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हल्द्वानी ध्रुपद खयाल पर्व के दूसरे दिन की सुरुवात आज बाल/किशोर/युवा वादन प्रतियोगिताओं के साथ शुरू हुई जिसमें बाल और किशोर वर्ग के ही प्रतिभागियों ने हिस्सा लिया आज हुई प्रतियोगिता मे बाल वर्ग के लिए वाद्य यंत्र प्रतियोगिता में हर्षित कुमार प्रथम, आरोही जोशी द्वितीय, एवं अहाना सचदेव तृतीय स्थान पर रहे। और किशोर वर्ग में प्रखर जोशी प्रथम व पलक जोशी द्वितीय रही। प्रखर जोशी व हर्षित कुमार 75 % से ज्यादा अंको को प्राप्त होने के कारण अगले वर्ष 2020 में मुख्य मंच में स्थान सुनिश्चित करने वाले द्वितीय व तृतीय कलाकार बन गए हैं प्रातः काल हुई इस प्रतियोगिता का उद्घाटन जीजीआईसी प्रधानाचार्या देवकी आर्य और पंडित चंद्रशेखर तिवारी ने किया वहीं आज निर्णायक की भूमिका में श्रीमती हेमा हरबोला और पंडित श्री चंद्रशेखर तिवारी रहे ।

सायं संध्या में आसाम सुदूर उत्तर पूर्व से पधारे मेहमान कलाकारों पंडित पवन वरदलोई का तबला वादन पंडित दीपेंद्र शर्मा द्वारा शानदार वायलन वादन की प्रज्ञान बरुवा की गायन की प्रस्तुति सम्पन्न हुई ,जीजीआईसी प्रेक्षागृह में मौजूद श्रोताओं को कलाकारों ने मंत्रमुग्ध कर दिया।श्रोताओं ने भी खूब तालियों से कलाकारों को दाद दी।


प्रख्यात तबलावादक पण्डित पवन बरदलोई भातखण्डे कालेज से तबले में निपुण रहे हैं,श्री वरदलोई फरुखाबाद के मुन्ना खां साहब,लखनऊ घराने के आफाक हुसैन एवम बनारस घराने के रंगनाथ मिश्र जी के शिष्य रहे हैं, वरदलोई आकाशवाणी के ए श्रेणी के कलाकार हैैं,उनको को असम का जाकिर हुसैन कहा जाता है,वरदलोई भातखण्डे विश्वविद्यालय के अतिथि शिक्षक भी हैं। आज अपनी प्रस्तुति में उन्होंने तबला सोलो से कार्यक्रम का आगाज किया।वरदलोई संग प्रख्यात वायलिन वादक पंडित दीपेंद्र शर्मा ने संगत की।

दीपेंद्र शर्मा भी आसाम गुवाहाटी के निवासी हैं ,पंडित दीपेंद्र ने बनारस विश्वविद्यालय के नामी प्रोफेसर आरपी शास्त्री के सानिध्य में परास्नातक तक शिक्षा ली है, पंडित दीपेंद्र शर्मा 1994 से असम सरकार की छात्रवृत्ति प्राप्त कलाकार हैं आप आकाशवाणी और दूरदर्शन के नियमित कलाकार बतौर अपनी सेवाएं दे रहे हैं दीपेंद्र शर्मा का वायलिन वादन भारत सहित अंतरराष्ट्रीय मंचों की शोभा बढ़ा चुका है, पेरिस बर्लिन,लंदन जर्मनी अमेरिका में उनकी दर्जनों प्रस्तुतियां हो चुकी हैं । आज उन्होंने वायलिन में राग जोग बजाकर साबित किया कि वह ऐसे ही बड़े कलाकार नहीं हैं ।

अगले कलाकार के रूप में प्रज्ञान बरुवा मानव संसाधन मंत्रालय से छात्रवृत्ति प्राप्त अतिथि कलाकार रहे, पण्डित प्रज्ञान बरुवा ने गायन में अलग मुकाम हासिल किया है असम से तालुक रखने वाले प्रज्ञान बरुवा रास्ट्रीय और अंतरराष्ट्रीय स्तर पर खयाल गायन की प्रस्तुतियां दे चुके हैं। प्रयाग संगीत विश्वविद्यालय से स्वर्णपदक प्राप्त पण्डित प्रज्ञान बरुवा ने 1998 प्रतिष्ठित हीरक जयंती सीनियर प्रतियोगिता जीती है जिसे संगीत के क्षेत्र की सर्वोच्च रैंकिंग प्राप्त है। प्रारंभिक शिक्षा पंडित अनिमेष दत्ता,तत्पशचात संगीत ज्योति नाम से प्रख्यात बीरेंद्र कुमार फुकान से प्राप्त की है। पंडित प्रज्ञान बरुवा ने शास्त्रीय शिक्षा पंडित जसराज जी के सानिध्य में ली है उन्हें आकाशवाणी दूरदर्शन की ए ग्रेड हासिल है पंडित प्रज्ञान बरुवा ने राग मारू विहाग सुनाया, जिसके विलंबित बोल थे रसिया हो ना जा,वाहू के देश। द्रुत लय तीनताल में ,जिसके बोल जागूँ मैं सारी रैना.. बलमा। रसिया मोरे मन लागे ना। गाया जिसे खूब तालियां मिली।

सायं पंडित चंद्रशेखर तिवारी ,पूर्व उच्च शिक्षा निदेशक बीएस बिष्ट, अतिथि कलाकारों को सम्मानित करने पश्चात कार्यक्रम की शुरुवात हुई जिसमें बड़ी संख्या में संगीत प्रेमी लोग मौजूद रहे कार्यक्रम में श्री गोपाल जोशी,ओपी पांडेय बिपिन जोशी, डॉ भुवन तिवारी, डॉ द्विजेश उपाध्याय,आनंद बिष्ट, पंकज आर्य,अनुराग पांडेय,मुकेश पंत,आकाश बेलवाल,योगेश्वर पंत,लोकेश जोशी,सपना पंत, दीपमाला पांडेय,पंकज पंत, प्रखर,एडवोकेट सुनील नैनवाल,डॉ मोहन महतोलिया,डॉ जगमोहन परगााई सहित सैकड़ों संगीत प्रेमी उपस्थित रहे। कार्यक्रम का संचालन डॉ प्रदीप उपाध्याय द्वारा किया गया।

हिलवार्ता न्यूज डेस्क