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इसे कहते हैं सर मुड़ाते ओले गिरना । कोरोना के इलाज का दावा करने वाले रामदेव की कंपनी पतंजलि को जोर का झटका लगा है । अभी अभी आयुष मंत्रालय ने बाबा रामदेव की कंपनी पतंजलि आयुर्वेद से अपने दावे के साक्ष्य उपलब्ध कराने को कहा है ।

दरसल आज रामदेव और उनके सहयोगी बालकृष्ण ने मीडिया को यह बताया था कि उन्होंने कोरोना की दवा खोज ली है और इसका उन्होंने क्लीनिकल ट्रायल भी कर लिया है और दावा किया कि 59 प्रतिशत मरीज उनकी दवा के सेवन के बाद ठीक हो गए हैं । आज दिन भर बाबा की कम्पनी के उत्पाद का मीडिया में खूब प्रचार हुआ सभी चैनलों में कोरोना की दवा बनने की खबर तैरती रही लेकिन जैसा कि अक्सर होता है, कि कुछ की आश लगाए मीडिया का एक बड़ा हिस्सा रामदेव का मकसद पूरा कर गया । शाम होते होते खबर देश के बड़े हिस्से तक पहुँची ही थी कि आयुष मंत्रालय का एतराज आ गया ।

बात भारत भर की होती तो शायद दावा चल पड़ता लेकिन कोरोना से जूझ रहा विश्व प्रश्न करता कि दुनियां भर की साइंटिफिक रिसर्च पर भरोसा करें या नीम हकीमों पर । मंत्रालय ने किसी भी तरह की फजीहत से बचने के लिए तुरंत साहसिक निर्णय करते हुए पतंजलि के कथित उत्पाद के प्रचार प्रसार पर रोक की घोषणा कर दी है । और कंपनी से अपने दावे में जारी किए साक्ष्यों को उपलब्ध करने का आदेश दे दिया है ।

इसका मतलब हुआ कि कंपनी ने कोरोना की इस दवा के आविष्कार की पूरी बात मंत्रालय से छुपाई और मीडिया के बहुसंख्य हिस्से ने मीडिया ब्रीफिंग में दावों की पुष्टि किये बिना खबर प्रसारित कर दी । होना तो यह चाहिए था कि बाबा के दावों की पुष्टि आयुष मंत्रालय या आईसीएमआर से कराने के बाद ही खबर चलाई जाती खैर । कोरोना काल मे किसी तरह के भ्रामक प्रचार और झूठी खबर चलाने की मनाही है और वैधानिक कार्यवाही भी की गई है अब सवाल उठता है कि क्या पतंजलि का दावा भ्रामक है ?

हिलवार्ता न्यूज डेस्क

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