहा रिसपॉन्स नही मिल पा रहा है । पर्वतीय और मैदानी क्षेत्र के गरीब तबके के पास इस तरह की सुविधा का अभाव है । एक बात यह भी कि पर्वतीय कई क्षेत्रों में नेट की सुविधाएं हैं ही नही ।

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सब कुछ देर से होने में राजनीतिक दलों का फायदा है लेकिन जनता का नुकसान । हालांकि उम्मीदवार घोषित करना राजनीतिक दलों का अपना अधिकार है । जिसके लिए किसी तरह के नियम नहीं हैं । ऐसे में सत्तारूढ़ दल के लिए उम्मीदवार देर से घोषित करना और कमसेकम कम कम्पैन करना फायदे का सौदा हो सकता है । दरअसल सभी जानते हैं कि सरकार अपने पांच साल के कार्यकाल का लेखा जोखा लेकर जनता के दरबार मे जाती है अगर समय कम होगा ऐसी स्तिथि सत्तारूढ़  राजनीति दल तीखे सवालों और अपनी नाकामी छुपाने में कामयाब हो सकता है । जबकि विपक्ष सहित जनता सही तरीके से हिसाब किताब नही मांग सकती है ।  समयाभाव में कोई भी पक्ष  अपनी बात नही रख पाएंगे । बहरहाल उत्तराखंड आगामी दिनों में चुनाव कैम्पेन के तरीके तय होने के बाद ही तय हो पता चलेगा  कि जनता के मुद्दे हावी होंगे कि राजनीतिक दलों के एजेंडे । बहरहाल राजनैतिक दलों के समर्थकों और जनता दोनों की नजरें राजनैतिक दलों द्वारा घोषित होने वाले उम्मीदवारों के नामों को जानने पर टिकी है ।

Op pandey @हिलवार्ता न्यूज डेस्क 

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