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उत्तराखंड विशेष : जब एक पूर्व युवा फौजी ने नशे की तरफ जा रहे युवाओं का जीवन संवारने को अपनी पूरी पूंजी दांव पर लगाई, घर बना दिया ट्रेनिंग सेंटर, खबर विस्तार से @हिलवार्ता

उत्तराखंड में एक पूर्व फौजी” ने पुरोला में 85 ग्रामीण युवाओं को मात्र दो माह का कड़ा प्रशिक्षण देकर 55 युवाओं को  सेना ज्वाइन करा डाली । जी हां यह सच हैं .

दो साल पूर्व सेना से रिटायर हुए उत्तरकाशी जिले में यमुना घाटी के सरनौल गांव निवासी राजेश सेमवाल ने सेना से मिले फंड व अपनी पेंशन से इस पिछड़े क्षेत्र के स्थानीय युवाओं को निःशुल्क प्रशिक्षण देकर सेना सहित अन्य सुरक्षा बलों में भर्ती के लिए तैयार करने का बीड़ा उठाया और पुरोला के उबड़-खाबड़ मैदान में इन युवाओं को निखारने में जुट गये।
शिविर में 85 युवाओं ने दो माह का कड़ा प्रशिक्षण लिया और उसके बाद कोटद्वार में आयोजित गढ़वाल राइफल की भर्ती परीक्षा में इनमें से 55 युवाओं का सेना में चयन हो गया। राजेश की इस सफलता से क्षेत्र में तहलका मच गया और हजारों युवा राजेश के प्रशिक्षण शिविर की ओर उमड़ने लगे। आसपास के स्कूलों में जाकर राजेश ने लड़कियों के लिए भी एक विशेष कैंप लगाया और अब यमनोत्री के पास गंगनाणी में करीब डेढ़ सौ युवाओं का प्रशिक्षण कैंप चला रहे हैं।
राजेश, युवाओं के लिए अपनी जमीन पर प्रशिक्षणार्थियों के लिए बैरक बनाने के लिए राजेश, बैंक से लाखों का लोन ले चुके हैं बावजूद उसका जुनून बढ़ता ही जा रहा है। आजकल विख्यात निशानेबाज जसपाल राणा के पिता व द्रोणाचार्य पुरस्कार से सम्मानित नारायण सिंह राणा द्वारा सेना भर्ती के लिए जसपाल राणा शूटिंग रेंज पौंधा, देहरादून में चलाए जा रहे निःशुल्क सेना भर्ती प्रशिक्षण शिविर में राजेश को मदद के लिए आमंत्रित किया है जहां वे इन युवाओं को निखार रहे हैं। राजेश का यह प्रशिक्षण सिर्फ सेना के भर्ती तक के लिए ही सीमित नहीं है बल्कि ये युवा जीवन के हर फील्ड में सफल होने के उद्देश्य से युवाओं को प्रशिक्षित कर रहे हैं ।

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सोलह वर्ष की उम्र में गढ़वाल राइफल में भर्ती हुए नौजवान ने उत्तराखंड में नई इबादत लिख डाली है । सेना से ऐच्छिक सेवानिवृत्ति के बाद उसने अपनी सारी पेंशन भत्ते में मिले पैसे गरीब युवाओं की किश्मत संवारने में लगा दी । अपने घर को ट्रेनिंग सेंटर में बदल दिया । गांव गांव जाकर गरीब बच्चों को सेना में भर्ती होने के लिए मोटीवेट किया । जब बच्चे राजी हो गए तो उन्हें कड़ा प्रशिक्षण देना शुरू किया । राजेश नशे की ओर जा रहे युवाओं को मेहनती स्वावलंबी और किसी भी क्षेत्र में कंपटीटिव बनाने के लिए अपना सबकुछ दांव पर लगा दिया है ।

हिलवार्ता से बातचीत में राजेश ने बताया कि वह गांव के बहुमुखी प्रतिभा के धनी युवाओं को आत्मनिर्भर बनाना चाहते हैं जिसके लिए उन्हें पूरी उम्र मेहनत करने में गुरेज नही । वह कहते हैं नशे की तरफ जा रही पहाड़ के गरीब बच्चों को वह सेना सहित दूसरे रोजगार के लिए तैयार कर रहे हैं जिसके लिए वह दिन रात मेहनत कर रहे हैं और परिणाम भी आने लगे हैं । उनका कहना है कि युवाओं के सामने एक टारगेट रखना जरूरी है । उनमें क्षमता है बस थोड़ा मोटिवेट करने से उनकी ऊर्जा का उपयोग देश और समाज के लिए किया जा सकता है ।
इन युवाओं के मदद से राजेश यहां के गांवों में नशामुक्ति अभियान भी चला रहे हैं और कई गांव के लोगों ने सामुदायिक तौर पर गांव के ग्राम देवता के मंदिर में शपथ लेकर गांव को नशामुक्त करने के अभियान में जुट गये है ।

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एक घटना जिसने राजेश को बदल दिया 

हिलवार्ता से बातचीत में राजेश बताते हैं कि 2020 में जब वह गांव आये । उन्होंने एक 20 साल के युवा को नग्न बेहोसी की हालत में किसी नेता का जयकारा लगाते हुए देखा । जो संभवतया किसी राजनीतिक दल का कार्यकर्ता हो और जिसे किन्ही कारणों से नशे की तरफ चला गया और अर्धविक्षिप्त हो गया । राजेश कहते हैं कि यह एपिसोड उनके लिए बहुत दर्दनाक था इसी दिन उन्होंने ठान लिया कि ऐसे तो पहाड़ के युवा बर्बाद हो जाएगे और यही तय कर लिया कि वह सेना से वापस आकर इनके लिए कुछ करेंगे ।

राजेश बताते हैं कि वापस ड्यूटी जॉइन करने के बाद उन्होंने अपने सीओ से सेवानिवृत्ति के लिए आवेदन कर दिया । सीओ ने राजेश को प्रॉमोशन का हवाला दिया और इनकार कर दिया । राजेश कहते हैं कि जब मैने सीओ को गांव की असल हालात बयां की और कहा कि वह गांव के लिए कुछ करना चाहते हैं नशे की तरफ धकेली जा रही युवाओं को स्वावलंबी बनाना उनका लक्ष्य है तब जाकर सीओ ने हामी भरी । राजेश ने युवाओं की खातिर अपनी इग्यारह नाली जमीन बेच दी । हिलवार्ता को राजेश ने बताया कि उन्हें रिटारमेंट के बाद मिला पैसा सहित कुल 34 लाख रुपया वह निशुल्क प्रशिक्षण के लिए बनाई जा रही एकेडमी में लगा चुके हैं ।
राजेश अपनी मुहिम को कुमायूँ अंचल में भी लेकर आना चाहते हैं उन्होंने कहा कि बढ़ती नशाखोरी रोकने के लिए वह राज्य भर में ऐसे ही प्रशिक्षण की व्यवस्था कर युवाओं की ऊर्जा को सकारात्मक दिशा में मोड़ना चाहते हैं ।
राजेश की मुहिम का विरोध भी हुआ
राजेश बताते हैं कि शुरुवात में स्थानीय छुटभैय्ये नेताओं ने उनकी मुहिम को रोकने की कोशिश की । उन्हें बदनाम करने की कोशिश की गई कि राजेश किसी निजी मकसद के लिए यह सब कर रहा है । राजेश कहते हैं धीरे धीरे सब बदलने लगा । क्षेत्र के नवयुवकों ने उनपर भरोसा किया जिसकी वजह विरोधी चुप होते गए और उनकी मुहिम बढ़ती चली गई ।

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