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उत्तराखंड में भ्रष्टाचार के मामलों की बाढ़ रुकने का नाम नहीं ले रही है सरकारी स्तर पर अधिकारियों की मिलीभगत से केदारनाथ आपदा घोटाले सहित कुंभ ,छात्रवृत्ति घोटाले इस बात का प्रमाण है कि राज्य की योजनाओं में बड़े स्तर पर भृष्टाचार होता आया है जो किसी तरह सरकार रोकने में नाकाम रही है । गौरतलब है कि इन घोटालों की जानकारी होने पर भी उच्चाधिकारी या मंत्रालय किसी तरह से पर्दाफास करने आगे नहीं आया । जबकि उत्तराखंड में अधिकतर जांचें हाईकोर्ट में जनहित याचिकाओं के चलते हुई है । आज इसी तरह का एक और मामला माननीय हाईकोर्ट में दायर किया गया था जिस पर कोर्ट ने आदेश जारी किया है ।

मामला उत्तराखंड वित्त विकास निगम से सम्बंधित है । निगम द्वारा गरीबों के उत्थान के लिए स्वीकृत योजनाओं के करोड़ों रुपये को बैंक में जमा करने के खिलाफ दायर जनहित याचिका की सुनवाई करते हुए कैग से आडिट कर शपथपत्र पेश करने को कहा है। मामले की सुनवाई मुख्य न्यायधीश न्यायमूर्ति रमेश रंगनाथन व न्यायमूर्ति आलोक वर्मा की खण्डपीठ में हुई ।


मामले के अनुसार हल्द्वानी निवासी चंद्रशेखर करगेती ने हाईकोर्ट में जनहित याचिका दायर कर कहा कि उत्तराखंड वित्त विकास निगम की 2001 में स्थापना हुई । जिसका उद्देश्य गरीब,निर्धन वर्ग के लोंगों के उत्थान के लिये आसान किश्तों व अनुदान स्वरूप ऋण देना है । इस मद में निगम के पास करोड़ों रुपये हैं । किंतु निगम ने यह राशि गरीबों को लघु व कुटीर उद्योग लगाने हेतु देने के बजाय इस राशि को बैंकों में जमा कर दिया और जमा राशि से प्राप्त ब्याज का दुरुपयोग किया जा रहा है । इस मामले को कैग ने वित्तीय अनियमितता माना है ।

हिलवार्ता न्यूज डेस्क