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खटीमा (उधमसिंह नगर ) में यूटोपियन सोसाइटी के तत्वावधान में पाँचवा सीमान्त साहित्य समारोह ( रविवार 27 फरवरी) मंत्रा क्लब में सम्पन्न हुआ इस अवसर पर अनेक विषयों पर परिचर्चा आयोजित की गई, जिसमें अलग अलग क्षेत्रों के नामी गिरामी हस्तियों ने अपने विचार साझा किए ।

 

यहां हुए पांचवे समारोह में दिन भर चले कार्यक्रम को छः सत्रों में बांटा गया था । प्रातः 9 बजे शुरू होकर आयोजन देर शाम तक चला । जिसके अंर्तगत विभिन्न विषयों पर सार्थक बहस परिचर्चा हुई । प्रथम सत्र में जहां पुस्तकों पर विस्तृत चर्चा हुई । वहीं अन्य सत्रों में विभन्न विषयों पर हुई चर्चा के दौरान साहित्य कला प्रेमी आखिर तक मौजूद रहे । पहले सत्र में उपस्थित पैनलिस्ट ने अपनी अपनी पसंद की पुस्तकों पर प्रकाश डाला और विस्तारपूर्वक परिचर्चा में शामिल किया । इस सत्र में भाग डॉ कमलेश अटवाल,डॉ हरिओम सिंह,आकाशवाणी अलमोड़ा के संपादक प्रतुल जोशी और नवीन चिलाना ने प्रतिभाग किया । पेनलिस्टों ने पाठकों के प्रश्नों के जबाब भी दिए ।

 

 

द्वितीय सत्र में नेपाली साहित्य की दो कालजयी रचनाओं पर विस्तृत परिचर्चा सम्पन्न हुई जिसमें पैनलिस्ट के रूप में श्री देव सिंह हरीश प्रसाद जोशी अर्जुन सिंह नेगी और अमित प्रसाद भट्ट ने प्रतिभाग किया । वक्ताओं ने नेपाली साहित्य सहित दोनों पुस्तकों पर विस्तार से अपनी बात रखी और हिंदी नेपाली भाषा की समरूपता पर प्रकाश डाला ।

तृतीय सत्र में विगत वर्षों की तरह किसी क्षेत्र विशेष में उल्लेखनीय कार्य करने वाले वयक्ति से मुलाकात कार्यक्रम “वयक्तित्व ‘ में इस वर्ष जाने माने ब्रेकेयल प्लेक्सस सर्जन ब्रिगेडियर डॉ एस पी भंडारी को आमंत्रित किया गया । डॉ भंडारी द्वारा मेडिकल क्षेत्र में किए सराहनीय योगदान और उनके द्वारा की गई अनेकों जटिल सर्जरीज के बारे में साक्षात्कार के माध्यम से पत्रकार ओपी पांडेय ने सवाल जवाब कर जानकारी हासिल की । सत्र में सवाल जबाब भी हुए  डाक्टर चंद्रशेखर जोशी के प्रश्न के जबाब में यह बात सामने आई कि समाज अति कुशल चिकित्सकों को उचित सम्मान देने के अपने दायित्व में असफल रहा है।

चौथे सत्र में लेखक अशोक पांडे की हालिया प्रकाशित पुस्तकों पर डॉ कमलेश अटवाल ने प्रकाश डाला । और इस बात पर जोर दिया कि डिजिटल युग मे भी अच्छी पुस्तकों के पाठक मौजूद हैं । यहां सभी प्रतिभागियों द्वारा अपनी 5 पसन्दीदा पुस्तकों का नाम लिखकर उसे गैलरी में टैग किया गया जिससे कि पाठकों को उन्हें जानने समझने में मदद मिल सके ।

पांचवे सत्र में विषय रहा- भाषा और इतिहास की यात्रा कितनी समानांतर । इस परिचर्चा में उत्तराखंड ओपन यूनिवर्सिटी के इतिहास विभागाध्यक्ष प्रोफेसर गिरजा पांडे ने इतिहास की सही व्याख्या किए जाने पर बल दिया  और समझाया कि किस तरह हमारे समाज में इतिहास बोध की कमी है जिसका प्रतिफल सामाजिक टकराव है ।

 

डाक्टर एन के अग्रवाल ने बताया कि विचारों के परिधान को भाषा कहते हैं । जबकि अशोक पांडे ने अपनी बात रखते हुए कहा कि इतिहास को तोड़ मरोड़ के पेश किया जा सकता है लेकिन भाषा को नहीं । डॉ सिद्धेश्वर सिंह ने कहा कि भाषा और इतिहास परस्पर समानन्तर यात्रा करते हैं । चारों पेनलिस्टों ने भाषा और इतिहास को लेकर विस्तृत चर्चा की । और सवालों के उत्तर दिए ।

अंतिम और छठे सत्र में राग और फाग का आयोजन हुआ जिसमें नेपाल से आए लोककलाकारों स्थानीय उत्तराखंड संगीत विद्यालय, थारू हंस सांस्कृतिक सेवा समिति रतनपुर सहित प्रेरणा कत्थक क्लासेज के कलाकारों ने अपनी प्रस्तुति दी ।

आयोजन में सैकड़ों साहित्य प्रेमी जागरूक नागरिक स्कूली बच्चे उपस्थिति रहे । कार्यक्रम के अंत मे प्रतिभागियों पेनलिस्टों का आभार व्यक्त करते हुए यूटोपियन सोसाइटी के प्रेसिडेंट डॉ चन्द्र शेखर जोशी ने सभी आगंतुकों/ श्रोताओं का आभार व्यक्त करते हुए कहा कि सीमान्त क्षेत्र में इस आयोजन के सफल होने में सभी सदस्यों का सहयोग सराहनीय है । अवसर पर बुक स्टाल लगाई गई थी जिसमें साहित्य कला इतिहास से संदर्भित पुस्तकों को लोगों ने खूब पसंद किया । युवा कवियों की कविताओं की प्रदर्शनी लगाई गई जहां नवोदित रचनाकारों को खूब सराहा गया ।

संस्था के महासचिव पूरन बिष्ट ने कहा कि संस्था के सदस्यों / कार्यकर्ताओं द्वारा सहयोग अनुकरणीय है । कार्यक्रम में डॉ लता जोशी, केएस रौतेला मनमोहन जोशी, श्याम जोशी बीसी पांडे, सहित सैकड़ों कला साहित्य प्रेमी मौजूद रहे । कार्यक्रम का संचालन डॉ आशुतोष द्वारा किया गया ।

हिलवार्ता न्यूज डेस्क 

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