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कल यानी 8 जुलाई बाजपुर और श्रीनगर नगरपालिका के चुनाव सम्पन्न होने हैं सवाल यह है कि क्या बदली राजनीतिक हालात में कांग्रेस अपना गढ़ बचा पाएगी.आइये वरिष्ठ पत्रकार जगमोहन रौतेला के विश्लेषण से समझते हैं कि किस तरह के समीकरण हैं.
गत नवम्बर 2018 में जब पूरे प्रदेश में स्थानीय निकाय के चुनाव हो गए हैं। वहीं बाजपुर,श्रीनगर ( गढ़वाल ) नगर पालिकाओं और रुड़की नगर निगम के चुनाव कानूनी दॉव -पेचों के कारण नहीं हो पाए और चुनाव का मामला उच्च न्यायालय तक पहुँच गया था,अब उच्च न्यायालय के आदेश के बाद ही श्रीनगर और बीजपुर नगर पालिकाओं के चुनाव हो रहे हैं। जहॉ कल 8 जुलाई 2019 को मतदान होगा. ऊधमसिंह नगर जिले के बाजपुर में नगर पालिका चुनाव का प्रचार कल शाम समाप्त हो गया. बाजपुर पालिका सीट सत्तारूढ़ भारतीय जनता पार्टी के साथ ही राज्य के परिवहन व समाज कल्याण मन्त्री यशपाल आर्य की प्रतिष्ठा दॉव पर लगी हुई है भाजपा ने यहॉ से परिवहन मन्त्री आर्य की पसन्द के राजकुमार को नगर पालिका के अध्यक्ष पद के लिए चुनाव मैदान में उतारा है.भाजपा द्वारा परिवहन मन्त्री की पसन्द के व्यक्ति को टिकट दिए जाने से यहॉ मामला एक तरह से आर्य बनाम विपक्ष हो गया है.
कॉग्रेस ने पूर्व नगर पालिका अध्यक्ष गुरजीत सिंह गित्ते पर भरोसा किया है. बाजपुर नगर पालिका के चुनाव में अध्यक्ष पद के लिए भाजपा,कॉग्रेस के प्रत्याशियों के अलावा पॉच और प्रत्याशी चुनाव मैदान में हैं,जिनमें बहुजन समाज पार्टी की ओर से अशोक गौतम , समाजवादी पार्टी की ओर से अरविन्द यादव,कॉग्रेस के विद्रोही निसार अहमद,भाजपा के विद्रोही महिपाल यादव और निर्दलीय एडवोकेट अज़ीम अहमद चौधरी चुनाव मैदान में है,जिनमें से नामांकन वापसी की तिथि निकल जाने के बाद एडवोकेट अज़ीम अहमद चौधरी ने भाजपा को समर्थन देने की घोषणा कर दी है,तकनीकी तौर पर भले ही सात प्रत्याशी चुनाव में हों ,लेकिन चुनावी मुकाबला छह प्रत्याशियों के बीच ही होना है. उनमें भी जनाधार व राजनैतिक ताकत के आधार पर देखें तो कॉग्रेस व भाजपा प्रत्याशियों के बीच ही सीधा मुकाबला है. बसपा प्रत्याशी तीसरे स्थान की लड़ाई लड़ रहे हैं.
बाजपुर का एक राजनैतिक ऑकड़ा बहुत ही दिलचस्प है, वह यह कि उत्तराखण्ड बनने के बाद चार बार विधानसभा चुनाव हो चुके हैं हर बार यहॉ से भाजपा ने ही जीत दर्ज की है.इसी तरह नगर पालिका के तीन चुनाव अब तक हो चुके हैं,जिनमें दो बार कॉग्रेस और एक बार कॉग्रेस के विद्रोही उम्मीदवार ने जीत दर्ज की. इस तरह देखें तो यह कहा जा सकता है कि कॉग्रेस लगातार तीन बार यहॉ अध्यक्ष पद पर कब्जा करने में कामयाब रही है.ऐसा भी तब होता रहा है जब यहॉ से भाजपा विधायक का चुनाव जीतती रही है.इस बार चौथी बार नगर पालिका का चुनाव हो रहा है और यहॉ से भाजपा के विधायक यशपाल आर्य हैं.इस चुनावी ऑकड़े के अनुसार देखें तो जहॉ कॉग्रेस के सामने लगातार चौथी बार अपना कब्जा बरकरार रखने की चुनौती है तो वहीं भाजपा के सामने कॉग्रेस के इस वर्चस्व को तोड़ने की चुनौती है.
