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आल वैदर का खूब प्रचार प्रसार हुआ,अरबों खरबो के इस प्रोजेक्ट की उत्तराखंड में बन रही सड़कों पर सवाल भी उतने ही उठ रहे हैं.जल्दी घर पहुचाने के दावे संग बन रही इन सड़कों की गुणवत्ता पर सवाल होते ही रहे हैं जैसे रिटेनिंग वाल का ना होना आदि आदि बड़ी पोकलैंड से पहाड़ काटकर बनाई जा रही इन सड़कों का मलबा तलहटी की तरफ उड़ेल दिया गया है,जहां छोटी छोटी जैव विविधता जिंदा थी वहां मिट्टी रोड़ा पत्थर ने सब उजाड़ दिया है.बरसात में मिट्टी बहकर स्थानीय छोटी नदियों में गाद भरकर गांवों में आपदा का सबब बन जाने की आशंका बनी हुई है. जहाँ सड़कों को टिके रहने के लिए आधार दीवारें बन रही हैं उनके टिकाऊ होने पर सवाल उठ रहे हैं लेकिन कुछ होगा कहा नहीं जा सकता है क्योंकि सड़क की मानिटरिंग रास्ट्रीय राजमार्ग के अधिकारी कर रहे हैं.

इसी तरह का मामला आज फिर उजागर हुआ है चम्पावत से वरिष्ठ पत्रकार दिनेश पांडेय बताते हैं कि चम्पावत जिले के मुड़ियानी में( (स्कबर) कलमठ बन रहा है जिसको बाहरी तौर पर ही देखने से पता चलता है कि यह एक बरसात भी टिक जाए तो दुनिया का नवां आश्चर्य होगा.
इस कलमठ की गहराई 2 मीटर से ज्यादा है रास्ट्रीय राजमार्ग संख्या 9 में बन रहे इस अजूबे के दशर्न कोई भी जिम्मेदार एक्सपर्ट करे तो स्पष्ट हो पायेगा कि इंजीनियरिंग की यह नई टेक्नीक आई कहाँ से । अन्य विभागों के इंजीनियर कहते हैं कि यह मामला उच्च तकनीकी गड़बड़ी का नमूना है.इस कलमठ के ऊपरी हिस्से यानी ऊपरी सतह पर 2 मीटर मोटाई की मिट्टी पड़नी है तब यह समतल सड़क के लेबल पर आएगा लगभग 10 टन मिट्टी का अनुमान लगाया जाए तो कलमठ की मजबूती खुद समझ आती है

स्थानीय निवासी हेमन्त ढेक ने इस सड़क पर हुए निर्माण कार्य पर सवाल उठाए है उन्होंने हिलवार्ता को बताया कि सड़क निर्माण में सुरक्षा का कतई ध्यान नहीं रखा गया है अरबों के इस प्रोजेक्ट से फायदा होने से पहले दुर्घटनाओं के आसार बढ़ रहे हैं जिम्मेदार अधिकारियों को चाहिए कि इस सड़क की विशेषज्ञों की टीम से गुणवत्ता जांची जानी चाहिए और जहाँ जहाँ इस तरह का कार्य हुआ है उसे तुड़वाकर जानमाल की रक्षा सुरक्षा का ध्यान रखा जाना चाहिए.
वरिष्ठ पत्रकार दिनेश पांडेय
@हिलवार्ता न्यूज डेस्क