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उत्तराखड हाई कोर्ट ने प्रदेश में राज्य सरकार द्वारा बिजली विभाग में तैनात अधिकारी और कर्मचारियों को सस्ती बिजली देने व आम जनता के लिए बिजली की दरों को बढ़ाने के खिलाफ दायर जनहित याचिका की सुनवाई करते हुए कोर्ट में यूपीसीएल ने शपथपत्र पेश कर कहा कि वे विभागीय कर्मचारियों व अधिकारियों को दी जाने वाली बिजली को सीमित किया जा रहा है और उनको अब फ्री में बिजली नही दी नही जाएगी। कोर्ट ने पिटकुल व यूपीसीएल के कार्मिकों को दी जा रही बिजली का सम्पूर्ण डाटा 25 नवम्बर को कोर्ट में पेश करने के आदेश सचिव ऊर्जा , पिटकुल व यूजेवीएनएल के अधिकारियो को दिए है। मामले की सुनवाई मुख्य न्यायधीश रमेश रंगनाथन व न्यायमूर्ति आलोक कुमार वर्मा की खंडपीठ में हुई।
       मामले के अनुसार देहरादून की आरटीआई क्लब ने नैनीताल हाईकोर्ट में जनहित याचिका दायर कर कहा है कि सरकार विद्युत विभाग में तैनात अधिकारियों से 1 महीने का बिल मात्र 400 से 500 रुपए एवं अन्य कर्मचारियों से 100 रुपए ले रही है जबकि इनका बिल लाखो में आता है जिसका बोझ सीधे जनता पर पड़ रहा है। वहीं याचिकाकर्ता का कहना है कि प्रदेश में कई अधिकारियों के घर बिजली के मीटर तक नहीं लगे हैं जो लगे भी है वे खराब स्थिति में हैं।उदारहण के तौर पर जनरल मैनेजर का 25 माह का बिजली का बिल 4 लाख 20 हजार आया था और उसके विजली के मीटर की रीडिंग 2005 से 2016 तक नही ली गयी । वहीं कोर्पोरेशन ने वर्तमान कर्मचारियों के अलावा रिटायर व उनके आश्रितों को भी बिजली मुफ्त में दी है जिसका सीधा भार आम जनता की जेब पर पड़ रहा है । याचिकर्ता का कहना है कि उत्तराखंड ऊर्जा प्रदेश घोषित है लेकिन यहां हिमांचल से मंहगी बिजली है जबकि वहाँ बिजली का उत्पादन तक नही होता है।