Connect with us

उत्तराखण्ड

Assembly election 2022: उत्तराखंड में मतदान को एक सप्ताह शेष, क्या है मतदाताओं का रुख इस बार, पढिये एक नजर में @हिलवार्ता

उत्तराखंड में विधानसभा चुनाव के लिए वोटिंग में केवल एक सप्ताह का समय बचा है । अभी तक हुए चुनाव प्रचार पर नजर डाली जाए तो उम्मीदवारों की पूरी ऊर्जा आरोप- प्रत्यारोप, बाहरी-स्थानीय, बागी-और उनको मनाने, घरवापसी सहित एक दूसरे के खेमे में सेंध लगाने तक सीमित रही  है ।

2017 में जिन वादों के साथ भाजपा को प्रचंड बहुमत मिला उसका लेखा जोखा न भाजपा को जनता के बीच ले जाने का मौका मिल पाया है, और न ही सरकार की कमियों को उजागर करने मौका विपक्षियों को । इसका बड़ा कारण चुनाव की घोषणा के दौरान कोविड 19 के बढ़ते मामले है । चुनाव आयोग ने चुनाव की घोषणा के साथ ही चुनाव प्रचार में पाबंदी लगाई ,जिस कारण सत्ता और विपक्ष की बात जनता के बीच तक नही पहुच पाई है । राज्य की कुल 70 विधानसभा सीटों में  कुमायूँ मंडल में 29 और गढ़वाल में 41 सीट हैं । गत चुनावों में भाजपा ने जहां 57 सीटों का प्रचंड बहुमत प्राप्त किया था वहीं कांग्रेस 11सीटों तक सिमट गई थी ।

इस बार 2022 मे कांग्रेस को लगता है वह पिछले छह माह में किसी न किसी रूप में जनता के सामने  सत्तारूढ़ भाजपा के क्रियाकलाप पहुचाने में कामयाब रही है । जिनमे पांच साल में तीन मुख्यमंत्री बदलना , महगाई ,बेरोजगारी, पलायन शामिल हैं । जबकि भाजपा को लगता है कि पीएम मोदी के द्वारा राज्य में किये गए कार्यो से उसकी यथास्थिति बरकरार रहेगी और वह दुबारा सरकार बनाएगी ।

यह भी पढ़ें 👉  With high-high quality streaming, top-notch buyers, and you can interactive features, live broker casinos give an unmatched gambling experience

राज्य की 70 सीटों में  30 सीटों पर मुकाबला दिलचस्प है यानी भितरघाती यहां परिणाम बदलने की पूरी कोशिश में हैं । इधर राज्य में हो रहे चुनावों में चुनाव आयोग द्वारा पाबंदी के चलते लंबे समय तक सभाएं नही हो पाई हैं । हालिया कुछ छूट के बाद , विगत दो तीन दिन में हुई सभाओं में फिर से आरोप प्रत्यारोप तक ही अटकी लगती है ।

70 विधानसभा सीटों पर जहां राष्ट्रीय दल अपने स्टार प्रचारकों के माध्यम से जनता के बीच  आने वाले इन सात दिनों में अधिक से अधिक पहुचने की पुरजोर कोशिश कर रहे हैं । वहीं निर्दलीय सहित क्षेत्रीय दलों के पास संसाधनों की कमी साफ दिखती है । इन कमियों के चलते इनके नेताओं को एक जगह से दूसरी जगह पहुचने में दिक्कतें हैं । एन केन प्रकारेण क्षेत्रीय दल विगत 21 साल में राष्ट्रीय दलों को राज्य की बर्बादी का जिम्मेदार मानकर घेरने में जुटे हुए हैं ।

यह भी पढ़ें 👉  1?? Exactly what are the finest black-jack sites required from the advantages?

कोविड 19 के बढ़ते मामलों को देख चुनाव आयोग ने खुले प्रचार पर शुरुवात से ही पाबंदियां लागू कर दी इस वजह  न सत्तापक्ष न विपक्ष जनता तक अपने मुद्दे ले जा पाया है । वैसे  इस बार राजनीतिक पंडितों के अनुसार राज्य में किसी भी दल की लहर जैसी बात नही है । सत्तारूढ भाजपा के लिए जहां महगाई, बेरोजगारी, पलायन,फार्मासिस्टों की नियुक्ति,पीडब्ल्यूडी संविदा कनिष्ठ अभियंताओं,पीआरडी जवानों के मानदेय, उद्यान सहायकों की नियुक्ति का मामला,पुलिस ग्रेड पे, शिक्षा प्रेरकों का मामला, उपनलकर्मियों का मामला यूकेएसएससी, ओपन यूनिवर्सिटी सहित अन्य संस्थानों में भर्ती में हुई अनियमितता सहित  स्थानांतरण के मुद्दे गले की फांस बने हैं ।

वही कांग्रेस इन मुद्दों को हाथोंहाथ लपक ज्यादा से ज्यादा समर्थन खुद के पक्ष में जुटाने को आतुर ही नही कई मुद्दों पर जैसे उपनलकर्मियों के नियमितीकरण और मानदेय, पुलिस ग्रेड पे लागू करने सहित अनियमितताओं की जांच की हामी तक भर चुकी है ।

चुनाव आयोग ने इस हप्ते हालांकि प्रचार के लिए कुछ पाबंदियां हटाई लेकिन मौसम की मार चुनाव प्रचार पर भारी पड़ गई । राज्य भयंकर शीतलहर की चपेट में है । पर्वतीय जिलों में बर्फबारी ने चुनाव प्रचार की रफ्तार को कम कर दिया है ।

यह भी पढ़ें 👉  Les autres supports egalement Paysafecard englobent assez accreditees , ! adoptees dans maints casinos quelque peu

अभी तक हुए चुनाव प्रचार में साफ दिखता है कि राजनीतिक दल मुद्दों को लेकर कोई बड़ा प्रभाव नही छोड़ पाए हैं । ऐसे में मतदाताओं का रुख भी स्पष्ट नहीं है कि आखिर 7 दिन बाद होने वाले मतदान पर उनका नजरिया कैसा है । चुनाव विश्लेषक इस बार उत्तराखंड के बारे स्पष्ट कुछ कहने की स्थिति में नहीं लगते ।  लेकिन कुछ उत्तराखंड में चलते आ रहे ट्रेंड के हिसाब से मानते हैं कि न तो सत्तारूढ़ दल पिछली बार की तरह वापसी कर रहा है और न ही मुख्य विपक्षी कांग्रेस ।

तो क्या राज्य में उन 30 सीटों पर जहां भाजपा कांग्रेस के बागी निर्दलीय मैदान में हैं कुछ सीटें अपने खाते में ला रहे है ? या इनकी वजह किन्ही अन्य राजनीतिक दलों को कुछ सीटों पर फायदा हो रहा है ?

इसे समझने के लिए इंतजार कीजिये हिलवार्ता की अगली रिपोर्ट का ।

हिलवार्ता

पोलिटिकल

न्यूज डेस्क की रिपोर्ट 

More in उत्तराखण्ड

Trending News

Follow Facebook Page

Tags

2

2