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पांच राज्यों ने चुनाव परिणाम आए 10 दिन हो गए लेकिन पंजाब को छोड़कर चार राज्यों में अभी मुख्यमंत्री के नाम को लेकर असमंजस की स्थिति है । गत 10 दिनों से सी एम की कुर्सी को लेकर कयासों का बाजार गर्म है ।

उत्तराखंड में भले ही भाजपा बड़ी मेजोरिटी से चुनाव जीती है लेकिन राज्य की कमान किसके हाथ होगी यह तय नहीं हो पा रहा है । राज्य में 25 मार्च से पहले सरकार का गठन जरूरी है । आने वाले तीन दिन उत्तराखंड के लिए खास होंगे । इन तीन दोनों में राज्य की तस्वीर साफ हो जाएगी कि कौन मुख्यमंत्री और कौन कौन मंत्री बनाए जाएंगे । लेकिन उससे पहले सबकुछ दिल्ली से ही तय होना है जिसका इंतजार किया जा रहा है ।

राज्य के कई नेता दिल्ली डेरा जमाए हुए हैं जिनमे पूर्व मुख्यमंत्री निशंक त्रिवेंद्र रावत सहित प्रदेश अध्यक्ष कौशिक और पुष्कर सिंह धामी शामिल हैं ।
चारों नेताओं की पहले दौर की बैठक गृह मंत्री/ राष्ट्रीय अध्यक्ष से हो चुकी है वावजूद कोई हल नहीं निकल पाया है । बताया जा रहा है कि रमेश पोखरियाल निशंक के आवास पर दुबारा मंथन किया जा रहा है कि अगला मुख्यमंत्री कौन होगा । सूत्रों की माने तो चुनाव हारने के वावजूद धामी के नाम पर चर्चा जारी है । इसका एक कारण यह भी माना जा रहा है कि धामी युवा हैं केंद्रीय नेतृत्व युवा के तौर पर उन्हें प्रोजेक्ट कर चुका है । साथ ही कार्यवाहक सीएम के रूप में उनके नेतृत्व में पार्टी जीत हासिल की है । दरसल हाईकमान के लिए यह तय कर पाना आसान नही हो रहा है जब एक गुट लगातार मांग करते आ रहा है कि सीएम जीते हुए विधायकों में से ही बने । धामी के बाद दूसरे नम्बर पर राज्यसभा सांसद अनिल बलूनी का नाम भी चर्चाओं में है । कल शाम तक नाम की घोषणा की संभावनाएं जताई जा रही है ।

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इधर देहरादून में कल पार्टी के सभी विधायकों से अस्थायी राजधानी में ही बने रहने का फरमान जारी हुआ । साथ ही यह खबर भी पुख्ता हो गई कि कल प्रातः राज्यपाल उत्तराखंड कल प्रातः हालिया नियुक्त प्रोटेम स्पीकर बंशीधर भगत को 10 बजे प्रातः राजभवन में शपथ दिलाएंगे । उसके बाद अपराह्न प्रोटेम स्पीकर विधानसभा में विधायको को पद और गोपनीयता की शपथ दिलाएंगे ।

आज अगर दिल्ली में मुख्यमंत्री पद के लिए सर्वसम्मति बनती है तब कल शाम तय विधायक दल की बैठक में इस बात का एलान किया जा सकता है कि राज्य में किसके नेतृत्व में सरकार बनने जा रही है ।

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विश्वस्त सूत्रों के हवाले से ज्ञात हुआ है कि रेस में पुष्कर सिंह धामी आगे चल रहे हैं । पुष्कर धामी के लिए पार्टी के भीतर मंथन में यह बात सामने आ रही है कि उनके दुबारा पद पर आने से क्षेत्रीय समीकरण बेलेंस रहेगा । साथ ही यह भी कि दो मुख्यमंत्रियों के बाद उन्हें चुनाव पूर्व युवा मुख्यमंत्री के रूप में प्रोजेक्ट किया गया लेकिन उनको सत्ता की पटरी बिठाने से पहले ही चुनावों का सामना करना पड़ा । परंपरा के अनुसार राज्य में एक पद गढ़वाल एक कुमाऊँ को दिया जाता रहा है ऐसे में कुमाऊँ से किसी अन्य नेता पर आज की परिस्थितियों में धामी भारी पड़ते हैं । हालिया पार्टी संगठन अध्यक्ष पद हरिद्वार से विधायक मदन कौशिक के पास है ।

अन्य नामों सतपाल महाराज और धन सिंह रावत के अलावा निशंक सहित अनिल बलूनी ऋतु खंडूरी सुरेश भट्ट सहित अन्य चर्चाओं में है ।  लेकिन  इन नामों में उत्तराखंड की कुर्सी किसे मिलेगी यह ऊपर से ही तय होगा । अब देखना होगा कि पार्टी नेतृत्व इन नामों पर ही मुहर लगाती है या उसकी लिस्ट में कोई और है ।

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राज्य में भाजपा प्रचंड बहुमत से चाहे चुनाव जीती है लेकिन पार्टी के भीतर खेमेबाजी से इनकार नही किया जा सकता है । पार्टी के भीतर हर खेमे के अपने दावे हैं । यही वजह है कि 10 दिन बाद भी मामला अनिर्णित है ।

बताया जा रहा है कि पूर्व मुख्यमंत्री और महाराष्ट्र के राज्यपाल भगत सिंह कोश्यारी, रमेश पोखरियाल निशंक, त्रिवेंद्र रावत,बिशन सिंह चुफाल विजय बहुगुणा जैसे नाम राजनीतिक समीकरण साधने की कवायद कर रहे हैं । जिससे कि उनके किसी करीबी को राज्य की बागडोर मिले । राज्य में कुमाऊँ गढ़वाल समीकरण भी अहम है । दोनों क्षेत्रों सहित जातिगत समीकरण भी महत्वपूर्ण हैं जिसकी वजह ही देर हो रही है ।

वैसे सभी विकल्पों पर चर्चा जारी है । विगत पांच साल के कार्यकाल में भाजपा तीन मुख्यमंत्री बना चुकी है जिसके बाद काफी फजीहत पार्टी ने झेली ।  इन्ही कारणों से पार्टी देर से ही सही लेकिन सटीक निर्णय लेना चाहती है । बताया जा रहा है कि कल शाम तक इस मुद्दे से बादल छट सकते हैं ।

हिलवार्ता न्यूज डेस्क 

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