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उत्तराखंड की शांत वादियां अब अशांत अब आये दिन सुर्खियों में हैं कभी अपराध के मामले में न्यूनतम आंकड़े इस राज्य के शांतिप्रिय होने की गवाही देने के लिए काफी थे लेकिन अब स्थितियां बदल चुकी हैं सुदूर पर्वतीय क्षेत्र भी अब अनछुए नहीं रहे .
उत्तराखंड में जैसे जैसे राज्य की आबादी बढ़ी उत्तरप्रदेश की आपराधिक प्रवर्ति प्रदेश में आने से नहीं रुक पाई क्राइम भी बढ़ा और उत्तराखंड का शांत प्रदेश होने का तमगा भी छिनने के कगार पर है इसका कारण प्रदेश में बेरोकटोक किसी तरह की रुकावट का ना होना माना जाता रहा है इधर राज्य बनने के बाद यूपी के अपराधियों की शरणस्थली बन चुका यह शांत क्षेत्र अब अपने साफ चेहरे पर दूसरे राज्यों के अपराधियों की कालिख पोत रहा है पिछले लंबे समय से यहां की शांत वादियों में शव ठिकाने लगाने का प्रचलन बढ़ता जा रहा है.
स्थानीय लोग डरे सहमे जो स्थानीय जंगलों से अपनी दिनचर्या पर निर्भर हैं शवों को देख असुरक्षित होते हैं जिसकी चिंता खैरख्वाहों को नही है आज प्रातः ही कालाढूंगी क्षेत्र में फिर एक शव मिलने की सूचना है,भीमताल की पहाड़ियां और कालाढुंगी के इस इलाके में आएदिन शव मिल रहे हैं कुछ ही दिन पहले एक युवती का अधजला शव नहर में फेंका गया था, पहले भी कई वारदातें हो चुकी हैं। बदमाश हत्या कर शव फैंक रहे हैं जिम्मेदार लोग आंख बंद कर शवों की रखवाली पोस्टमार्टम और तहकीकात में ही सारा समय जाया कर रहे है.
आज फिर चकलुवा चौधरी गेट के पास शव पड़ा मिला है। इन घटनाओं से लोगों में दहशत है। हर साल पर्यटक सीजन में इन इलाकों में वारदातें बढ़ रही हैं। पुलिस प्रशासन को इसके लिए पुख्ता इंतजाम करने चाहिए.स्थानीय जनप्रतिनिधि सवाल कर रहे हैं आखिर यह सिलसिला कब रुकने वाला है, उत्तराखंड की तरफ आ रहे अपराधियों को सघन चेकिंग अभियान चलाकर रोकने में प्रशासन अक्षम क्यो हो रहा है, विगत एक दर्जन से अधिक वारदातों में जबकि स्पष्ट हो चुका है कि अपराध यूपी में कर शव इन इलाकों में फेंक दिए जा रहे हैं.

हिलवार्ता न्यूज डेस्क
@ Hillvarta.com