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आज सुप्रीम कोर्ट ने एडीआर की पीआईएल पर सुनवाई करते हुए सभी राजनीतिक दलों को उनको मिल रहे चंदे के डिटेल चुनाव आयोग के पास 30 मई तक जमा करने का आदेश दिया है ।
चुनावों में मिल रहे अकूत धन की असलियत पता लगने से डरे राजनीतिक दल इस पर खुले तौर पर सहमत नहीं रहे हैं कि उनसे यह पूछा जाए कि चंदा दे रहे दानदाता कौन हैं और उनके दिए गए चंदे का सोर्स क्या है.
नोटबन्दी से काला धन समाप्त हो जाने का दावा कर रही भाजपा सहित कांग्रेस आप सपा बसपा बामपंथी पार्टियां भी किसी न किसी तरह इस पर बचने की बात करते आई हैं । 
चुनावी बांड के जरिये 2000 करोड़ रुपया राजनीतिक दलों के पास आया है जिसका 95 फीसदी भाजपा के पास है जो वर्ष 2017 के बाद चुनावी बॉन्ड स्कीम लांच करने के बाद जमा हुआ है ,सरकार ने इसे काला धन रोकने की स्कीम के तौर पर लांच किया था लेकिन सुप्रीम कोर्ट ने एडीआर की दलील के बाद माना कि बांड में काला धन के रूप में धन जमा हुआ हो सकता है इस बात की जानकारी जनहित में चुनाव आयोग को दी जानी जरूरी है ।
सरकार की ओर से अटार्नी जनरल ने कहा कि जनता नहीं चाहती कि उसके द्वारा दिया गया दान सार्वजनिक हो लेकिन कोर्ट ने सरकार की दलील को खारिज करते हुए 30 मई तक सभी राजनीतिक दलों से चुनाव में प्राप्त धन का पूर्ण विवरण आयोग के पास जमा करने का आदेश दिया है ।
राजनीति का दलदल कितना गहरा है इस बात से समझा जा सकता है कि पहले चरण के मतदान तक ही 1580 करोड़ का काला धन पकड़ा जा चुका है जिसमे नकदी के अलावा सोना चांदी सहित अन्य चुनावी प्रलोभन की वस्तुएं जब्त हुई है.
भृष्टाचार मुक्त भारत की दिशा में सुप्रीम कोर्ट ने आज बडा फैसला किया है आदेश के बाद सभी दलों की कलई खुलने के आसार बढ़ गए हैं यह देखना होगा कि ईमानदारी में अपनी पीठ खुद थपथपाने वाले राजनीतिक दल इस आदेश के बाद किस तरह चुनावी चंदे की फाइल आयोग तक पहुचाते हैं ,सुप्रीम कोर्ट के इस निर्णय का सभी जागरूक नागरिकों ने स्वागत किया है ।
·O p pandey
@ editors desk

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