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नानकमत्ता और उसके आस-पास के गाँवों में रहने वाले, नानकमत्ता पब्लिक स्कूल में अध्ययनरत 4 शिक्षार्थी आँचल जोशी, रिया चन्द, दीपिका बोरा और प्रकाश चन्द का चयन 6 सप्ताह की इंटर्नशिप के लिए टीच फॉर इंडिया के प्रोग्राम “किड्स एजुकेशन रेवोल्यूशन” में हुआ है। 3 सप्ताह की अपनी सीखने की यात्रा के लिए चारों शिक्षार्थी वर्तमान में पुणे की फ्लेम युनिवर्सिटी में ट्रेनिंग कर रहें हैं।

पूरे देश से टीच फॉर इंडिया नेटवर्क से 20 स्टूडेंट लीडर्स चुने गए हैं जो “फैलोज़ ऑफ़ द फ़्यूचर फ़ैलोशिप” का हिस्सा होंगे। सबसे पहले शिक्षार्थियों ने ऑनलाइन फॉर्म भरे जिसमें आत्म-अवलोकन करने को मजबूर करने वाले सवाल थे। जैसे – अपने बारे में बताइए, आपके सपने का स्कूल कैसा होगा, अपने स्कूल की खास बात का ज़िक्र कीजिए, अपनी कमियों और कौशल के बारे में लिखिए, आदि।

इन सवालों के अधार पर देशभर के कुछ चुनिंदा स्टूडेंट्स का चयन इंटरव्यू राउंड के लिए हुआ। नानकमत्ता से पुणे पहुँचे, यह 4 शिक्षार्थी नानकमत्ता में प्रारम्भ किए गए सीखने के कुछ वैकल्पिक प्रयोगों जैसे सामुदायिक पुस्तकालयों, स्कूल समाचार पत्र, दीवार पत्रिका, पुस्तक और विज्ञान मेलों जैसी पहलों का नेतृत्व कर रहे थे। इन सभी पहलों ने सामूहिक रूप से इन शिक्षार्थियों के चयन होने में महत्वपूर्ण भूमिका अदा की है।

नानकमत्ता पब्लिक स्कूल के प्रबंधक चंद्रशेखर अटवाल ने इन शिक्षार्थियों के चयन पर कहा कि – “इन लर्नर्स ने अपनी टीम के साथ मिलकर पूरे स्कूल सिस्टम को बदलने और हमारी सीखने की प्रक्रिया को एक नए मुक़ाम पर पहुँचाने में अहम भूमिका अदा की है। सामुदायिक पुस्तकालय और अख़बार संपादन से जुड़कर इन्होंने न सिर्फ़ अपने साथियों को सिखाया, साथ ही लिखने, संवाद करने और टीम में काम करने के अपने कौशल को निखारा।”

चंद्रशेखर का मानना है कि इन प्रयोगों की बदौलत ही हम संस्थान के मिशन को लेकर निश्चित हो पाए हैं। स्कूल का मिशन एक ऐसी शिक्षा के लिए स्पेस बनाना है जो समग्र और ग्रामीण उत्तराखण्ड में प्रासंगिक हो। शिक्षार्थी अलग-अलग स्पेस में स्कूल का प्रतिनिधित्व करते हुए इस बात का ज़िक्र करते हैं। देश के तमाम संगठनों के साथ कॉलैबोरेशन ने इन शिक्षार्थियों को और ज़्यादा संवेदनशील और समावेशी बनाने में मदद की है।

ज्ञात हो कि नानकमत्ता में स्थित नानकमत्ता पब्लिक स्कूल 2020 से टीच फॉर इंडिया के साथ शिक्षा समानता के लक्ष्य की ओर काम कर रहा है। इसी तरह से विद्यालय पिछले 3 सालों से नेशनल जियोग्राफी, प्रथम साइंस फाउंडेशन, जॉय ऑफ़ लर्निंग फाउंडेशन (दिल्ली), सिनेमा इन स्कूल, नवारुण प्रकाशन, रचनात्मक शिक्षक मंडल (रामनगर) और यूटोपियन सोसाइटी (खटीमा) के साथ इसी उद्देश्य को लेकर आगे बढ़ रहा है।

हिलवार्ता न्यूज डेस्क 

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