Breaking News

Big breaking:2023 के बाद Johnson & Johnson टेल्क पाउडर होगा बाजारों से गायब, पाउडर में कैंसर के लिए जिम्मेदार अवयव मिलने के बाद भरना पड़ा भारी जुर्माना,पूरी खबर पढिये@हिलवार्ता Good initiative : रामनगर स्थित public school ने उत्तराखंड के आजादी के नायकों की फ़ोटो गैलरी बनाकर की मिशाल कायम,खबर विस्तार से@हिलवार्ता Big Breaking: उत्तराखंड के लाल लक्ष्य सेन ने commenwealth games का स्वर्ण पदक जीत रचा इतिहास,पूरी खबर@हिलवार्ता उत्तराखंड : दुखद खबर: उत्तराखंड क्रांति दल के पूर्व कार्यकारी अध्यक्ष हरीश पाठक का निधन, पूरी जानकारी @हिलवार्ता Haldwani धरना अपडेट :सिटी मजिस्ट्रेट का आश्वासन, एक हप्ते में होगा समाधान ,जलभराव से निजात के लिए चल रहा धरना स्थगित,विधायक भी पहुँचे धरनास्थल,खबर@ हिलवार्ता
ख़बर शेयर करें -

उत्तराखंड : सूबे में 2022 चुनावों से पहले कर्मचारियों की नाराजगी सतारुढ़ भाजपा के लिए दिक्कत पैदा कर सकती है । हालांकि 70 दिन से चली आ रही उपनल सहित कुछ संगठनों से सरकार हड़ताल वापस कराने में सफल हुई है । अभी भी ओपीएस पुरानी पेंशन का मसला बड़ा मुद्दा बनकर उभरा है । वहीं परिवहन मिनिस्टीरियल संघ का पदोन्नति को लेकर कार्यबहिष्कार जारी है । इधर संविदा में कार्यरत कनिष्ठ अभियंता भी तीन दिवसीय हड़ताल पर हैं ।

सूत्रों के अनुसार कर्मचारी संगठन सरकार की हीलाहवाली से नाराज हैं जिसका असर चुनावों में पड़ सकता है । उधर सरकार चुनावी साल में किसी भी कर्मचारी संगठन से नाराजगी मोल नही लेना चाहेगी । कैसे भी कर्मचारीयों को भरोसा दिलाया जा रहा है कि उनकी मांगों पर विचार किया जा रहा है । उपनल कर्मचारियों और पुलिस कर्मियों के आंदोलन को शांत करने के लिए हलद्वानी और देहरादून में सीएम के प्रतिनिधि को धरना स्थल पहुचकर आश्वासन देना पड़ा है । लेकिन अभी भी कई संगठन आंदोलन की राह पर हैं ।

ओपीएस सबसे बड़ा मुद्दा है  जिसमे 2005 के बाद नियुक्त सभी कर्मचारी शामिल हैं । ओपीएस का मामला सुप्रीम कोर्ट से कमर्चारियों के पक्ष में हुआ है । लेकिन वावजूद इसके सरकारें इसे टालती रही हैं । कर्मचारी भी एन चुनाव से पूर्व इस मामले को लेकर मुखर हो गए हैं । प्रदेश भर के ओपीएस के समर्थन में कर्मचारी देहरादून में बड़ा प्रदर्शन कर चुके हैं ।  सरकार असमंजस में हैं ओपीएस  लागू करना दूर इस मुद्दे पर हामी भरना भी मुश्किल पड़ रहा है ।

सरकार के सामने वित्तीय संकट है पहले से कर्ज लेकर चल रहा राज्य इतनी बड़ी संख्या में कर्मचारियों की मांगों पर कैसे निर्णय करे यह समस्या बनी हुई है । इधर विपक्षी भी चाहते हैं कि सरकार के ऊपर संगठनों का दबाव जारी रहे जिसके लिए विपक्षी नेता कर्मचारियों के आंदोलनों में पहुच भी रहे हैं ।

कुल मिलाकर कर्मचारियों की मांगों पर निर्णय करने में उसके पसीने छूटना तय है । आगे क्या होगा कर्मचारी मानेंगे कि नही यह समय बताएगा लेकिन चुनाव से ठीक पहले ओपीएस सरकार के लिए भारी मुसीबत बन कर उभर रहा है ।

हिलवार्ता न्यूज डेस्क 

, , , ,
Subscribe
Notify of
guest
0 Comments
Inline Feedbacks
View all comments