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आज नैनीताल हाईकोर्ट में आईएमपीसीएल मामले में सुनवाई हुई और कोर्ट ने केंद्र द्वारा लाभ में चल रही इस कंपनी के निजीकरण पर रोक लगा दी है

रामनगर के पास मोहान में आईएमपी सीएल नाम की दवा निर्माण कंपनी है जो केंद द्वारा स्थापित मिनी रत्न कम्पनी के नाम से जानी जाती है वावजूद इसके केंद्र ने इसके विनिवेश का मन बनाया है जो अब कोर्ट ने फिलहाल रोक दी है ।

आज आईएमपीसीएल यानी इंडियन मेडिसिन फार्मास्युटिकल्स कॉरपोरेशन लिमिटेड के निजीकरण के खिलाफ दायर जनहित याचिका पर सुनवाई करते हुए हाईकोर्ट ने इस तरह का निर्णय दिया है।

रामनगर निवासी एडवोकेट नीरज तिवारी ने जनहित याचिका दायर कर कहा कि शतप्रतिशत शुद्ध लाभ दे रही आईएमपीसीएल कंपनी को केंद्रीय वित्त मंत्रालय द्वारा निजी हाथों में देने जा रहा है,जिससे उसमें कार्यरत सैकड़ों लोग बेरोजगार हो जाएंगे ,याचिका में यह भी बताया गया कि आईएमपीसीएल में केंद्र सरकार की 98.11 प्रतिशत हिस्सेदारी है जबकि शेष 1.89 प्रतिशत हिस्सेदारी उत्तराखंड सरकार के कुमाऊं मंडल विकास निगम लिमिटेड के पास है। सरकार ने आईएमपीसीएल में अपनी पूरी हिस्सेदारी बेचने के लिये प्रस्तावित रणनीतिक विनिवेश के तहत ‘‘वैश्विक स्तर’’ पर रूचि पत्र आमंत्रित किये हैं जिसे रद्द किया जाना चाहिए ।


उन्होंने कहा कि यह कम्पनी लगभग 500 लोगों को प्रत्यक्ष रोजगार दे रही है पिछड़े क्षेत्र के आम जन जड़ी बूटी उगाने और कम्पनी को आपूर्ति करने वाले वाले लगभग 5000 किसानों को अप्रत्यक्ष रोजगार देती है यहां के उत्पादन की उत्कृष्ट दवाइयां देश भर के सरकारी आयुर्वेदिक अस्पतालों में सस्ती दरों पर उपलब्ध कराईं जाती हैं। निजीकरण से ये दवाएं भी महंगी हो जाएंगी जो कि स्वास्थ्य के अधिकार का उल्लंघन होगा
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मुख्य न्यायाधीश रमेश रंगनाथन एवं न्यायमूर्ति आलोक कुमार वर्मा की खंडपीठ ने पक्षकारों को सुनने के बाद केंद्रीय वित्त मंत्रालय से, कम्पनी के निजीकरण की प्रक्रिया में अंतिम निर्णय लेने से पहले उत्तराखंड राज्य सरकार और केंद्रीय आयुष मंत्रालय और याचिकाकर्ता की आपत्तियों पर विस्तृत विचार कर निर्णय लेने को कहा है। जब तक इन आपत्तियों पर सम्यक विचार कर उनका निस्तारण नहीं किया जाता तब केंद्रीय वित्त मंत्रालय तक कम्पनी के निजीकरण पर अंतिम फैसला नहीं ले पायेगा.

हिलवार्ता न्यूज डेस्क