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 उत्तराखंड और घोटाले इस कदर चोली दामन का साथ लिए हैं कि हर विभाग में कुछ ना कुछ खेल मिल जाता है घोटालेबाजों को देहरादून शरणस्थली के रूप में इस कदर मुफीद है कि आप इन केन तिकड़म से निदेशालय अटैच हो जाइए फिर आपका बिगड़ना आसान नहीं इसका एक और उदाहरण समाज कल्याण के अधिकारी हैं जिन्हें जांच के लिए पेश करवाना कितना कठिन है रिपोर्ट में पढ़िए
लाख कोशिश बाद भी एसआईटी के कहने पर कथित 500 करोड़ के घोटाले में प्रथम दृष्टिया दोषी हरिद्वार जिले के पूर्व समाज कल्याण अधिकारी,वर्तमान उपपरियोजना निदेशक जनजाति कल्याण, देहरादून को एसआईटी के सामने पेश होने के लिए हाईकोर्ट नैनीताल आदेश तक करवाना पड़ा,हाईकोर्ट के शख्त रुख बाद अनुराग शंखधर को आज 16 मई को एसआईटी के सम्मुख पेश होना पड़ा, छह घण्टे चली पूछताछ बाद  उप निदेशक को गिरफ्तार कर लिया गया है,कल 17/5/19 को न्यायालय में पेश किया जाएगा.
हरिद्वार रुड़की के घोटालेबाज स्कूल मालिक इस मामले में पहले ही गिरफ्तार हो चुके हैं वर्ष 2012-2014 के बीच हुए इन घोटालों में धनराशि का आबंटन तत्कालीन समाज अधिकारी हरिद्वार अनुराग शंखधर की ही कृपा से हुआ इस बात की तस्दीक आज एसआईटी ने की. घोटाले से सम्बंधित किसी प्रश्न का समुचित उत्तर  उपनिदेशक महोदय नहीं दे सके, पूछताछ में स्पष्ट होने के बाद एसआईटी टीम में शामिल अपर पुलिस अधीक्षक श्री आयुष अग्रवाल विवेचक एसआईटी और एसआईटी सदस्यों निरीक्षक कमल कुमार लुंठी उप निरीक्षक राजेन्द्र खोलिया,मदन मोहन भट्ट,भानु पवार,और पवन कुमार शामिल रहे.
शंखधर को मु.द.मा.संख्या 496/18 धारा 420,408,120 बी,भा वि 13(1)डी 13(2)भृष्टाचार निवारण अधि.1988 के तहत गिरफ्तार कर लिया गया है शंखधर पर आरोप है कि जिले के घोटाले में संलिप्त संस्थानों का बिना भौतिक सत्यापन किये ही छात्रवृत्ति की धनराशि नियमविरुद्ध उनके खाते में डाल दी गई जिसकी पूर्ण जिम्मेदारी उक्त अनुराग शंखधर/ तत्कालीन जिलासमाज कल्याण अधिकारी की ही थी. एसआईटी के प्रश्नों का जबाब शंखधर की डिक्सनरी में नहीं थे लिहाजा इस बड़ी मछली का जेल जाना तय हुआ.
एसआईटी के अनुसार कई बार पेशगी की तारीख देने के वावजूद शंखधर द्वारा बड़े खेल हुए, समाज कल्याण में राजपत्रित अधिकारी होने की वजह कार्यवाही से पूर्व विभागीय अनुमति समय से नहीं मिली, दरसल समाजकल्याण विभाग में डटे इन घोटालेबाजों की खाल इतनी मोटी है कि इनका आरटीआई का जबाब न देना और धमकियां देना इस बात का प्रमाण है कि राज्य में मौजूद भृष्ट तंत्र जांच तो दूर आरटीआई का जबाब तक नहीं देता.
इस पूरे प्रकरण को 2012 से मुख्यमंत्रियों, विभागीय मंत्रियों के समक्ष ले जाये जाने के बावजूद उनका बाल बांका तक नहीं हुआ, सामाजिक कार्यकर्ता रवींद्र जुगरान और इस मामले में  मुकदमा तक झेल चुके आरटीआई एक्टिविस्ट,वकील चंद्रशेखर करगेती के प्रयासों से जब माननीय उच्च न्यायालय नैनीताल का रुख कर एक याचिका डाली गई ,ततपश्चात कोर्ट के  शख्त निर्णय बाद सरकार द्वारा एसआईटी का गठन हुआ ,जिसके बाद आईपीएस टी मंजूनाथ की अध्यक्षता में इस घोटाले की परतें खुलने लगी हैं आशा की जा रही है कि देहरादून उधमसिंह नगर में भी घोटालेबाज पकड़े जाएंगे .
हिलवार्ता न्यूज डेस्क
@hillvarta.com
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