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चन्द्रयान 2 का आज इसरो द्वारा सफल प्रक्षेपण कर लिया गया है,यान ने श्री हरिकोटा से ठीक 2:43 मिनट पर उड़ान भरी है इसरो के प्रमुख के सिवन ने कहा है कि प्रक्षेपण के बाद यान की कार्यप्रणाली ठीक से कार्य करने के संकेत मिल रहे हैं.6 सितंबर को यान के ठीकठाक लैंडिंग करते ही भारत इस तरह के मिशन देशों की सूची में शामिल हो जाएगा और वह एसा करने वाला चौथा देश बन जायेगा

इसरो के मुताबिक अंतरिक्ष यान 22 जुलाई से लेकर 13 अगस्त तक पृथ्वी के चारों तरफ चक्कर लगाएगा.इसके बाद 13 अगस्त से 19 अगस्त तक चांद की तरफ जाने वाली लंबी कक्षा में यात्रा करेगा.19 अगस्त को ही यह चांद की कक्षा में पहुंचेगा.इसके बाद 13 दिन यानी 31 अगस्त तक वह चांद के चारों तरफ चक्कर लगाएगा,1 सितंबर को विक्रम लैंडर ऑर्बिटर से अलग हो जाएगा और चांद के दक्षिणी ध्रुव की तरफ यात्रा शुरू करेगा.5 दिन की यात्रा के बाद 6 सितंबर को विक्रम लैंडर चांद के दक्षिणी ध्रुव पर लैंड करेगा.लैंडिंग के करीब 4 घंटे बाद रोवर प्रज्ञान लैंडर से निकलकर चांद की सतह पर विभिन्न प्रयोग करने के लिए उतरेगा.
आइये जानते हैं इस मिशन के फायदे
चंद्रयान-2 चंद्रमा की सतह पर पानी के प्रसार और मात्रा का अध्ययन करेगा साथ ही चंद्रमा के मौसम का अध्ययन करेगा,
और चंद्रमा की सतह में मौजूद खनिजों और रासायनिक तत्‍वों का अध्‍ययन सहित चंद्रमा के बाहरी वातावरण का अध्ययन करेगा.इसके अलावा जो इस मिशन का बड़ा मकसद है वह भी जानते हैं.
विशेषज्ञों का अनुमान है कि एक टन हीलियम-3 की कीमत करीब 5 अरब डॉलर हो सकती है,चंद्रमा से ढाई लाख टन हीलियम- 3 लाया जा सकता है जिसकी कीमत कई लाख करोड़ डॉलर हो सकती है। चीन ने भी इसी साल हीलियम-3 की खोज के लिए अपना चांग ई 4 यान भेजा था। इसी को देखते हुए अमेरिका, रूस, जापान और यूरोपीय देशों की चंद्रमा के प्रति दिलचस्पी बढ़ी है यही वजह है कि इस मिशन को जरूरी समझा जा रहा है.


हिलवार्ता न्यूज डेस्क
@hillvarta. com