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उत्तराखंड हाईकोर्ट नैनीताल ने आज अधिवक्ता दुष्यंय मैनाली द्वारा दायर जनहित याचिका पर सुनवाई की है । अपने निर्णय में कोर्ट ने संबंधित पक्षों से जबाब दाखिल करने को कहा है । आइये देखते हैं क्या है मामला ।

दरअसल अधिवक्ता दुष्यंत द्वारा मुख्य न्यायाधीश को ईमेल से याचिका भेजकर कोरोना के इलाज में डॉक्टर्स और पैरामेडिकल स्टाफ के लिए जरूरी पीपीई किट की लगातार मांग को देखते हुए पूरे राज्य में प्राथमिकता के आधार पर इनकी आपूर्ति के आदेश जारी करने की प्रार्थना की गई थी जिस पर कोर्ट ने आज सुनवाई की ।

ज्ञात रहे कि बमुश्किल कोरोना ट्रीटमेंट के लिए अधिकृत मेडिकल कालेज और अस्पतालों में विगत पखवाड़े सरकार द्वारा इन किटस को उपलब्ध कराया गया । कुल सप्लाई हुए इन उपकरणों में खामियां पाए जाने पर सुशीला तिवारी अस्पताल हल्द्वानी से इन्हें वापस कर दिया था । बताया गया है कि कुल एक हजार की संख्या में खरीदे गए इन उपकरणों की कीमत नौ लाख रुपये थी जो प्रति किट नौ सौ रुपया बैठता है

इसी बात को संज्ञान में लेकर जागरूक अधिवक्ता दुष्यन्त मैनाली द्वारा जनहित याचिका दायर की गई और माननीय कोर्ट ने इसका संज्ञान लेते हुए सीएमओ नैनीताल एवं प्राचार्य सुशीला तिवारी मेडिकल कालेज से 21 अप्रैल तक यह बताने को कहा है कि सरकार द्वारा उपलब्ध कराए गए सुरक्षा उपकरणों में क्या कमियां थी। सुनवाई न्यायमूर्ति सुधांशु धुलिया और न्यायमूर्ति लोकपाल सिंह की खंडपीठ में हुई द्वय न्यायमूर्ति ने सुनवाई के दौरान रजिस्ट्रार हाइकोर्ट को निर्देश भी दिए है कि इससे सम्बन्धित सभी जनहित याचिकाओं को एक साथ लिस्ट करें। अधिवक्ता दुष्यंय मैनाली ने बताया कि उनके द्वारा कोर्ट को अवगत कराया गया कि सरकार द्वारा सुशीला तिवारी मेडिकल कालेज को जो एक हजार पीपीई किट उपलब्ध कराये गई थे वे घटिया गुणवत्ता वाली थे उनमें कई तरह की खामियां थी एक किट की कीमत नौ सौ रुपये थी सरकार ने हजार किट नौ लाख में खरीदी गई थी जिसे बाद में वापस कर दिया था । उन्होंने कहा कि है कि आपदा के समय मे इस तरह की खरीद को मंजूरी देने वाले अधिकारियों के खिलाफ खड़े होने की जरूरत है जो किसी भी तरह इस संकट में आम जनता के लिए खतरा उठाकर भी जनसेवा में लगे हैं ।


    दुष्यन्त ने हिलवार्ता को बताया कि लोगों में इस मामले को लेकर रोष है प्रदेशवासी कोरोना वायरस के संक्रमण को देखते हुए पूरे देश सहित राज्य में डॉक्टरों को उचित सुविधाएं मुहैया कराने के साथ ही उनको पूरी सुरक्षा दी जाने की मांग कर्
रहे हैैं ऐसे समय में जब इन उपकरणों की कमी है उसमें किसी तरह की गुणवत्ता का ध्यान रखा जाना चाहिए था जो नहीं रखा गया ।

प्रदेश के डॉक्टरों व मेडिकल स्टाफ की शुरक्षा में दी जा रही सुविधा पर सवाल खड़ा किया जिसमें उन्होंने कहा है कि सरकार ने वायरस से लड़ने के लिए डॉक्टरों व सम्बन्धित स्टाफ को सरकार ने पीपीई किट के बजाय एचआइवी किट भेज दी है जो इस महामारी से लड़ने के लिए उचित नही है। यह भी कि पर्वतीय जिलों में स्वास्थ्य कर्मियों को बिना सुरक्षा हथियार इस लड़ाई में उतार दिया जाना किसी तरह उचित नहीं है।

ऐसे हालात में उत्तराखंड के पर्वतीय जिलों के डॉक्टर पैरामेडिकल स्टाफ को कोरोना से लड़ने में किसी तरह की सुविधा के बगैर खड़ा करना भी कई सवाल पैदा करता है । आशा की जानी चाहिए कि सरकार जनहित पर जल्द फैसला कर सम्बंधित उपकरणों की कमी दूर करेगी ।

हिलवार्ता न्यूज डेस्क

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