Breaking News

Big breaking: उत्तराखंड में चुनाव पूर्व सियासी ड्रामा चालू आहे । अब हरक सिंह रावत को पार्टी और केबिनेट से निकाले जाने की खबर : देर रात हुआ सब कुछ पढ़िए @हिलवार्ता BIG NEWS: लक्ष्य सेन इंडिया ओपन जीते, फाइनल में 24-22,21-17 से विश्व विजेता खिलाड़ी को दी शिकस्त,पूरी खबर @ हिलवार्ता Big Breaking : लक्ष्य सेन India Open Badminton 2022 के फाइनल में पहुँचे, विश्व चेम्पियन लोह किन यू से होगा मुकाबला : पूरी खबर @हिलवार्ता विधानसभा चुनाव 2022 : पर्वतीय क्षेत्रों में कम लोग कर रहे मतदान, 2017 का ट्रेंड जारी रहा तो कई दलों का चुनावी गणित होगा प्रभावित, विशेष रिपोर्ट @हिलवार्ता विधानसभा चुनाव 2022: हलद्वानी में मेयर डॉ जोगेंद्र पाल सिंह रौतेला ही होंगे भाजपा के खेवनहार, सूत्रों से खबर @हिलवार्ता
ख़बर शेयर करें -

उत्तराखड हाई कोर्ट ने प्रदेश में राज्य सरकार द्वारा बिजली विभाग में तैनात अधिकारी और कर्मचारियों को सस्ती बिजली देने व आम जनता के लिए बिजली की दरों को बढ़ाने के खिलाफ दायर जनहित याचिका की सुनवाई करते हुए कोर्ट में यूपीसीएल ने शपथपत्र पेश कर कहा कि वे विभागीय कर्मचारियों व अधिकारियों को दी जाने वाली बिजली को सीमित किया जा रहा है और उनको अब फ्री में बिजली नही दी नही जाएगी। कोर्ट ने पिटकुल व यूपीसीएल के कार्मिकों को दी जा रही बिजली का सम्पूर्ण डाटा 25 नवम्बर को कोर्ट में पेश करने के आदेश सचिव ऊर्जा , पिटकुल व यूजेवीएनएल के अधिकारियो को दिए है। मामले की सुनवाई मुख्य न्यायधीश रमेश रंगनाथन व न्यायमूर्ति आलोक कुमार वर्मा की खंडपीठ में हुई।
       मामले के अनुसार देहरादून की आरटीआई क्लब ने नैनीताल हाईकोर्ट में जनहित याचिका दायर कर कहा है कि सरकार विद्युत विभाग में तैनात अधिकारियों से 1 महीने का बिल मात्र 400 से 500 रुपए एवं अन्य कर्मचारियों से 100 रुपए ले रही है जबकि इनका बिल लाखो में आता है जिसका बोझ सीधे जनता पर पड़ रहा है। वहीं याचिकाकर्ता का कहना है कि प्रदेश में कई अधिकारियों के घर बिजली के मीटर तक नहीं लगे हैं जो लगे भी है वे खराब स्थिति में हैं।उदारहण के तौर पर जनरल मैनेजर का 25 माह का बिजली का बिल 4 लाख 20 हजार आया था और उसके विजली के मीटर की रीडिंग 2005 से 2016 तक नही ली गयी । वहीं कोर्पोरेशन ने वर्तमान कर्मचारियों के अलावा रिटायर व उनके आश्रितों को भी बिजली मुफ्त में दी है जिसका सीधा भार आम जनता की जेब पर पड़ रहा है । याचिकर्ता का कहना है कि उत्तराखंड ऊर्जा प्रदेश घोषित है लेकिन यहां हिमांचल से मंहगी बिजली है जबकि वहाँ बिजली का उत्पादन तक नही होता है।