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उत्तराखंड के रोडवेज कर्मियों को पिछले तीन माह से वेतन भत्ते नहीं मिले हैं,दीपावली पर हाईकोर्ट के आदेश के बाद कर्मियों में खुशी की लहर है आखिर उनकी दीवाली अब गुलजार हो सकेगी.
उत्तराखंड रोडवेज कर्मचारी यूनियन ने हाईकोर्ट नैनीताल में एक जनहित याचिका लगाई थी जिसमे कहा गया था कि सरकार और निगम द्वारा उन्हें विगत तीन माह से वेतन भत्तों से वंचित रखा गया है जबकि सरकार ने निगम को मेरे बुजुर्ग,मेरे तीर्थ यात्री,रक्षा बंधन के लिए बहनों को फ्री सेवा,चुनाव डयूटी,सीनियर सिटीजन,सहित दिव्यांग के लिए फ्री यात्रा के दौरान हुए खर्च को वहन करने भुगतान करने की बात की थी.
परिवहन सचिव ने अपना पक्ष रखते हुए कोर्ट को बताया कि 16 अक्टूबर 2019 को सरकार को अवगत कराया है कि उसने निगम को इस मद का 69 करोड़ रुपया देना है,सचिव ने कहा कि निगम का 85 करोड़ में से सिर्फ 19 करोड़ ही मिल पाया है.और यह भी कि अगर फ्री सेवा का लाभ देना है तो सरकार इसका भुगतान स्वयं करे ऐसा नहीं करने पर निगम घाटे में चला जाएगा.
इधर कर्मचारी यूनियन ने कहा कि एक तरफ सरकार उनका पैसा नहीं दे रही वहीं बिना वेतन कार्य वहिष्कार,हड़ताल पर जाने पर उन पर एस्मा के तहत कार्यवाही की जा रही है जो अन्यायपूर्ण है.यूनियन ने कोर्ट को बताया कि उनका ना तो वेतन मिल रहा है, ना ही उनको नियमित किया जा रहा है, जिस वजह उनके सामने रोजी रोटी का संकट पैदा हो गया है.
यहां तक कि सेवानिवृत्त कार्मिकों के भत्ते तक लंबित है,यूनियन ने बताया कि निगम का उत्तरप्रदेश पर करीब 800 करोड़ रुपया बकाया है उसे वसूलने में भी सरकार नाकाम रही है अगर इस राशि की वसूली कर ली जाए तो निगम और कर्मचारियों का संकट भी स्वतः ही समाप्त हो जाएगा.मामले की सुनवाई मुख्य न्यायाधीश रमेश रंगनाथन और आलोक कुमार वर्मा की खंडपीठ में हुई जहां सुनवाई के बाद पीठ ने शासनादेश अनुसार परिवहन,एवम् वित्त सचिव को दीवाली से पहले निगम का बकाया 69 करोड़ रुपया देने का आदेश जारी कर दिया है.
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