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Haldwani : स्थानीय एमबीपीजी कालेज के नवनिर्मित सभागार में आज अपराह्न 1 बजे से पुस्तक प्रदर्शनी एवम पुस्तक विमोचन कार्यक्रम सम्पन्न हुआ । एमबीपीजी के प्राचार्य डॉ एनएस बनकोटी ने पुस्तक प्रदर्शनी का उद्घाटन सुभारम्भ किया । इसके बाद उत्तराखंड में जनसँख्या परिदृश्य एवम परिवर्तन विषय पर लिखी गई शोधपरक पुस्तक का विमोचन का कार्यक्रम सम्पन्न हुआ ।पुस्तक के लेखक प्रो बीआर पंत,रघुवीर चंद और बीएस मेहता हैं । इसके अलावा एक और पुस्तक का विमोचन हुआ, पत्थरों में धड़कती कला: कुमाऊँ हिमालय का चंद कालीन स्थापत्य पर आधारित इस पुस्तक के लेखक विवेक पंत हैं ।

पहाड़ के तहत हुआ इन दोनों किताबो का विमोचन एआईआरडी के पूर्व निदेशक डॉ भगवती प्रसाद मैठाणी और पूर्व महा निदेशक ए एस आई डॉ राकेश तिवारी के हाथों सम्पन्न हुआ ।कार्यक्रम की अध्यक्षता जीबी पंत विश्वविद्यालय के पूर्व कुलपति प्रो.बी एस बिष्ट ने की ।

जबकि कार्यक्रम का संचालन उत्तराखंड ओपन यूनिवर्सिटी के प्रो.गिरिजा पांडे ने किया । इस अवसर पर बोलते हुए गिरिजा पांडे ने पहाड़ की पिछली 50 सालों की यात्रा का संस्मरण साझा किया । पांडे ने कहा कि पहाड़ का पहाड़ के लिए योगदान याद किया जाना जरूरी होगा । लंबी यात्राओं के जरिए जरूरी सूचनाएं एकत्र कर सामाजिक उत्थान में महत्वपूर्ण भूमिका अदा की है ।

पहाड़ का दर्शन सामाजिक आर्थिक और पर्यावरण के सन्दर्भ में अनुकरणीय है । इसी श्रंखला को आगे बढ़ाते हुए आज कोविड काल के दो साल बाद फिर उत्कृष्ट शोध परक पुस्तकों के विमोचन का कार्यक्रम किया ।

जनसंख्या परिदृश्य एवम परिवर्तन पर बोलते हुए लेखक प्रो. बी आर पंत ने बताया कि कितना में 20 साल ( 1991-2011) का राज्य की साक्षरता जनसँख्या पर विस्तृत शोध के आधार पर दो दशक के खाका खींचने का प्रयास किया गया है । डॉ पंत ने पलायन पर भी आंकड़े पेश किए और बताया कि आजादी के पहले और बाद कि स्थिति का अवलोकन करें तो असल तस्वीर समझ मे आती है । इन बीते सालों में जनसंख्या घनत्व, साक्षरता सहित ट्राइबल अगड़ी पिछड़ी जातियों की सामाजिक अध्ययन पर बल दिया गया है ।  ज्ञात रहे कि पुस्तक में 1990 से 2011 तक के जनसँख्या आधारित पलायन आधारित और आर्थिक आधारित सर्वेक्षण को आंकड़े वार प्रस्तुत किया गया है । पुस्तक में पलायन के कारणों पर भी प्रकाश डाला गया है डॉ  पंत ने बताया कि प्रवास के आंकड़ों को भी पुस्तक में जगह दी गई है ।

मुख्य अतिथि के तौर पर बोलते हुए प्रो बी पी मैठाणी ने कहा कि जनसँख्या सहित अन्य शोधों को न्याय पंचायत स्तर पर और तहसील स्तर पर करने की जरूरत है । लेखकों ने जिस तरह के आंकड़े प्रस्तुत किये है वह काबिले तारिफ है । मैठाणी ने कहा कि यह शोध परक पुस्तक शोधार्थियों के लिए बहुत उपयोगी है ।

कार्यक्रम की अध्यक्षता कर रहे प्रो बीएस बिष्ट ने कहा कि पहाड़ के द्वारा दिया जाने वाला प्रोत्साहन समाज के लिए महत्वपूर्ण है । प्रो. शेखर पाठक के द्वारा पहाड़ के लिए किए जा रहे प्रयासों की सराहना करते हुए कहा कि लेखन एक विधा है लेकिन मंच प्रदान करना उससे भी महत्वपूर्ण कार्य है । उन्होने दोनों पुस्तकों के लेखकों को बधाई देते हुए कहा कि दोनों कृतियाँ उत्तराखंड के जनमानस के लिए आवश्यक दस्तावेज साबित होंगे । पुस्तकों में दर्ज आंकड़े शोध करने वाले विद्यार्थियों के लिए महत्वपूर्ण है ही । नीति नियंताओं के लिए भी एक दस्तावेजीकरण है ।

सभा के समापन सत्र में अपने संबोधन में प्रो शेखर पाठक ने पहाड़ की यात्रा और पुस्तकों की रचना के संदर्भ में जानकारी साझा की । उन्होंने लेखकों को बधाई देते हुए कहा कि चारों लेखकों ने महत्वपूर्ण कार्य किया है । उन्होंने समाज के लिए शोध पूर्ण और तथ्यपरक साहित्य लगातार लाए जाने की जरूरत बताई । प्रो. पाठक ने आशा व्यक्त की कि सामाजिक उत्थान हेतु लगातार विमर्श की जरूरत होती है इसलिए इस तरह के मंचों की आवश्यकता होती है । आज के आयोजन पर एमबी पीजी कालेज के आयोजन कर्ताओं का आभार जताते हुए कहा कि उन्हें लगता है कि इसी तरह के कार्यक्रम जारी रहेंगे ।

इस अवसर पर एमबीपीजी कालेज अध्यापकों कर्मचारियों सहित कई गणमान्य लोगों के साथ कला साहित्य से जुड़े कई लोग मौजूद रहे ।

हिलवार्ता न्यूज डेस्क 

 

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