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पिघलता हिमालय साप्ताहिक अखबार आज 9 जून को अपने 42 वर्ष पूर्ण कर रहा है यह अपने आप मे बड़ी चुनौती है निरंतर अखबार को चलाना इतना आसान नही है लेकिन इस अखबार ने अपने 42 वर्ष की मैराथन अनवरत जारी रखी है । 1978 में पिघलता हिमालय स्व.दुर्गा सिंह मर्तोलिया और स्व.आनंद बल्लभ उप्रेती के प्रयासों से निकाला गया जिसे वर्ष 1979 में हल्द्वानी जैसे छोटे कस्बे से दैनिक पत्र के रूप में प्रकाशित किया गया संसाधनो की कमी की वजह जिसे लंबा चलाना आसान नही था इसलिए निर्णय लिया गया कि पत्र को सुचारू रखा जाय चाहे साप्ताहिक ही सही.और लगातार समसामयिक विषयों को पत्र छूता रहा जिसे आज के दौर में भी अनवरत जारी रखा जाना अपने आप मे मिशाल है.

दुर्गा सिंह मर्तोलिया की असमय मौत के बाद पत्र की पूर्ण जिम्मेदारी स्व.आंनद बल्लभ उप्रेती ने सम्हाली और पत्र की यात्रा को सुचारू रखने में अपना महत्वपूर्ण योगदान जारी रखा.स्व उप्रेती हल्द्वानी के जनसरोकारी पत्रकारों में गिने जाते हैं उनके देहावसान के बाद उनकी पत्नी स्व.कमला उप्रेती और अब उनकी पारिवारिक सदस्य गीता उप्रेती इस पत्र का संपादन कर रही है श्री उप्रेती के पुत्र डॉ पंकज उप्रेती ने बताया कि समय के साथ पिघलता हिमालय का डिजिटल संस्करण भी बना दिया गया है, पत्र बचे खुचे उन साप्ताहिक अखबारों में शामिल है जिनका पहाड़ के सूदूरवर्ती इलाकों के सामाजिक सांस्कृतिक सरोकार बरकरार है .कठिन परिस्थितियों के वावजूद किसी भी पत्र का अनवरत 42 वर्षों तक प्रकाशन अपने आप मे गर्व की बात है पिघलता हिमालय की इस उपलब्धि पर पूरी टीम को हिलवार्ता न्यूज की ओर से हार्दिक बधाई,शुभकामनाएं
हिलवार्ता डेस्क
Hillvarta.com

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