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रामनगर विधानसभा सीट पर भाजपा और कांग्रेस दोनों पार्टियों में टिकट को लेकर असमंजस बना हुआ है .  जिन दो दर्जन सीटों पर भाजपा के भीतर जिन विधानसभा क्षेत्रों में टिकट को लेकर घमासान का अंदेशा है उनमें रामनगर भी शामिल है । यहां भाजपा कांग्रेस दोनों दलों में आधा दर्जन से अधिक दावेदार हैं । इधर शोशल मीडिया सर्वेक्षण में भाजपा के गणेश रावत पहली पसंद बने हुए हैं । देखना होगा कि यहां किसे पार्टी उम्मीदवार घोषित करती है ।

भाजपा और विपक्षी दल कांग्रेस पार्टी में विधानसभा टिकट को लेकर असमंजस बना हुआ है। सामान्य तौर पर दोनों ही पार्टियों के टिकट पहले से तय माने जा रहे हैं, लेकिन राजनीतिक उठापटक में दोनों ही पार्टियों में तयशुदा प्रत्याशी अंतिम समय पर बदल सकते हैं। यहां भाजपा विधायक दीवान सिंह बिष्ट के खिलाफ कांग्रेस के रंजीत रावत तैयारी कर रहे हैं, किंतु पार्टी हलकों में पूर्व मुख्यमंत्री हरीश रावत का नाम चलने से उनकी दावेदारी पर प्रश्न चिन्ह लग गया है। वहीँ दूसरी तरफ भाजपा में रामनगर सीट को कमजोर की श्रेणी में मानकर सिटिंग विधायक का टिकट कटने की संभावना बताई जा रही है। ऐसे में यहां का पूर्व घोषित चुनावी परिदृश्य बदल सकता है। आप ने इस सीट पर शिशुपाल रावत को उतारा है।

सवा लाख वोटरों वाली रामनगर विधानसभा सीट उत्तराखंड की एक प्रतिष्ठित सीट मानी जाती है। यहां से स्व0 नारायण दत्त तिवारी वर्ष 2002 में उपचुनाव जीतकर विधायक रहे और पूरे पांच साल कार्यकाल पूरा किया। 2012 में अमृता रावत जीतकर मंत्री बनी।

वर्ष 2007 और 2017 में भाजपा के दीवान सिंह बिष्ट विधायक चुने गए। वर्ष 2017 में मुख्यमंत्री के सलाहकार रणजीत रावत को दीवान सिंह बिष्ट ने करीब 7000 वोट से चुनाव हराया था। रंजीत रावत ने बीते 5 साल इसी विधानसभा सीट पर फोकस करते हुए अपनी दावेदारी प्रस्तुत की थी, किंतु हरीश रावत ने अपनी नाराजगी का प्रदर्शन करते हुए उनके विरोधी दावेदारों संजय नेगी और पुष्कर दुर्गापाल अपना आशीर्वाद दिया। ऐसे में हरदा की नाराजगी के साथ टिकट पाना और चुनाव जीतना एक टेढ़ी खीर साबित हो सकता है। हरीश रावत समर्थक दावेदारों ने पासा फेंकते हुए हरीश रावत को ही रामनगर से चुनाव लड़ने का न्योता देते हुए अपनी दावेदारी वापस लें ली है और रंजीत रावत पर एक तरह से दबाव बनाया है। हालांकि रंजीत समर्थक उनके हर हाल में रामनगर से ही चुनाव लड़ने की बात कह रहे हैं मगर हरीश रावत के साथ समझौते के बगैर उनकी राह रामनगर से आसान नहीं लग रही है।

वहीं दूसरी ओर भाजपा संगठन रामनगर को कमजोर सीट मानकर मौजूदा विधायक का टिकट बदलने की खबरें आ रही हैं। स्थानीय स्तर पर उपयुक्त नाम न मिल पाने की सूरत में टिकट बरकरार रहा सकता है अन्यथा कोई बाहरी दिग्गज नेता यहां से भाग्य आजमा सकते हैं। चौबट्टाखाल में माहौल देखकर सतपाल महाराज भी रामनगर उतर सकते हैं। वहीं स्थानीय स्तर पर राकेश नैनवाल, इंदर सिंह रावत और गणेश रावत तीन नाम उभरकर सामने आए हैं, जिनपर पार्टी दांव खेल सकती है। इसके अलावा चौधरी भगीरथ लाल सहित कुल 11 अन्य ने इस सीट से टिकट मांगा है।

अगर पार्टी टिकट बदलकर स्थानीय प्रत्याशी को देती है तो सत्ता विरोधी रुझान को आधा किया जा सकता है। अगर हरीश रावत यहां से नहीं उतरते है तो पुराने चेहरे दीवान सिंह को उतारा जा सकता है।

हिलवार्ता न्यूज डेस्क की रिपोर्ट 

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