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केदारखंड में पांडव नृत्य स्थानीय लोगों का प्रमुख त्योहारों में एक है अलग अलग क्षेत्रों में इसे फसलों की कटाई यानी नवम्बर से फरवरी के बीच मनाया जाता है नगर पंचायत ऊखीमठ के भटवाडी गाँव में 28 वर्षों बाद आयोजित पाण्डव नृत्य में पंच देव पाण्डवो ने अस्त्र – शस्त्र सहित किया मन्दाकिनी में गंगा स्नान कर पूजा अर्चना की तैयारी कर दी है । नंदा राजजात की तरह ही ग्रामीणों में इस आयोजन के प्रति गहरी श्रद्धा रहती है ।

पांडव नृत्य के लिए मंदाकिनी में स्नान करते हुए । फ़ोटो साभार- लक्षमण नेगी

स्थानीय पुजारी बताते हैं कि केदारखंड में पांडव नृत्य की परंपरा द्वापर युग से चली आ रही है ,जैसा कि कहा जाता है कि महाभारत युद्ध मे पांडवों ने अपने गुरु सहित बंधु बांधवों का वध किया जिस कारण वह पाप के भागीदार हो गए , पाप से निवृत होने के लिए कहा जाता है कि उन्होंने भगवान शिव की उपासना एवं क्षमादान हेतु हिमालय की तरफ रुख किया,चूंकि भगवान शिव जानते थे कि पांडवों द्वारा पाप कर्म किया गया है इसलिए जल्द मिलना उचित नही है कहा जाता है कि शिव ने खुद को छुपाने के लिए भैसे का रूप धारण कर लिया। जैसे ही भैसे के रूप में शिव छुप रहे थे भीम ने अपने तप के बल पर देख लिया आए पूछ का हिस्सा पकड़ लिया ।तब शिव का अग्र भाग से पशुपति नाथ और पृष्ठ भाग केदारनाथ बताया जाता है

शिव दर्शन के पश्चात कहा जाता है कि पांडवों ने केदारखंड में अस्त्र शस्त्र त्याग कर स्वर्गाश्रम बाकी ओर प्रस्थान किया तभी से उनकी याद में पांडव नृत्य की प्रथा प्रचलित है । केदारखंड में पांडवों को ईस्ट देवता की तरह पूजा जाता है इसी वजह उन्हें खुश करने के लिए और क्षेत्र में समृद्धि हेतु पांडव नृत्य की परंपरा को हर साल निभाया जाता है ।पांडव नृत्य के दौरान बेटियां ससुराल से मायके आकर इस आयोजन का हिस्सा बनती हैं। गांव गांव शस्त्रों का पूजन होता है गंगा स्नान के बाद डोली को अलग अलग वार्ड या गांवों में घुमाया जाता है । यहां यह आयोजन एक माह तक चलेगा ।

हिलवार्ता न्यूज डेस्क

@hillvarta. com