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नीति आयोग द्वारा विश्‍व बैंक की तकनीकी सहायता और स्‍वास्‍थ्‍य एवं परिवार कल्‍याण मंत्रालय के परामर्श से विकसित की गई नीति आयोग ने एक रिपोर्ट जारी की है,इसमें राज्‍यों और केन्‍द्र शासित प्रदेशों में दो वर्षों की अवधि (2016-17 और 2017-18) के दौरान हुए वृद्धिशील सुधार एवं समग्र प्रदर्शन को मापने और उन पर प्रकाश डालने पर फोकस किया गया है.
पूरी रिपोर्ट पढ़ने के बाद स्पष्ट है कि उत्तराखंड सरकार राज्य की स्वास्थ्य सुविधाओं पर कितना ध्यान दे रही है, लाख दावे किए जाए लेकिन पर्वतीय क्षेत्र में विगत दो साल में एक भी विशेषज्ञ डॉ तैनात नहीं हुआ सरकारी अस्पतालों में डॉ और नर्सिंग स्टाफ की भारी कमी जारी रही,आयुष्मान योजना में घोटाले की खबरों ने सुर्खिया बटोरी, इस बीच दर्जनों महिलाओं ने प्रसव के दौरान अपनी जान गवां दी या अस्पताल जाते गाड़ी में प्रसव की घटनाओं से राज्य की माली हालत पर ध्यान आकृष्ट किया.
आइये पढ़ते हैं कैसे तैयार होती है रिपोर्ट….
यह रिपोर्ट राज्यों और केन्द्र शासित प्रदेशों के प्रदर्शन को मापने का एक वार्षिक सुव्यवस्थित प्रदर्शन साधन है। इस रिपोर्ट में स्‍वास्‍थ्‍य संबंधी परिणामों या पैमानों के साथ-साथ समग्र प्रदर्शन में हुए वार्षिक वृद्धिशील बदलाव के आधार पर राज्‍यों और केन्‍द्र शासित प्रदेशों की रैंकिंग एक दूसरे की तुलना में की जाती है। रैंकिंग को बड़े राज्यों, छोटे राज्यों और केन्‍द्र शासित प्रदेशों के रूप में वर्गीकृत किया जाता है, ताकि एक जैसे निकायों के बीच तुलना सुनिश्चित की जा सके। स्‍वास्‍थ्‍य सूचकांक (हेल्‍थ इंडेक्‍स) एक भारित समग्र सूचकांक है। यह ऐसे 23 संकेतकों पर आधारित है जिन्‍हें स्वास्थ्य परिणामों, गवर्नेंस एवं सूचना और महत्‍वपूर्ण जानकारियों/ प्रक्रियाओं के क्षेत्रों (डोमेन) में बांटा गया है। प्रत्‍येक क्षेत्र को विशेष भारांक (वेटेज) दिया गया है जो उसकी अहमियत पर आधारित है और जिसे विभिन्‍न संकेतकों के बीच समान रूप से बांटा गया है.
बड़े राज्‍यों में केरल, आंध्र प्रदेश और महाराष्‍ट्र को समग्र प्रदर्शन की दृष्टि से शीर्ष रैंकिंग दी गई है, जबकि हरियाणा, राजस्‍थान और झारखंड वार्षिक वृद्धिशील प्रदर्शन की दृष्टि से शीर्ष तीन राज्‍य हैं,हरियाणा, राजस्‍थान और झारखंड ने विभिन्‍न संकेतकों के मामले में आधार से संदर्भ वर्ष तक स्वास्थ्य परिणामों में अधिकतम बेहतरी दर्शाई है। नवजात मृत्यु दर (एनएमआर), पांच वर्ष से कम आयु के बच्‍चों की मृत्‍यु दर (यू5एमआर), नवजात शिशुओं में जन्‍म के समय कम वजन वाले शिशुओं का अनुपात, कार्यरत कार्डियक केयर यूनिट (सीसीयू) वाले जिलों का अनुपात, प्रथम तिमाही के भीतर पंजीकृत एएनसी का अनुपात, गुणवत्ता प्रत्यायन प्रमाण पत्र वाले सीएचसी/पीएचसी का अनुपात, पूर्ण टीकाकरण कवरेज, संस्थागत प्रसव, जिला अस्पतालों में खाली पड़े विशेषज्ञ पदों का अनुपात और आईटी आधारित मानव संसाधन प्रबंधन सूचना प्रणाली में सृजित ई-पे स्लिप वाले कुल कर्मचारियों (नियमित और ठेके पर काम करने वाले) का अनुपात इन संकेतकों में शामिल हैं.
चौकाने वाली बात यह है कि देश मे प्रतिव्यक्ति आय में अग्रणी होने का दावा करने वाले राज्य उत्तराखंड में पिछले दो साल में शून्य स्वास्थ सुधार हुआ है इस वर्ष जारी राज्यों की इस लिस्ट में उत्तरखण्ड (0 या कम)वाले राज्यों जिसमे,मध्य प्रदेश,ओडिशा,उत्तर प्रदेश,बिहार
पश्चिम बंगाल,केरल,पंजाब,तमिलनाडु के साथ रखा गया है जहाँ कोई सुधार नहीं हुआ है.

हिलवार्ता न्यूज डेस्क
@Hillvarta. com