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सायरन बजते ही जंगली जानवरों की मिलेगी जानकारी जी हां अगर यह प्रयोग सफल हुआ तो उत्तराखंड के लोगों को बड़ी राहत मिलने वाली है।

सायरन वाला डिवाइस ..फ़ोटो साभार. मोहित डिमरी

उत्तराखंड में आये दिन जंगली जानवरों से मानव टकराव की बात आम हो चली है बढ़ती जनसंख्या कम होते जंगल, पर्वतीय वन क्षेत्रों में नासमझ ट्रेकर्स,जंगली क्षेत्रों में बेरोकटोक आवागमन जंगल के फ्लोरा फ़ौना के लिए खतरनाक साबित हुआ है, पशुपालन यहां का मुख्य व्यवसाय रहा है जंगल मे किसी किसान का बूढ़ा जानवर अगर जंगली जानवरों का शिकार बन भी जाता कोई हो हल्ला नही होता था, प्रकृति का नियम समझ किसान वन की सीमाएं और अपनी सीमाएं समझता था, वन्य प्राणियों की दैनिक भोजन साइकिल इस मानवजनित क्रियाकलापों की वजह गड़बडा गई है जिसका कारण जंगली जानवरों का आबादी की तरफ आना लगातार जारी है ।तमाम प्रयासों के वावजूद सरकारी अमले इसे रोकने में नाकाम रहे है

इधर जंगली जानवरों की वजह खेती को नुकसान तो हुआ ही है बड़ी संख्या में लोगों को गुलदार,और तेंदुवे ने शिकार बनाया है ,आये दिन सरकार से उचित कार्यवाही की मांग करना जिसके लिए पीड़ित समाज क्षमतानुसार प्रदर्शन आदि करते रहते हैं, वन विभाग के पास संसाधन और उच्च तकनीक भी नहीं कि कैसे इस संघर्ष को रोका जाए।

पहाड़ी क्षेत्रों में जंगली जानवरों से बचाव के लिए वाइल्ड एनिमल फार्म प्रोटेक्शन डिवाइस लगाई जा रही है। इस डिवाइस से न केवल इंसान की जान बचाई जा सकती है, बल्कि फसलों की सुरक्षा भी की जा सकती है। जंगली जानवरों से फसलों को हो रहे नुकसान और इंसानों पर जानवरों के बढ़ते हमले को लेकर रुद्रप्रयाग के जागरूक लोगों की जिलाधिकारी से पूर्व में कई बार चर्चा हुई थी। इसी क्रम में जिलाधिकारी मंगेश घिल्डियाल जी ने एक अभिनव पहल की है। अब सायरन बजते ही जंगली जानवर की जानकारी पूरे गांव को मिल जाएगी और जंगली जानवरों को आबादी में घुसने से कुछ हद तक सफलता पाई जा सकती है।

अलग अलग आवाज निकालने वाला डिवाइस

इसी क्रम में गुलदार से प्रभावित क्षेत्र बांसी गांव में वाइल्ड एनिमल फार्म प्रोटेक्शन डिवाइस स्थापित की जा रही है। इस डिवाइस में सेन्सर लगे है जो कि पांच मीटर के दायरे में सजीव प्राणी को ट्रैक करता है। सजीव प्राणी के ट्रैक होते ही यह डिवाइस आवाज करता है, जिसकी आवाज से जानवर भाग जाते है, यह पूर्णतः सोलर डिवाइस है। सामाजिक कार्यकर्ता/पत्रकार मोहित डिमरी ने बताया कि उन्होंने जिलाधिकारी मंगेश घिल्डियाल से अनुरोध किया है कि इस डिवाइस को उन सभी गांवों में स्थापित करना आवश्यक है जिन जिन स्थानों पर जानवर फसलों को नुकसान पहुँचा रहे हैं एवम जिन स्थानों पर इंसानों को जंगली जानवरों को सबसे अधिक खतरा है वहां इसे स्टाल किया जाए,और धीरे-धीरे अन्य गांवों में भी डिवाइस स्थापित की जाय जिससे मानव और जंगली जानवरों के बीच संघर्ष को समाप्त किया जा सके ।


हिलवार्ता समाचार डेस्क

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