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पांच राज्यों में चुनाव हैं । इससे पहले सरकारों ने गली मोहल्लों कूचों में जा जाकर नई घोषणाएं की । लाखों के विज्ञापन दिए । देश मे हो रहे चहुमुखी विकास की बातें की । लेकिन यह नही बताया कि देश भारी असमानता का सामना कर रहा है । यहां गरीब और अमीर के बीच खाई बढ़ रही है । नेता आपको नही बताएंगे । देश के भीतर की संस्थाएं इस बात को छुपाएं लेकिन कई ऐसी संस्थाएं भी हैं तो हर देश की माली हालत पर नजर रखती है । गैर सरकारी संगठन ऐसी ही एक संस्था है जिसने दावोस में आयोजित वर्ल्ड इकोनॉमिक फोरम 2022 की बैठक के पहले दिन भारत की तश्वीर पेश की है । आइये जानते हैं रिपोर्ट के बारे ..

महामारी के दौरान जहां एक ओर देश में गरीबों के सामने खाने-पीने का संकट पैदा हो गया था, तो दूसरी तरफ इस दौरान देश में अमीरों की संख्या बढ़ी है। गैर सरकारी संगठन ऑक्सफैम इंडिया की एक रिपोर्ट के अनुसार 2021 में भारत में अरबपतियों की संख्या 102 से बढ़कर 142 हो गई।

आज वर्ल्ड इकोनॉमिक फोरम 2022 का पहला दिन है। इसी मौके पर ऑक्सफैम इंडिया की तरफ से वार्षिक असमानता सर्वे जारी किया गया है। इसके अनुसार कोरोना काल में भारतीय अरबपतियों की कुल संपत्ति दोगुनी हो गई। इनकी अमीरी का अंदाजा इसी बात से लगाया जा सकता है कि टॉप-10 अमीरों के पास इतनी दौलत है कि वे देश के सभी स्कूलों और कॉलेजों को अगले 25 सालों तक चला सकते हैं।

रिपोर्ट बताती है कि देश का 45% पैसा सिर्फ 10% लोगों के पास है ।
कोरोना के कारण असमानता इतनी बढ़ गई है कि देश के सबसे अमीर 10% लोगों के पास देश की 45% दौलत है। वहीं, देश की 50% गरीब आबादी के पास महज 6% दौलत है।

1% टैक्स से मिल जाएंगे 17.7 लाख एक्स्ट्रा ऑक्सीजन सिलिंडर
रिपोर्ट में कहा गया कि भारत के टॉप-10% अमीर लोगों पर अगर 1% एडिशनल टैक्स लगाया जाए तो उस पैसे से देश को 17.7 लाख एक्स्ट्रा ऑक्सीजन सिलिंडर मिल जाएंगे। वहीं, देश के 98 अमीर परिवारों पर अगर 1% एक्स्ट्रा टैक्स लगाया जाए तो उस पैसे से आयुष्मान भारत प्रोग्राम को अगले सात सालों तक चलाया जा सकता है। आयुष्मान भारत दुनिया का सबसे बड़ा हेल्थ इंश्योरेंस प्रोग्राम है।

देश के 98 अमीर लोगों पर 55.5 करोड़ गरीब लोगों के बराबर दौलत
इस आर्थिक असमानता रिपोर्ट के मुताबिक, देश के 142 अरबपतियों की कुल दौलत 719 बिलियन डॉलर, यानी 53 लाख करोड़ रुपए है। 98 सबसे अमीर लोगों के पास 55.5 करोड़ गरीब लोगों के बराबर दौलत है। यह करीब 657 बिलियन डॉलर, यानी 49 लाख करोड़ रुपए होती है। इन 98 परिवारों की कुल दौलत भारत सरकार के टोटल बजट का करीब 41% है।

एक आंकड़े के अनुसार  भारत के अमीर 84 सालों तक रोजाना 7.4 करोड़ रुपये खर्च कर सकते हैं । रिपोर्ट में यह भी  कहा गया है कि अगर भारत के टॉप-10 अमीर रोजाना आधार पर 1 मिलियन डॉलर, यानी 7.4 करोड़ रुपए खर्च करें तो भी उनकी दौलत को खर्च होने में 84 साल लग जाएंगे। वहीं अगर देश के अमीरों पर वेल्थ टैक्स लगाया जाए तो 78.3 बिलियन डॉलर, यानी 5.8 लाख करोड़ रुपए कलेक्ट किया जा सकता है। इस पैसे से सरकार का हेल्थ बजट 271% बढ़ सकता है।

रिपोर्ट में बताया गया है कि कोरोना काल में 28% महिलाओं की नौकरी गई है । जेंडर की बात करें तो कोरोना काल में नौकरी खोने वालों  में 28% महिलाएं हैं। इससे उनकी कुल कमाई दो तिहाई घट गई है। महिलाओं की स्थिति को लेकर कहा गया कि बजट 2021 में सरकार ने मिनिस्ट्री ऑफ वुमन एंड चाइल्ड डेवलपमेंट पर केवल उतना खर्च किया जितना भारत के बॉटम-10 करोड़पतियों की कुल संपत्ति का आधा भी नहीं है । ऑक्सफैम इंडिया की ताजा रिपोर्ट ‘इनइक्वालिटी किल्स’ से पता चला है कि जहां भारत में 84 प्रतिशत परिवारों को एक साल में भारी गिरावट आई है जबकि भारत में मार्च, 2020 से 30 नवंबर, 2021 तक महामारी के दौरान अरबपतियों की संपत्ति 23.14 लाख करोड़ रुपये से बढ़कर 53.16 लाख करोड़ रुपये हो गई. इस बीच 4.6 करोड़ से अधिक भारतीयों के 2020 में अत्यंत गरीबी में जाने का अनुमान है.

वर्ल्ड इकोनॉमिक फोरम के डावोस एजेंडा से पहले 16 जनवरी को जारी ऑक्सफैम की रिपोर्ट “इनइक्वालिटी किल्स” ने यह भी पाया कि जैसे-जैसे कोविड ने भारत को तबाह करना जारी रखा, देश के स्वास्थ्य बजट में 2020-21 के संशोधित अनुमान से 10 फीसदी की गिरावट देखी गई.

हिलवार्ता न्यूज डेस्क 

 

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