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Dehradun : राज्य में महिलाओं के विरुद्ध होने वाले अपराधों की सही विवेचना और अपराध से निपटने के तरीकों सहित नए कानूनों की जानकारी हेतु राजधानी में महिला पुलिसकर्मियों की एकदिवसीय कार्यशाला का आयोजन हुआ जिसमें 13 जिलों की 125 महिला अधिकारी शामिल हुई ।

महिलाओं के विरूद्ध होने वाले बलात्कार, छेड़खानी एवं पोक्सो एक्ट के मामलों की जांच करने वाली महिला अधिकारियों को विशेष प्रशिक्षण हेतु डीजीपी अशोक कुमार की पहल पर इस कार्यशाला का आयोजन हुआ ।  जिसमें उपनिरीक्षक से पुलिस उपाधीक्षक स्तर के अधिकारी शामिल हुए।

पुलिस लाइन में आयोजित इस कार्यक्रम में प्रदेश के समस्त जनपदों से कुल 125 महिला अधिकारियों जिसमे 116 उपनिरीक्षक, 02 निरीक्षक और 7 पुलिस उपाध्यक्ष शामिल हुए ।

कार्यशाला का शुभारम्भ डीजीपी अशोक कुमार ने किया । डीजीपी ने कहा कि महिला सुरक्षा के प्रति उत्तराखण्ड पुलिस संवेदनशील है। निर्भया केस के बाद महिला सुरक्षा सम्बन्धी कानूनों में काफी परिवर्तन हुए हैं। साथ ही कई नए कानून बने हैं। आईपीसी, सीआरपीसी एवं साक्ष्य अधिनियम सभी में भी काफी बदलाव हुए हैं। जिनकी विस्तृत जानकारी सम्बंधित अधिकारियों को होना आवश्यक है ।

चूंकि महिला अपराधों की विवेचना उपनिरीक्षक स्तर से शुरू हो जाती है लिहाजा विवेचकों को पूरा ज्ञान हो इसके लिए यह कार्यशाला आयोजित की गई है । जिससे कि इन कानूनों की सही जानकारी हो सके और महिलाओं के विरूद्ध होने वाले बलात्कार, छेड़खानी एवं पोक्सो एक्ट के मामलों की जांच/विवेचना सही तरीके से हो ।

डीजीपी ने कहा कि महिला के विरुद्ध होने वाले अपराधों की विवेचना महिला पुलिस अधिकारियों द्वारा ही की जाती है यह ध्यान रखना अनिवार्य है कि पुलिस अधिकारी एवं विवेचक पीडित के प्रति संवेदनशील हों ।  BPR&D (Bureau of Police Research and Development) द्वारा इन कानूनों एवं महिला अपराधों की विवेचना के सम्बन्ध में पूर्व में एवं नवीनतम जारी एस0ओ0पी0 की जानकारी हर विवेचक तक पहुंचे और उसका वह अनुपालन करे।

डीजीपी ने कार्यशाला को सम्बोधित करते हुए कहा कि पुलिस का कार्य पीडित की मदद करना है, पीड़ित को न्याय दिलाना और कानून के अनुसार कार्य करना पुलिस का मूल उद्देश्य है ।
#UttarakhandPolice #womensafety

हिलवार्ता न्यूज डेस्क 

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