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अलमोड़ा जिले के धौलादेवी विकासखंड अंतर्गत आने वाले नैनी जागेश्वर क्षेत्र की जनता राज्य बनने के 20 साल तक भी स्कूल अस्पताल,बैंक जैसी मूलभूत जरूरतें के लिए नेताओं से आश लगाए रही लेकिन किसी के कान में जूं तक नहीं रेंगी,आधा स्कूल जिसमे 2005 से प्रधानाचार्य नहीं है अस्पताल का राम मालिक और बैंक की कोई शाखा नहीं लोगों को पेंशन आदि के लिए किलोमीटरों दूर पनुवानौला या जिला मुख्यालय अलमोड़ा आना पड़ता है ।

स्थानीय लोग बताते हैं कि सहकारिता मंत्री के आश्वाशन बाद भी एक अदद सहकारी बैंक की शाखा तक नहीं खुली कहाँ तो राष्ट्रीयकृत बैंक। थक हार कर लोगों का सब्र का बांध टूट गया और नैनी चौगरखा विकास समिति के बैनर तले स्थानीय लोगों ने नैनी जागेश्वर सड़क के पास बैठ अनिश्चित कालीन धरना आज शुरू कर दिया है । स्थानीय निवासी विनोद जोशी ने हिलवार्ता को बताया कि आसपास के गांवों के विद्यार्थियों के लिए दस किमी की परिधि में एक मात्र इंटर कालेज है जहां राज्य बनने से पहले जहां हर विषय मे प्रवक्ता उपलब्ध थे अब इसी स्कूल में 2005 से प्रधानाचार्य नहीं है यही नहीं पिछले चार सालों से गणित,भौतिकी, जीव विज्ञान,समाज शास्त्र,व अंग्रेजी प्रवक्ता तथा एलटी में विज्ञान वर्ग के शिक्षकों का पद रिक्त चल रहा है । समिति के बैनर तले स्थानीय लोगों ने सरकार के खिलाफ जबरदस्त नारेबाजी कर जुलूस भी निकाला, सर्वदलीय इस रैली में सैकड़ों ग्रामीणों ने भाग लिया और सरकार को चेताया कि उनकी मांगों पर अविलंब कार्यवाही की जाय । आज से शुरू हुए धरने में पूरन सिंह रावत,राजेन्द्र सिंह खनी,खुशाल सिंह खनी,मोहन सिंह बोरा,रोहित टम्टा विनोद जोशी विनोद अंडोंला सहित कई ग्रामीण बैठे है । स्थानीय युवाओं ने आंदोलन के समर्थन में स्कूल कालेजों में संपर्क अभियान चलाने की घोषणा की है, गिरीश जोशी,और छात्र नेता गोपाल मोहन भट्ट ने कहा कि आंदोलन में कॉलेज में पढ़ रहे स्थानीय युवाओं को जोड़कर आंदोलन को तेज किया जाएगा ।


राजकीय इंटर कालेज नैनी चौगरखा में 2005 के बाद से प्रधानाचार्य ही नही है जबकि यह क्षेत्र पूर्व विधानसभा अध्यक्ष गोविंद सिंह कुंजवाल का है यही नहीं पास ही विश्वप्रसिद्ध जागेश्वर मंदिर है जहां प्रदेश के मुखिया मंत्री नौकरशाह साल में कभी न कभी आते रहे हैं स्थानीय जनप्रतिनिधियों ने सभी को उक्त समस्याओं से बार बार अवगत भी कराया है लेकिन आश्वासन के शिवा जनता के हाथ कुछ नहीं आया । यह शर्मशार होने के लिए काफी नहीं है कि राज्य बनने से पहले जिन स्कूलों में लखनऊ से पर्याप्त संसाधन सहित अध्यापक उपलब्ध हो जाया करते थे अब इन स्कूलों का राम मालिक है।आसपास के गांव नैनी,तरुला,हरड़, जिंगल,नैलपड,मल्ली नैनी, तल्लीनैनी ,चमुवा, कटोजिया,चर्चाली, जारकोट,तड़खेत गांव के बच्चे इस स्कूल में पढ़ने जाएं तो कैसे,स्कूल में प्रधानाचार्य और शिक्षकों की कमी के चलते स्थानीय सक्षम लोग बच्चों को पढ़ाई के लिए दूसरी जगह भेजने को मजबूर हैं जबकि गरीब ग्रामीण पढ़ाई छोड़ रहे हैं । ज्ञात रहे कि क्षेत्र के गांवों के चार दर्जन से अधिक युवा सेना में हैं वावजूद इसके एक भी बैंक क्षेत्र में न होना सेेना के परिवारों की उपेक्षा का उदाहरण है ।

क्या यह धरना यह बताने के लिए काफी नही है कि राज्य में सत्तारूढ सरकारें जनता के प्रति किस कदर जबावदेह हैं,आखिर 20 साल के बाद भी पहले के बने इन स्कूलों को सरकार टीचर उपलब्ध कराने तक की तकलीफ उठाने को तैयार नहीं है ?

उम्मीद की जानी चाहिए कि सरकार अपने विकास के एजेंडे से समय निकालकर पर्वतीय क्षेत्रों में मानव संसाधन की तरफ भी ध्यानाकर्षण करेगी और जनता की इस न्यायोचित मांग पर अविलंब कार्यवाही करेगी ।

हिलवार्ता न्यूज डेस्क

@hillvarta.com