राज्य बनने के बाद पहली बार 2003 में नगर निकायों के चुनाव हुए.जिसमें बाजपुर नगर पालिका पर कॉग्रेस विजयी रही । उसके प्रत्याशी लाला चन्द्रभान अध्यक्ष पद पर विजयी रहे । तब उन्होंने भाजपा के राजेन्द्र सिंह बेदी को हराया और भाजपा दूसरे नम्बर पर रही । उसके बाद 2008 में जब नगर निकायों के चुनाव हुए तो गुरजीत सिंह गित्ते कॉग्रेस की ओर से टिकट के प्रबल दावेदार थे,लेकिन कॉग्रेस ने नगर पालिका अध्यक्ष लाला चन्द्रभान पर ही भरोसा किया । जिससे नाराज होकर गित्ते ने कॉग्रेस से बगावत कर निर्दलीय चुनावी ताल ठोक दी.गित्ते मतदाताओं का विश्वास जीतने में कामयाब रहे और नगर पालिका अध्यक्ष चुने गए, उस समय उन्होंने भाजपा के पूर्व सांसद बलराज पासी के पिता युवराज पासी को हराया और तब भी भाजपा दूसरे स्थान पर रही. कॉग्रेस के लाला चन्द्रभान तीसरे स्थान पर रहे.
राज्य में तीसरी बार नगर निकायों के चुनाव 2013 में हुए,तब यह सीट पिछड़े वर्ग की महिलाओं के लिए आरक्षित हो गई, गित्ते की नगर पालिका अध्यक्ष बनने के कुछ समय बाद कॉग्रेस में वापसी हो गई थी,महिला सीट होने पर वे कॉग्रेस से अपनी मॉ जसवीर कौर को टिकट दिलवाने में सफल रहे,भाजपा ने तत्कालीन नगर मंडल अध्यक्ष विमल शर्मा की पत्नी संतोष रानी को टिकट दिया. वह भी भाजपा की ओर से मतदाताओं का विश्वास जीतने में कामयाब नहीं हुई और कॉग्रेस की जसवीर कौर नगर पालिका अध्यक्ष बनी.कॉग्रेस की गुटीय राजनीति के हिसाब से देखें तो उसके प्रत्याशी गुरजीत सिंह गित्ते निर्गुट माने जाते हैं.बाजपुर में उनकी अपनी एक पकड़ मतदाताओं के बीच है और वे काम करने वाले नेता माने जाते हैं, इसी वजह से कॉग्रेस ने व्यापक सर्वे करने के बाद गित्ते पर ही एक बार फिर से दॉव खेला है.विद्रोही निसार अहमद कॉग्रेस को नुकसान पहुँचाने की स्थिति में नहीं हैं.
इस बार सामान्य सीट होने के बाद भी भाजपा ने परिवहन मन्त्री यशपाल आर्य के दबाव में अनुसूचित जाति के राजकुमार पर दॉव खेला है,जबकि उसकी ओर से विकास गुप्ता टिकट के मुख्य दावेदारों में थे. गुप्ता को टिकट न मिलने से भाजपा समर्थक व्यापारी ( बनिया ) नाराज बताया जा रहा है, इसके अलावा भाजपा के अनुसूचित जाति मोर्चा के प्रदेश अध्यक्ष राजेश कुमार भी नाराज बताए जा रहे हैं । वे भी गुप्ता को टिकट दिए जाने की पैरवी कर रहे थे,राजेश कुमार 2012 में भाजपा के टिकट पर बाजपुर से विधानसभा का चुनाव भी लड़ चुके हैं । वे 2017 में भी टिकट के दावेदार थे,लेकिन कॉग्रेस छोड़कर भाजपा में शामिल हुए यशपाल आर्य के सामने वे कमजोर पड़ गए थे.भाजपा प्रत्याशी राजकुमार की छवि भी जनता में बहुत अच्छी नहीं है.वे चुनाव मैदान में पूरी तरह से यशपाल आर्य के ही भरोसे हैं । पिछले दिनों कई मामलों में वे विवादित भी रहे हैं.
विधानसभा व नगर पालिका चुनावों में राज्य बनने के बाद से जिस तरह यहॉ के मतदाताओं को रुख रहा है, उससे नगर पालिका चुनाव में कॉग्रेस मजबूत दिखाई देती हैं,लेकिन मतदाताओं का मूड क्या निर्णय करेगा यह 8 जुलाई यानी कल को मतदान के बाद होने वाली मतगणना से ही सामने आएगा.
वरिष्ठ पत्रकार जगमोहन रौतेला
@ hillvarta.com