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उत्तराखंड में यूं तो राज्य की 70 सीटों पर सभी की निगाहें बनी हुई हैं । लेकिन नैनीताल जिले की लालकुआं और उधमसिंह नगर जिले की खटीमा सीट पर सबकी नजरें टिकी हैं ।

खटीमा से मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी जबकि लालकुआं से पूर्व मुख्यमंत्री हरीश रावत चुनाव मैदान में हैं । पुष्कर सिंह धामी जहां खटीमा में तीसरी बार विधानसभा चुनाव में अपनी किस्मत आजमा रहे हैं जबकि लालकुआं में हरीश रावत पहली बार उम्मीदवार बने हैं ।

दोनों ही सीटों में एक वर्तमान तो एक पूर्व की प्रतिष्ठा दांव पर है दोनों की नजरें राज्य के मुखिया की कुर्सी पर है इसलिए यह और भी महत्वपूर्ण हो जाता है कि जनता दोनों सीटों पर नजरें गड़ाए हुए है ।

खटीमा में धामी की सीधी टक्कर पिछली बार के कांग्रेस प्रतियाशी भुवन चंद्र कापड़ी से है । 2017 चुनाव में भुवन कापड़ी ने धामी को कड़ी टक्कर दी । लेकिन इस बार एक कापड़ी का मुकाबला सीएम से है । इस बार पिछ्ले चुनाव से मामला थोड़ा हटके है । चूंकि धामी अब मुख्यमंत्री की कुर्सी तक पहुँचे हैं लिहाजा भाजपा का पूरा कुनबा एक साथ दिखता है जबकि पिछली बार ऐसी स्थिति नहीं थी ।
कापड़ी की क्षेत्र में गहरी पैठ है वह भी परिणाम बदलने की पुरजोर कोशिश में हैं । इस सबके बावजूद चुनाव विशेषज्ञ आज की स्तिथि का आंकलन कर बताते हैं कि बहरहाल खटीमा में धामी की जीत एकतरफा नहीं है । यानी हाट सीट पर संघर्ष जारी है ।

इधर लालकुआं की बात करें तो यहां जिला पंचायत सदस्य मोहन बिष्ट और पूर्व मुख्यमंत्री हरीश रावत के बीच मुकाबला रोचक हो गया है । हरीश खेमे ने जहां भाजपा के चार दर्जन से अधिक संगठन और पार्टी कार्यकर्ताओं को तोड़ अपनी ओर कर लिया है वहीं भाजपा ने भी कई कांग्रेस कार्यकर्ता अपनी ओर जोड़े हैं । दोनों भाजपा और कांग्रेस यहां आपसी लड़ाई से जूझ रहे हैं संध्या डालाकोटी जहां कांग्रेस के वोटों पर सेंधमारी कर रही हैं वही भाजपा के किले को पवन चौहान कमजोर कर रहे हैं । एक बात यहां गौर तलब है कि पूर्व मंत्री हरीश दुर्गापाल और हरेंद्र बोरा पूरे कम्पैन में हरीश रावत के साथ हैं । दोनों ही पार्टी से खुद के लिए टिकट मांग रहे थे नाराजी के वावजूद रावत ने दोनों को अपने साथ रखा है ।

हालांकि 2017 चुनाव में 55 प्रतिशत वोटों से जीतकर विधानसभा पहुँचे नवीन दुमका इस बार टिकट से वंचित रहे । दुमका को यहां मिले मत हरेंद्र बोरा और हरीश दुर्गापाल को प्राप्त मत प्रतिशत से कहीं अधिक है । लेकिन इस बार इन दोनों के समर्थन के बाद भी चुनाव में यह कहना अभी जल्दबाजी होगी कि यहां मुकाबला एकतरफा है । यानी लालकुआं में  हरीश रावत कड़ा संघर्ष कर रहे हैं । हालांकि रावत ने टिकट प्राप्ति से आज की स्थिति में काफी सुधार किया है ।

यहां डॉ मोहन बिष्ट हालांकि निर्दलीय जिलापंचायत चुनाव में रिकार्ड मतों से विजयी हुए हैं लेकिन यहां उन्हें कड़ा संघर्ष करना पड़ रहा है । क्योंकि उनके सामने पूर्व सीएम मैदान में हैं । चुनाव विश्लेषक बताते हैं कि इस सीट पर अभी कुछ कहना जल्दबाजी होगा ।

हिलवार्ता न्यूज डेस्क 

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